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Maharajganj News: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मिलेगी ब्रोंकोस्कोपी की सुविधा
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महराजगंज। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी ब्रोंकोस्कोपी जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है। जांच के लिए विभाग की ओर से जल्द ही फाइबर आप्टिकल ब्रोंकोस्कोप उपलब्ध करा दिया जाएगा। ब्रोंकोस्कोपी एक अत्याधुनिक जांच प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से फेफड़ों की बीमारियों का सही तरीके से पता लगाया जा सकता है। इस जांच के जरिए बलगम निकालना, टीबी का निदान करना, फेफड़ों में कैंसर या अन्य गंभीर संक्रमण की पुष्टि करना बेहद आसान हो जाएगी।
जानकारी के अनुसार, जिले के सभी ब्लॉक स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना 300 से 400 मरीज ओपीडी में आते हैं, जिसमें से 70 से 80 मरीज सांस संबंधी समस्याओं से ग्रसित होते हैं। इसमें से प्रतिदिन दो से चार मरीजों को ब्रोंकोस्कोपी जांच की आवश्यकता पड़ती है।
जांच सुविधा उपलब्ध न होने से इन मरीजों को गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी जाना पड़ता है। प्राइवेट में जांच के लिए मरीजों को छह से आठ हजार रुपये चुकाने पड़ते हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रोंकोस्कोप के माध्यम से सूखी खांसी में फेफड़े में फंसे बलगम को निकालना आसान हो जाता है।
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इसके अलावा गंभीर मरीजों को सांस देने के लिए गले में नली डालने में भी यह उपकरण सहायक होता है। ब्रोंकोस्कोपी सुविधा से टीबी के मरीजों की पहचान और आईएलडी (इंटरस्टिशियल लंग डिजीज) जैसी गंभीर बीमारी के निदान में भी आसानी होगी। सुविधा शुरू होने से न केवल मरीजों के पैसे बचेंगे बल्कि समय की भी बड़ी बचत होगी।
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जानकारी के अनुसार, जिले के सभी ब्लॉक स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना 300 से 400 मरीज ओपीडी में आते हैं, जिसमें से 70 से 80 मरीज सांस संबंधी समस्याओं से ग्रसित होते हैं। इसमें से प्रतिदिन दो से चार मरीजों को ब्रोंकोस्कोपी जांच की आवश्यकता पड़ती है।
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जांच सुविधा उपलब्ध न होने से इन मरीजों को गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी जाना पड़ता है। प्राइवेट में जांच के लिए मरीजों को छह से आठ हजार रुपये चुकाने पड़ते हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रोंकोस्कोप के माध्यम से सूखी खांसी में फेफड़े में फंसे बलगम को निकालना आसान हो जाता है।
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इसके अलावा गंभीर मरीजों को सांस देने के लिए गले में नली डालने में भी यह उपकरण सहायक होता है। ब्रोंकोस्कोपी सुविधा से टीबी के मरीजों की पहचान और आईएलडी (इंटरस्टिशियल लंग डिजीज) जैसी गंभीर बीमारी के निदान में भी आसानी होगी। सुविधा शुरू होने से न केवल मरीजों के पैसे बचेंगे बल्कि समय की भी बड़ी बचत होगी।