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बच्चों को सुपोषित बनाने की दिशा में जिम्मेदार उदासीन
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पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों की देखभाल करती स्टाफ नर्स। संववाद
- फोटो : MAHARAJGANJ
बच्चों को सुपोषित बनाने की दिशा में जिम्मेदार उदासीन
- 10 बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में छह बेड खाली
- कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने में रुचि नहीं ले रहे जिम्मेदार
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने की दिशा में जिम्मेदार उदासीन हैं। दस बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में चार बच्चे भर्ती हैं। छह बेड अब भी खाली हैं।
जिला पोषण पुनर्वास केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र में फरवरी माह में चार बच्चे आए हैं। 18 फरवरी से ही छह बेड खाली हैं। वर्तमान में चार बेड पर तीन साल के आयुष, तिलकवलियां निवासी प्रियांसी, खजूरिया निवासी दीप और आरूषी भर्ती हैं।
कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने के लिए यहां पर तैनात डॉक्टर और स्टॉफ नर्स, पोषण विशेषज्ञ द्वारा बच्चों की समुचित आहार के साथ जरूरी दवाएं दी जाती हैं। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 36,810 बच्चे कुपोषित और 7,963 बच्चे अति कुपोषित हैं। इन कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य जांच के बाद डॉक्टर की सलाह पर जरूरत के अनुसार इन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाता है। इसके लिए आशा और आंगनबाड़ी को जिम्मेदारी दी गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले कुपोषित बच्चों को भी इसमें भर्ती किया जाता है। जिससे कुपोषित बच्चों को सुपोषित किया जा सके, लेकिन इस पर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं होने से यहां कुपोषित बच्चे भर्ती नहीं हो पा रहे हैं।
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केंद्र में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या
हर माह पोषण पुनर्वास केंद्र में अप्रैल में पांच, मई में तीन, जून में सात, जुलाई में 12, अगस्त में पांच, सितंबर में 20, अक्तूबर में 19, नवंबर में सात दिसंबर में छह और जनवरी में आठ बच्चों को ही भर्ती किया गया है। वहीं, फरवरी माह में चार बच्चे भर्ती हैं। पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती बच्चों की संख्या बयां कर रही है कि जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण सुपोषित बनाने की मुहिम तेज नहीं हो पा रही है।
कुपोषण को दूर करने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। संबंधित विभाग के जिम्मेदारों को जरूरी दिशा-निर्देश दिया जा चुका है। बच्चों को सुपोषित करने की मुहिम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- गौरव सिंह सोगरवाल, सीडीओ
जिला अस्पताल की ओपीडी में जांच के दौरान यदि कोई बच्चा कुपोषित मिलता है तो उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाता है। इसके लिए चिकित्सकों को जरूरी दिशा-निर्देश दिया जा चुका है। बच्चों को सुपोषित बनाने की मुहिम को तेज करने की हर संभव कोशिश जा रही है।
- डॉ. एके राय, सीएमएस
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- 10 बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में छह बेड खाली
- कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने में रुचि नहीं ले रहे जिम्मेदार
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने की दिशा में जिम्मेदार उदासीन हैं। दस बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में चार बच्चे भर्ती हैं। छह बेड अब भी खाली हैं।
जिला पोषण पुनर्वास केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र में फरवरी माह में चार बच्चे आए हैं। 18 फरवरी से ही छह बेड खाली हैं। वर्तमान में चार बेड पर तीन साल के आयुष, तिलकवलियां निवासी प्रियांसी, खजूरिया निवासी दीप और आरूषी भर्ती हैं।
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कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने के लिए यहां पर तैनात डॉक्टर और स्टॉफ नर्स, पोषण विशेषज्ञ द्वारा बच्चों की समुचित आहार के साथ जरूरी दवाएं दी जाती हैं। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 36,810 बच्चे कुपोषित और 7,963 बच्चे अति कुपोषित हैं। इन कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य जांच के बाद डॉक्टर की सलाह पर जरूरत के अनुसार इन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाता है। इसके लिए आशा और आंगनबाड़ी को जिम्मेदारी दी गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले कुपोषित बच्चों को भी इसमें भर्ती किया जाता है। जिससे कुपोषित बच्चों को सुपोषित किया जा सके, लेकिन इस पर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं होने से यहां कुपोषित बच्चे भर्ती नहीं हो पा रहे हैं।
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केंद्र में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या
हर माह पोषण पुनर्वास केंद्र में अप्रैल में पांच, मई में तीन, जून में सात, जुलाई में 12, अगस्त में पांच, सितंबर में 20, अक्तूबर में 19, नवंबर में सात दिसंबर में छह और जनवरी में आठ बच्चों को ही भर्ती किया गया है। वहीं, फरवरी माह में चार बच्चे भर्ती हैं। पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती बच्चों की संख्या बयां कर रही है कि जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण सुपोषित बनाने की मुहिम तेज नहीं हो पा रही है।
कुपोषण को दूर करने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। संबंधित विभाग के जिम्मेदारों को जरूरी दिशा-निर्देश दिया जा चुका है। बच्चों को सुपोषित करने की मुहिम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- गौरव सिंह सोगरवाल, सीडीओ
जिला अस्पताल की ओपीडी में जांच के दौरान यदि कोई बच्चा कुपोषित मिलता है तो उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाता है। इसके लिए चिकित्सकों को जरूरी दिशा-निर्देश दिया जा चुका है। बच्चों को सुपोषित बनाने की मुहिम को तेज करने की हर संभव कोशिश जा रही है।
- डॉ. एके राय, सीएमएस