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मां की हत्या में बेटे को दस वर्ष सश्रम कारावास
अमर उजाला ब्यूराे
Updated Wed, 01 Feb 2017 11:52 PM IST
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कोर्ट
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महराजगंज। अपर सत्र न्यायाधीश संजय कुमार डे ने इकलौते पुत्र वीरेंद्र गुप्ता द्वारा अपनी मां फुलझरी देवी निवासी गनेशपुर थाना कोतवाली सदर की लाठी-डंडे से पीट कर मार डालने के मामले में दोषी पाए जाने पर दस वर्ष के सश्रम कारावास के साथ ही साथ दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। मुकदमे के गवाहों सूरज शुक्ल, इश्तेयाक अली, विक्रम, गुलाब गौस तथा आशीष कुमार शुक्ला को मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने के मामले में कार्रवाई के लिए नोटिस जारी करने का आदेश पारित किया है।
पत्रावली के अनुसार, मृतका फुलझरी देवी निवासी गनेशपुर थाना कोतवाली सदर ने थाना कोतवाली में सूचना दी कि वह अपने इकलौते पुत्र वीरेंद्र गुप्त से अलग रहती थीं। 29 जुलाई 2015 को वीरेंद्र गुप्ता तथा गांव के उदय, रामवृक्ष बुरी तरह से मारे-पीटे तथा चकरोड पर छोड़कर भाग गए। करीब दो घंटे बाद गांव वालों की नजर पड़ने पर उसे लेकर थाने आए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। 30 जुलाई 2015 की रात में चोटों के कारण फुलझरी देवी की तबीयत खराब हो गई। गांव के सूरज ने उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां 65 वर्षीय फुलझरी देवी की मृत्यु हो गई।
गांव के चौकीदार की सूचना पर पूर्व में दर्ज मामले में धारा की बढ़ोत्तरी की गई। पुलिस ने वीरेंद्र गुप्ता के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता सर्वेश्वर मणि त्रिपाठी ने आठ गवाह और 13 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत कर सजा की मांग की। न्यायालय ने सबूतों का सूक्ष्म अवलोकन करते हुए सजा सुनाई है।
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पत्रावली के अनुसार, मृतका फुलझरी देवी निवासी गनेशपुर थाना कोतवाली सदर ने थाना कोतवाली में सूचना दी कि वह अपने इकलौते पुत्र वीरेंद्र गुप्त से अलग रहती थीं। 29 जुलाई 2015 को वीरेंद्र गुप्ता तथा गांव के उदय, रामवृक्ष बुरी तरह से मारे-पीटे तथा चकरोड पर छोड़कर भाग गए। करीब दो घंटे बाद गांव वालों की नजर पड़ने पर उसे लेकर थाने आए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। 30 जुलाई 2015 की रात में चोटों के कारण फुलझरी देवी की तबीयत खराब हो गई। गांव के सूरज ने उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां 65 वर्षीय फुलझरी देवी की मृत्यु हो गई।
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गांव के चौकीदार की सूचना पर पूर्व में दर्ज मामले में धारा की बढ़ोत्तरी की गई। पुलिस ने वीरेंद्र गुप्ता के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सहायक शासकीय अधिवक्ता सर्वेश्वर मणि त्रिपाठी ने आठ गवाह और 13 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत कर सजा की मांग की। न्यायालय ने सबूतों का सूक्ष्म अवलोकन करते हुए सजा सुनाई है।
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