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Maharajganj News: जल्द पूरा होगा ऑटोमेटिक बैराज का निर्माण, किसानों की दूर होगी समस्या
Thu, 25 Jan 2024 04:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 25 Jan 2024 04:18 AM IST
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नौतनवा। रतनपुर के मिश्रौलिया में रोहिन नदी पर बन रहे ऑटोमेटिक बैराज का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। मार्च के अंत तक निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। इसके बाद नहरों में पानी आपूर्ति शुरू हो जाएगी। इससे फसलों की सिंचाई की समस्या दूर हो जाएगी।
क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई के लिए वर्ष 1947 में रतनपुर के मिश्रौलिया में रोहिन नदी में बीयर गेट बनाकर रोहिन नहर प्रणाली की नहरों में पानी आपूर्ति की जाती थी। अगस्त 2005 में आई बाढ़ से रोहिन बीयर गेट टूट गया। इससे नहरों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। किसानों की सिंचाई की समस्या को देखते हुए सिंचाई विभाग ने नदी पर अस्थाई कच्चा बांध बनाकर पानी आपूर्ति शुरू कर दी, लेकिन बरसात आने से पहले बाढ़ से बचाव के लिए विभाग द्वारा बांध काट दिया जाता था। इससे किसानों को रबी की फसल की ही सिंचाई की सुविधा मिल पाती थी।
2005 में बीयर गेट टूटा तो तत्कालीन सपा सरकार ने छह करोड़ रुपये बांध निर्माण के लिए दी थी। 2008 में शासन द्वारा स्वीकृति मिलने पर बीयर गेट निर्माण कार्य शुरू कराया गया, लेकिन तेज बाढ़ की धारा में बीयर गेट का पिलर क्षतिग्रस्त हो गया।
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2018 में भाजपा सरकार बनी तो रोहिन नदी पर ऑटोमेटिक बैराज बनाने की स्वीकृति दी और 148 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली। 2020 में ठेका हुआ जिसमें रायल इन्फ्रा कंस्ट्रू प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को प्रोजेक्ट निर्माण के लिए ठेका मिला। इसकी फंडिंग नाबार्ड संस्था ने की। उसके बाद 1.27 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण कर कार्य शुरू किया गया और बैराज निर्माण धीरे-धीरे शुरू किया गया।
अवर अभियंता मुकेश कुमार ने बताया कि अक्तूबर 2022 से बैराज निर्माण कार्य शुरू हुआ। अबतक 65 फीसदी निर्माण कार्य हो चुका है। 148 करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट निर्मित हो रहा है। इसमें 87 करोड़ रुपये रोहिन बैराज पर खर्च होंगे। शेष धन का खर्च नहरों की सफाई, पुलिया आदि मरम्मत कार्यों में लगेंगे। मार्च तक बैराज निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा।
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क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई के लिए वर्ष 1947 में रतनपुर के मिश्रौलिया में रोहिन नदी में बीयर गेट बनाकर रोहिन नहर प्रणाली की नहरों में पानी आपूर्ति की जाती थी। अगस्त 2005 में आई बाढ़ से रोहिन बीयर गेट टूट गया। इससे नहरों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। किसानों की सिंचाई की समस्या को देखते हुए सिंचाई विभाग ने नदी पर अस्थाई कच्चा बांध बनाकर पानी आपूर्ति शुरू कर दी, लेकिन बरसात आने से पहले बाढ़ से बचाव के लिए विभाग द्वारा बांध काट दिया जाता था। इससे किसानों को रबी की फसल की ही सिंचाई की सुविधा मिल पाती थी।
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2005 में बीयर गेट टूटा तो तत्कालीन सपा सरकार ने छह करोड़ रुपये बांध निर्माण के लिए दी थी। 2008 में शासन द्वारा स्वीकृति मिलने पर बीयर गेट निर्माण कार्य शुरू कराया गया, लेकिन तेज बाढ़ की धारा में बीयर गेट का पिलर क्षतिग्रस्त हो गया।
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2018 में भाजपा सरकार बनी तो रोहिन नदी पर ऑटोमेटिक बैराज बनाने की स्वीकृति दी और 148 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली। 2020 में ठेका हुआ जिसमें रायल इन्फ्रा कंस्ट्रू प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को प्रोजेक्ट निर्माण के लिए ठेका मिला। इसकी फंडिंग नाबार्ड संस्था ने की। उसके बाद 1.27 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण कर कार्य शुरू किया गया और बैराज निर्माण धीरे-धीरे शुरू किया गया।
अवर अभियंता मुकेश कुमार ने बताया कि अक्तूबर 2022 से बैराज निर्माण कार्य शुरू हुआ। अबतक 65 फीसदी निर्माण कार्य हो चुका है। 148 करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट निर्मित हो रहा है। इसमें 87 करोड़ रुपये रोहिन बैराज पर खर्च होंगे। शेष धन का खर्च नहरों की सफाई, पुलिया आदि मरम्मत कार्यों में लगेंगे। मार्च तक बैराज निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा।