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अपराजिता
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अपराजिता : कॉलेज की छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए
महराजगंज। छात्राएं अगर छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करने के बजाय आत्मविश्वास से प्रतिकार करना सीख लें तो कई समस्याओं का समाधान आसानी से हो जाएगा। आत्मरक्षा के लिए पास में हथियार होना जरूरी नहीं है। जरूरत तो सिर्फ हौसले की है। साथ ही जरूरी है आत्मरक्षा के ज्ञान की। विपरीत परिस्थितियों में हम अपने पास उपलब्ध दुपट्टा, पेन, पिन, मोबाइल फोन, चाबी जैसी चीजों से अपनी आत्मरक्षा करते हुए सामने वाले को कड़ा सबक सिखा सकते हैं।
यह कहना है ताइक्वांडो एक्सपर्ट रियाज अली का। वह बुधवार को निचलौल कस्बे के रामसमुख दास इंटर कालेज में अमर उजाला फाउंडेशन की अपराजिता मुहिम के तहत आत्मरक्षा शिविर में छात्राओं को आत्मरक्षा के हुनर सिखा रहे थे। ताइक्वांडो टीम की सदस्य नेहा यादव, नीलू गुप्ता, अभय गुप्ता, सलमान हुसैन, आदित्य मद्देशिया, पीयूष कुमार गुप्ता, मिठ्ठू मद्देशिया ने छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए। चाबी, पेन जैसी पास में रहने वाली चीजों को आकस्मिक स्थिति में हथियार की तरह इस्तेमाल करने के बारे में बताया।
इंस्पेक्टर रामाज्ञा सिंह ने छात्राओं को आत्मरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए मिशन शक्ति के तहत होने वाली गतिविधियों को बताया। उन्होंने सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबरों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा के लिए पुलिस सतर्क है। एंटी रोमियों की टीम की सदस्य नेहा सिंह ने आत्मरक्षा से जुडी जरूरी जानकारी दी। प्रधानाचार्य अंगिरा पटेल ने सभी अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया।
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इस दौरान अंकिश त्रिपाठी, शिवसागर पटेल, लक्ष्मी नारायण शर्मा, मुनील प्रजापति, विष्णु पटेल, दीपक, डीके, श्वेता पटवा, तैयब अली, मनोज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम में 75 छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
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आत्मरक्षा के उपाय हर किसी को जानना चाहिए। यदि आप आत्मरक्षा में निपुण होंगी, तो पूरे आत्मविश्वास के साथ हर परिस्थिति का सामना कर सकेंगी।
प्रीती चौधरी,
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चाबी, पेन, दुपट्टे जैसी अक्सर साथ रहने वाली चीजें भी विपरीत परिस्थिति में हथियार की तरह काम कर सकती हैं। शिविर में इसकी जानकारी हासिल हुई।
- लाडली निषाद,
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विपरीत परिस्थितियों में घबराना नहीं चाहिए, इससे खुद का मनोबल गिरता है। शिविर में उदाहरणों के जरिए आत्मविश्वास बढ़ाने के उपाय बताए गए।
- खुशबू गुप्ता
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मार्शल आर्ट बेटियों की आत्मरक्षा का आसान उपाय है। इसकी जानकारी हर किसी को होनी चाहिए। स्कूलों में अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
- शीतल चौधरी
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महराजगंज। छात्राएं अगर छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करने के बजाय आत्मविश्वास से प्रतिकार करना सीख लें तो कई समस्याओं का समाधान आसानी से हो जाएगा। आत्मरक्षा के लिए पास में हथियार होना जरूरी नहीं है। जरूरत तो सिर्फ हौसले की है। साथ ही जरूरी है आत्मरक्षा के ज्ञान की। विपरीत परिस्थितियों में हम अपने पास उपलब्ध दुपट्टा, पेन, पिन, मोबाइल फोन, चाबी जैसी चीजों से अपनी आत्मरक्षा करते हुए सामने वाले को कड़ा सबक सिखा सकते हैं।
यह कहना है ताइक्वांडो एक्सपर्ट रियाज अली का। वह बुधवार को निचलौल कस्बे के रामसमुख दास इंटर कालेज में अमर उजाला फाउंडेशन की अपराजिता मुहिम के तहत आत्मरक्षा शिविर में छात्राओं को आत्मरक्षा के हुनर सिखा रहे थे। ताइक्वांडो टीम की सदस्य नेहा यादव, नीलू गुप्ता, अभय गुप्ता, सलमान हुसैन, आदित्य मद्देशिया, पीयूष कुमार गुप्ता, मिठ्ठू मद्देशिया ने छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए। चाबी, पेन जैसी पास में रहने वाली चीजों को आकस्मिक स्थिति में हथियार की तरह इस्तेमाल करने के बारे में बताया।
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इंस्पेक्टर रामाज्ञा सिंह ने छात्राओं को आत्मरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए मिशन शक्ति के तहत होने वाली गतिविधियों को बताया। उन्होंने सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबरों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा के लिए पुलिस सतर्क है। एंटी रोमियों की टीम की सदस्य नेहा सिंह ने आत्मरक्षा से जुडी जरूरी जानकारी दी। प्रधानाचार्य अंगिरा पटेल ने सभी अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया।
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इस दौरान अंकिश त्रिपाठी, शिवसागर पटेल, लक्ष्मी नारायण शर्मा, मुनील प्रजापति, विष्णु पटेल, दीपक, डीके, श्वेता पटवा, तैयब अली, मनोज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम में 75 छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
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आत्मरक्षा के उपाय हर किसी को जानना चाहिए। यदि आप आत्मरक्षा में निपुण होंगी, तो पूरे आत्मविश्वास के साथ हर परिस्थिति का सामना कर सकेंगी।
प्रीती चौधरी,
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चाबी, पेन, दुपट्टे जैसी अक्सर साथ रहने वाली चीजें भी विपरीत परिस्थिति में हथियार की तरह काम कर सकती हैं। शिविर में इसकी जानकारी हासिल हुई।
- लाडली निषाद,
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विपरीत परिस्थितियों में घबराना नहीं चाहिए, इससे खुद का मनोबल गिरता है। शिविर में उदाहरणों के जरिए आत्मविश्वास बढ़ाने के उपाय बताए गए।
- खुशबू गुप्ता
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मार्शल आर्ट बेटियों की आत्मरक्षा का आसान उपाय है। इसकी जानकारी हर किसी को होनी चाहिए। स्कूलों में अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
- शीतल चौधरी