{"_id":"62239b19790e7a57c10a1319","slug":"body-shivering-in-ukraine-from-bombings-and-the-rumble-of-planes-maharajganj-news-gkp429015157","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूक्रेन में बम धमाकों और विमानों की गड़गड़ाहट से सिहर उठता है शरीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूक्रेन में बम धमाकों और विमानों की गड़गड़ाहट से सिहर उठता है शरीर
विज्ञापन
महराजगंज। यूक्रेन में फंसे राहुल नंदन को एयरपोर्ट लेने गईं उनकी बहनें भाई को देखते ही भावुक हो गई
- फोटो : MAHARAJGANJ
यूक्रेन में बम धमाकों और विमानों की गड़गड़ाहट से सिहर उठता है शरीर
महराजगंज। यूक्रेन में फंसे जिले के तीन मेडिकल के विद्यार्थी शनिवार को स्वदेश आ गए। सिसवा कस्बे की हुस्नआरा सुबह दिल्ली से बस से अपने घर पहुंच गईं। परिजनों को सामने देखते ही उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। हुस्नआरा ने बताया कि यूक्रेन में हालात बहुत खराब हैं। चारों तरफ बमों के धमाकों के कारण धुएं के गुबार दिखाई देते हैं। विमानों की गड़गड़ाहट दहशत से भर देती है। फौजी बूटों की आवाज शरीर में सिहरन पैदा करती है। वहीं, परसा खुर्द निवासी नौशाद भी घर पहुंच गए हैं, जबकि सिसवा निवासी राहुल दिल्ली आ गए हैं।
हुस्नआरा यूक्रेन के इवानो मेडिकल यूनिवर्सिटी की एमबीबीएस चौथे वर्ष की छात्रा हैं। उन्होंने बताया कि यूक्रेन के लमहों को याद कर शरीर सिहर जाता है। युद्ध छिड़ने के बाद से वतन पहुंचने तक, हर पल डर और दहशत से भरे थे। हॉस्टल में रहने के दौरान चारों तरफ बम गिरते देखे। उसके बाद धुएं के गुबार से आसमान काला हो जाता था। विमानों की गड़गड़ाहट से डर लगता था। लगता था कि यह कभी भी हमारे ऊपर बम गिरा सकते हैं।
हुस्नआरा और उनके पिता निजामुद्दीन अंसारी सहित सभी परिजनों ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया। हुस्नआरा ने भारत सरकार से अन्य छात्रों को घर वापस लाने की मांग की। कहा कि सोशल मीडिया पर चल रहे छात्रों के खिलाफ गलत संदेशों को रोका जाना चाहिए। यह वक्त आरोप प्रत्यारोप का नहीं, सहयोग और सहानुभूति का है।
विज्ञापन
प्रदर्शन के बावजूद यूनिवर्सिटी ने युद्ध शुरू होने से पहले नहीं आने दिया
हुस्नआरा ने बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी की थी कि छात्र घर लौट जाएं, लेकिन यूनिवर्सिटी ने छात्रों को आश्वासन देकर रोके रखा कि युद्ध नहीं होगा। हालात खराब होते देख ऑनलाइन क्लास चलाने के लिए इवानो में शिक्षारत 1200 छात्रों ने प्रदर्शन भी किया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। मैंने एक मार्च को वतन वापसी के लिए टिकट बुक कर लिया था, तभी युद्ध शुरू हो गया और उड़ानें निरस्त कर दी गईं। यूनिवर्सिटी ने बस से यूक्रेन भेजा, जो हमें सीमा से आठ किलोमीटर पहले छोड़ दिया। बाकी दूरी पैदल चल कर पूरी की। इसके बाद रोमानिया में प्रवेश किया। वहां की सरकार ने काफी सहयोग किया। किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी।
राहुल को एयरपोर्ट पर देख बहनें हो गईं भावुक, गले लगाकर रोईं
