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Maharajganj News: नहर की पटरी टूटी, 50 एकड़ खेत जलमग्न
Sat, 07 Jun 2025 08:39 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 07 Jun 2025 08:39 PM IST
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पनियरा। क्षेत्र के ग्राम पंचायत बैंदा के पास महराजगंज राजवाहा नहर की पटरी शनिवार की सुबह करीब 10 बजे लगभग आठ मीटर टूट जाने से नहर के किनारे के 50 एकड़ से ज्यादा खेत डूब गए। वहीं किसानों की धान की बेहन और सब्जी की फसल बर्बाद हो गई।
सूचना पर पहुंचे विभाग के लोग पटरी की मरम्मत करने में जुट गए हैं। बताया गया है कि नहर की पटरी रविन्द्र तिवारी के बगीचे के पास अचानक टूट गई, जिससे लगभग 50 एकड़ फसल डूब गई। इससे किसानों की डाली गई धान की बेहन बरबाद हो गई। जिन किसानों की बेहन डूबी है, उनमें बहरैची, दयानंद मौर्य, उमाशंकर मौर्य, दिनेश त्रिपाठी, कपिल गुप्ता, उमाशंकर मौर्य, बालगोविंद आदि का कहना है कि बेहन के ऊपर सिल्ट चढ़ जाने से उसे उखाड़ने में दिक्कत होगी। बेहन की जड़ें टूट जाएंगी। बेहन रोपाई के लायक नहीं रह जाएगी।
किसानों ने बातचीत में बताया कि धान की बेहन तैयार होने में 20 से 22 दिन का समय लगता है। नहर की पटरी टूटने से डूबी ज्यादातर किसानों की बेहन चार से पांच दिन के अंदर रोपाई करने लायक हो जातीं, मगर इस घटना ने सारी मेहनत और लागत पर पानी फेर दिया। किसान इस बात को लेकर भी दुखी हैं कि दोबारा बेहन डालने पर उनकी रोपाई पिछड़ जाएगी, जिसका असर फसल के उत्पादन पर भी पड़ेगा। आर्थिक नुकसान होगा, सो अलग।
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वहीं सब्जी उत्पादक मुनीब गौड़ और हरि ने अपने खेत में नेनुआ, लौकी, करेला और भिंडी की फसल बोई थी, नहर के पानी में डूब जाने से सड़कर बरबाद होने का खतरा पैदा हो गया है। इनका कहना है कि सब्जी की खेती ही उनके परिवार का आर्थिक आधार है, जो अब चरमरा गया है। किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग द्वारा नहर की पटरी की ठीक से मरम्मत नहीं कराने का खामियाजा निरीह किसानों को भोगना पड़ा है।
सिंचाई खंड प्रथम के अवर अभियंता अखिलेश्वर पटेल ने बताया कि सूचना पर मौके पर पहुंच कर बांस व बोरी से टूटी नहर की पटरी के मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है। जल्द ही उसे बांध दिया जाएगा।
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सूचना पर पहुंचे विभाग के लोग पटरी की मरम्मत करने में जुट गए हैं। बताया गया है कि नहर की पटरी रविन्द्र तिवारी के बगीचे के पास अचानक टूट गई, जिससे लगभग 50 एकड़ फसल डूब गई। इससे किसानों की डाली गई धान की बेहन बरबाद हो गई। जिन किसानों की बेहन डूबी है, उनमें बहरैची, दयानंद मौर्य, उमाशंकर मौर्य, दिनेश त्रिपाठी, कपिल गुप्ता, उमाशंकर मौर्य, बालगोविंद आदि का कहना है कि बेहन के ऊपर सिल्ट चढ़ जाने से उसे उखाड़ने में दिक्कत होगी। बेहन की जड़ें टूट जाएंगी। बेहन रोपाई के लायक नहीं रह जाएगी।
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किसानों ने बातचीत में बताया कि धान की बेहन तैयार होने में 20 से 22 दिन का समय लगता है। नहर की पटरी टूटने से डूबी ज्यादातर किसानों की बेहन चार से पांच दिन के अंदर रोपाई करने लायक हो जातीं, मगर इस घटना ने सारी मेहनत और लागत पर पानी फेर दिया। किसान इस बात को लेकर भी दुखी हैं कि दोबारा बेहन डालने पर उनकी रोपाई पिछड़ जाएगी, जिसका असर फसल के उत्पादन पर भी पड़ेगा। आर्थिक नुकसान होगा, सो अलग।
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वहीं सब्जी उत्पादक मुनीब गौड़ और हरि ने अपने खेत में नेनुआ, लौकी, करेला और भिंडी की फसल बोई थी, नहर के पानी में डूब जाने से सड़कर बरबाद होने का खतरा पैदा हो गया है। इनका कहना है कि सब्जी की खेती ही उनके परिवार का आर्थिक आधार है, जो अब चरमरा गया है। किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग द्वारा नहर की पटरी की ठीक से मरम्मत नहीं कराने का खामियाजा निरीह किसानों को भोगना पड़ा है।
सिंचाई खंड प्रथम के अवर अभियंता अखिलेश्वर पटेल ने बताया कि सूचना पर मौके पर पहुंच कर बांस व बोरी से टूटी नहर की पटरी के मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है। जल्द ही उसे बांध दिया जाएगा।