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स्वास्थ्य
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टीकाकरण से मासूम रहेंगे स्वस्थ, जान गए हैं गांव-गांव सब
महराजगंज। बच्चों को बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगवाने के प्रति जनपद वासियों की जागरूकता बढ़ी है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में टीकाकरण का ग्राफ बढ़ता हुआ दिख रहा है। पांच साल पहले जहां टीकाकरण का ग्राफ 41.7 प्रतिशत रहा, वहीं अब बढ़कर 76.2 प्रतिशत हो चुका है। मिशन इंद्रधनुष के तहत बच्चों को बीमारियों से बचाव के टीका लगाया जाता है। इसे लेकर जिले के लोगों में जागरूक बढ़ी तो टीकाकरण का ग्राफ भी बढ़ता गया।
बच्चों और गर्भवती के टीकाकरण पर जोर रहता है । स्वास्थ्य विभाग 12 प्रकार के टीके सभी सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य उपकेंद्रों, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स, ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर प्रत्येक बुधवार व शनिवार को नि:शुल्क उपलब्ध करवाता है । इन सत्रों के दौरान जिन बच्चों और गर्भवती को टीका नहीं लग पाया है, उन्हें आशा कार्यकर्ता ढूंढ कर मिशन इंद्रधनुष के तहत टीकाकरण का लाभ दिलाती है।
रोटरी क्लब संस्थापक अध्यक्ष विन्ध्यवासिनी कहते हैं कि जिले में जागरूकता बढ़ी है। इसका परिणाम है कि बच्चों को समय से टीका लगवाने के प्रति लोग सजग हुए हैं। सिटिजन फोरम के मीडिया प्रभारी डॉ. शांति शरण मिश्र कहते हैं कि जागरूकता कार्यक्रमों का असर दिखने लगा है। यही कारण है कि बच्चों के टीकाकरण के प्रति गंभीरता दिख रही है।
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इन बीमारियों से बचाता है टीका
नियमित टीकाकरण 12 प्रकार की बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। टीबी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, टीटनेस, मिजिल्स, परट्यूटिस (काली खांसी), रूबेला, जेई (दिमागी बुखार), निमोनिया, वायरल डायरिया और हीमोफिलस इंफ्लूएंजा से बचाने में टीकों की भूमिका अहम है। जहां निजी अस्पतालों में इन बीमारियों से बचाव के लिए महंगे दामों पर टीके लगवाने पड़ते हैं वहीं सरकारी अस्पतालों में यह टीके पूरी तरह से निशुल्क हैं।
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यह निशुल्क टीके हैं आवश्यक
ऽ बच्चे के जन्म पर बीसीजी, हेपेटाइटिस बी एवं पोलियो की जीरो डोज लगेगा
ऽ बच्चे के डेढ़ महीने का होने पर पेंटावैलेट एक, ओपीवी एक, एफआईवीपी एक, रोटा एक एवं पीसीवी एक लगेगा
ऽ बच्चे के ढाई महीने का होने पर पेंटावेलेट दो, ओपीवी दो और रोटा दो लगेगा
ऽ बच्चे के साढ़े तीन महीने का होने पर पेंटावेलेट तीन, ओपीवी तीन, एफआईपीवी दो, रोटा तीन एवं पीसीवी दो लगेगा
ऽ बच्चे को नौ से बारह महीने की उम्र में एमआर एवं जेई पहला टीका, पीसीवी और विटामिन ए देंगे।
ऽ 16 से 24 माह की उम्र में बच्चे को एमआर, जेई, डीपीटी, ओपीवी और विटामिन ए हर 6 माह पर 5 साल तक देंगे।
ऽ बच्चे को पांच से छह साल की उम्र में डीपीटी दो लगेगा
ऽ बच्चे को 10 साल की उम्र में टीडी का टीका लगेगा
ऽ बच्चे को 16 साल की उम्र में टीडी
ऽ गर्भवती को टीडी का टीका लगता है
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नेशनल फेमली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों पर एक नजर
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वर्ष 2016-----------------------------------------वर्ष 2021
बीसीजी का टीका-87.4---------------------------96.8 प्रतिशत
पोलियो वैक्सीन--61.3-----------------------------82.7 प्रतिशत
मिजिल्स--------70.5------------------------------91.8 प्रतिशत
विटामिन एक की डोज--63.2---------------------81.1प्रतिशत
डीपीटी-------------68.4---------------------------92.4 प्रतिशत
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बच्चों को बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण बेहद जरूरी है। लोगों ने इसकी महत्ता को समझा और गंभीरता दिखाई। इसका परिणाम रिपोर्ट में दिख रहा है। आने वाले दिनों में इसमें ज्यादा सुधार दिखेगा। नियमित टीकाकरण तेजी से कराया जा रहा है।
डॉ. आईए अंसारी, उप मुख्य चिकित्साधिकारी
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महराजगंज। बच्चों को बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगवाने के प्रति जनपद वासियों की जागरूकता बढ़ी है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में टीकाकरण का ग्राफ बढ़ता हुआ दिख रहा है। पांच साल पहले जहां टीकाकरण का ग्राफ 41.7 प्रतिशत रहा, वहीं अब बढ़कर 76.2 प्रतिशत हो चुका है। मिशन इंद्रधनुष के तहत बच्चों को बीमारियों से बचाव के टीका लगाया जाता है। इसे लेकर जिले के लोगों में जागरूक बढ़ी तो टीकाकरण का ग्राफ भी बढ़ता गया।
बच्चों और गर्भवती के टीकाकरण पर जोर रहता है । स्वास्थ्य विभाग 12 प्रकार के टीके सभी सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य उपकेंद्रों, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स, ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर प्रत्येक बुधवार व शनिवार को नि:शुल्क उपलब्ध करवाता है । इन सत्रों के दौरान जिन बच्चों और गर्भवती को टीका नहीं लग पाया है, उन्हें आशा कार्यकर्ता ढूंढ कर मिशन इंद्रधनुष के तहत टीकाकरण का लाभ दिलाती है।
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रोटरी क्लब संस्थापक अध्यक्ष विन्ध्यवासिनी कहते हैं कि जिले में जागरूकता बढ़ी है। इसका परिणाम है कि बच्चों को समय से टीका लगवाने के प्रति लोग सजग हुए हैं। सिटिजन फोरम के मीडिया प्रभारी डॉ. शांति शरण मिश्र कहते हैं कि जागरूकता कार्यक्रमों का असर दिखने लगा है। यही कारण है कि बच्चों के टीकाकरण के प्रति गंभीरता दिख रही है।
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इन बीमारियों से बचाता है टीका
नियमित टीकाकरण 12 प्रकार की बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। टीबी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, टीटनेस, मिजिल्स, परट्यूटिस (काली खांसी), रूबेला, जेई (दिमागी बुखार), निमोनिया, वायरल डायरिया और हीमोफिलस इंफ्लूएंजा से बचाने में टीकों की भूमिका अहम है। जहां निजी अस्पतालों में इन बीमारियों से बचाव के लिए महंगे दामों पर टीके लगवाने पड़ते हैं वहीं सरकारी अस्पतालों में यह टीके पूरी तरह से निशुल्क हैं।
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यह निशुल्क टीके हैं आवश्यक
ऽ बच्चे के जन्म पर बीसीजी, हेपेटाइटिस बी एवं पोलियो की जीरो डोज लगेगा
ऽ बच्चे के डेढ़ महीने का होने पर पेंटावैलेट एक, ओपीवी एक, एफआईवीपी एक, रोटा एक एवं पीसीवी एक लगेगा
ऽ बच्चे के ढाई महीने का होने पर पेंटावेलेट दो, ओपीवी दो और रोटा दो लगेगा
ऽ बच्चे के साढ़े तीन महीने का होने पर पेंटावेलेट तीन, ओपीवी तीन, एफआईपीवी दो, रोटा तीन एवं पीसीवी दो लगेगा
ऽ बच्चे को नौ से बारह महीने की उम्र में एमआर एवं जेई पहला टीका, पीसीवी और विटामिन ए देंगे।
ऽ 16 से 24 माह की उम्र में बच्चे को एमआर, जेई, डीपीटी, ओपीवी और विटामिन ए हर 6 माह पर 5 साल तक देंगे।
ऽ बच्चे को पांच से छह साल की उम्र में डीपीटी दो लगेगा
ऽ बच्चे को 10 साल की उम्र में टीडी का टीका लगेगा
ऽ बच्चे को 16 साल की उम्र में टीडी
ऽ गर्भवती को टीडी का टीका लगता है
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नेशनल फेमली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों पर एक नजर
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वर्ष 2016-----------------------------------------वर्ष 2021
बीसीजी का टीका-87.4---------------------------96.8 प्रतिशत
पोलियो वैक्सीन--61.3-----------------------------82.7 प्रतिशत
मिजिल्स--------70.5------------------------------91.8 प्रतिशत
विटामिन एक की डोज--63.2---------------------81.1प्रतिशत
डीपीटी-------------68.4---------------------------92.4 प्रतिशत
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बच्चों को बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण बेहद जरूरी है। लोगों ने इसकी महत्ता को समझा और गंभीरता दिखाई। इसका परिणाम रिपोर्ट में दिख रहा है। आने वाले दिनों में इसमें ज्यादा सुधार दिखेगा। नियमित टीकाकरण तेजी से कराया जा रहा है।
डॉ. आईए अंसारी, उप मुख्य चिकित्साधिकारी