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झाड़-फूंक में बीता वक्त: सांप ने डसा...रात में नहीं मिला इलाज, गंवाए साढ़े 3 घंटे; 12 साल के किशन की मौत

Sun, 13 Sep 2026 02:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sun, 13 Sep 2026 02:40 AM IST
सार

किशन छह भाई-बहनों में पांचवें नंबर पर था। उसकी बड़ी बहन संजू (18), भाई जसवंत (16), सपना (15), काजल (14) और छोटा भाई राहुल (10) है। पिता कपिल बिहार के मंझरिया में रहते हैं। परिजन के अनुसार परिवार की जिम्मेदारी मुख्य रूप से मां सोहरी देवी ही संभालती हैं। वह बच्चों के साथ अपने मायके सोहगीबरवा में रहकर गुजर-बसर करती हैं।

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Boy bitten by a snake; died after precious time was lost on faith healing rituals.
मृतक किशन की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सोहगीबरवा के नौका टोला गांव में शुक्रवार रात नल पर हाथ धोने गए 12 वर्षीय बालक को सांप ने डस लिया। परिजन ने झांड़फूंक में महत्वपूर्ण समय गंवा दिया हालत बिगड़ने के बाद उसे बिहार के बगहा अस्पताल ले गए, जहां से उसे बेतिया जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

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बेतिया में डॉक्टरों ने बालक को मृत घोषित कर दिया। घटना ने टापू क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नौका टोला निवासिनी संजू ने बताया कि उनका छोटा भाई किशन शुक्रवार शाम करीब छह बजे खाना खाने के बाद घर के पास लगे नल पर पानी पीने और हाथ धोने गया था।
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अंधेरा होने के कारण नल पर पहले से बैठे सांप का उसे पता नहीं चला। जैसे ही किशन का हाथ सांप के ऊपर पड़ा, उसने बाएं हाथ की अंगुली में डस लिया। बालक के रोने की आवाज सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे। उसकी बहन संजू ने मोबाइल की रोशनी से नल की तरफ देखा तो वहां कोबरा सांप बैठा दिखाई दिया।
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झाड़फूंक में गंवा दिए साढ़े तीन घंटे
परिजन बालक को अस्पताल ले जाने की बजाय गांव के पास ही झाड़-फूंक कराने लगे। परिजन का कहना है कि दुर्गम क्षेत्र में रात के समय स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं होने और जागरूकता के अभाव में उन्हें यही रास्ता समझ आया। झाड़-फूंक के बाद उसे ठीक होने की बात कहकर घर भेज दिया गया। घर पहुंचने के बाद किशन की हालत बिगड़ने लगी।

इसके बाद परिजन रात करीब साढ़े नौ बजे निजी वाहन से किशोर को बिहार के बगहा अस्पताल ले गए। रात करीब दस बजे पहुंचे तो तब तक बच्चे की हालत गंभीर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उसे बेतिया जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन उसे लेकर शुक्रवार की देर रात करीब 11:30 बजे बेतिया जिला अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने किशन को मृत घोषित कर दिया। बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां सोहरी देवी बदहवास हो गई। घर में चीख-पुकार मच गई।

छह भाई-बहनों में पांचवें नंबर पर का था किशन
किशन छह भाई-बहनों में पांचवें नंबर पर था। उसकी बड़ी बहन संजू (18), भाई जसवंत (16), सपना (15), काजल (14) और छोटा भाई राहुल (10) है। पिता कपिल बिहार के मंझरिया में रहते हैं। परिजन के अनुसार परिवार की जिम्मेदारी मुख्य रूप से मां सोहरी देवी ही संभालती हैं। वह बच्चों के साथ अपने मायके सोहगीबरवा में रहकर गुजर-बसर करती हैं।

समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान
सीएचसी निचलौल के चिकित्सक डॉ. सौरभ साहनी ने बताया कि जहरीले सांप के काटने पर मरीज को झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। अस्पताल में लक्षणों के अनुसार एंटी स्नेक वेनम दिया जाता है और गंभीर स्थिति में मरीज को आवश्यकतानुसार वेंटिलेटर सहित अन्य उपचार उपलब्ध कराया जाता है। सर्पदंश के बाद उपचार में देरी जानलेवा हो सकती है। यदि सर्पदंश के तुरंत बाद किशोर को चिकित्सकीय उपचार मिल जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।

20 हजार आबादी के लिए रात में स्वास्थ्य सुविधा नहीं
सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा समेत टापू क्षेत्र में करीब 20 हजार की आबादी निवास करती है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और बाढ़ के समय मुख्य क्षेत्र से संपर्क प्रभावित होने के कारण यहां स्वास्थ्य सेवाएं पहले से चुनौतीपूर्ण हैं। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में बहुमंजिला भवन में अस्पताल संचालित होने की बात कही जाती है लेकिन रात में आकस्मिक स्वास्थ्य सुविधा का कोई प्रभावी विकल्प नहीं है।

अस्पताल निर्धारित समय पर खुलता और बंद हो जाता है। ऐसे में सर्पदंश, प्रसव, गंभीर चोट अथवा अन्य आपात स्थिति में ग्रामीणों को दूसरे क्षेत्र या बिहार के अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। किशन की मौत ने इस व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने ला दी है।


मामले की जानकारी होने पर परिजन से संपर्क किया गया है। इस दुख की घड़ी में तहसील प्रशासन परिवार के साथ है। हलका लेखपाल को मौके पर भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर सरकार द्वारा संचालित अहेतुक धनराशि दिलवाने की कार्रवाई की जाएगी: अमित कुमार सिंह, तहसीलदार

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