सिसवा बाजार। राहुल प्रियनंदन शनिवार भोर में चार बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे। उन्हें लेने गई उनकी बहन आकांक्षा व सुचित्रा ने भाई को देखते ही गले से लगा लिया और रोने लगीं। सिसवा निवासी राहुल यूक्रेन के खारकीव में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र हैं। उनके पिता डॉ. केसरी नंदन ने बताया कि बेटी आकांक्षा यूक्रेन से पहले आ गई थी। बेटा राहुल शनिवार को दिल्ली लौट आया है। उन्होंने बताया कि रूस ने सबसे ज्यादा आक्रमण खारकीव में ही किया था। वहां का समाचार सुनकर भय सताने लगा था, परंतु अब बेटा वतन वापस आ गया है। वह अपने बहनों के साथ दिल्ली में है। सब एक साथ एक दो दिन में घर वापस आएंगे। डॉ केसरी ने भारत सरकार को छात्रों के सकुशल स्वदेश वापसी के लिए धन्यवाद दिया।
यूक्रेन से आया छात्र, परिवार में खुशी
परतावल। परसा खुर्द निवासी नौशाद यूक्रेन में एमबीबीएस के छात्र हैं। शनिवार को नौशाद घर पहुंचे तो परिवार सहित आसपास के लोग खुशी से गदगद हो गए। परतावल ब्लाक के खंड विकास अधिकारी लक्ष्मण चतुर्वेदी भी नौशाद के घर पहुंचे और बधाई दी। नौशाद के घर पहुंचने पर परिजनों ने जोरदार स्वागत किया। नौशाद ने बताया कि यूक्रेन में हालात बहुत गंभीर हैं। लगातार बमबारी हो रही है। ऐसे में सीमा तक पहुंचना काफी कठिन है। कुछ छात्र वतन वापस आ चुके हैं। कुछ सीमा पर ही हैं, जो भारतीय उड़ानों का इंतजार कर रहे हैं। युद्ध की परिस्थिति में यूक्रेन में छात्रों को स्थानीय सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही है। नौशाद ने बताया कि हंगरी बॉर्डर से दिल्ली तक फ्लाइट से आया। दिल्ली से गाड़ी से आया हूं। भारत सरकार ने हमारी बहुत मदद की। मेरा कोई खर्च नहीं हुआ। नौशाद और उनके परिजनों ने भारत सरकार को धन्यवाद दिया।
विज्ञापन
महराजगंज। यूक्रेन में फंसे जिले के तीन मेडिकल के विद्यार्थी शनिवार को स्वदेश आ गए। सिसवा कस्बे की हुस्नआरा सुबह दिल्ली से बस से अपने घर पहुंच गईं। परिजनों को सामने देखते ही उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। हुस्नआरा ने बताया कि यूक्रेन में हालात बहुत खराब हैं। चारों तरफ बमों के धमाकों के कारण धुएं के गुबार दिखाई देते हैं। विमानों की गड़गड़ाहट दहशत से भर देती है। फौजी बूटों की आवाज शरीर में सिहरन पैदा करती है। वहीं, परसा खुर्द निवासी नौशाद भी घर पहुंच गए हैं, जबकि सिसवा निवासी राहुल दिल्ली आ गए हैं।
हुस्नआरा यूक्रेन के इवानो मेडिकल यूनिवर्सिटी की एमबीबीएस चौथे वर्ष की छात्रा हैं। उन्होंने बताया कि यूक्रेन के लमहों को याद कर शरीर सिहर जाता है। युद्ध छिड़ने के बाद से वतन पहुंचने तक, हर पल डर और दहशत से भरे थे। हॉस्टल में रहने के दौरान चारों तरफ बम गिरते देखे। उसके बाद धुएं के गुबार से आसमान काला हो जाता था। विमानों की गड़गड़ाहट से डर लगता था। लगता था कि यह कभी भी हमारे ऊपर बम गिरा सकते हैं।
विज्ञापन
हुस्नआरा और उनके पिता निजामुद्दीन अंसारी सहित सभी परिजनों ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया। हुस्नआरा ने भारत सरकार से अन्य छात्रों को घर वापस लाने की मांग की। कहा कि सोशल मीडिया पर चल रहे छात्रों के खिलाफ गलत संदेशों को रोका जाना चाहिए। यह वक्त आरोप प्रत्यारोप का नहीं, सहयोग और सहानुभूति का है।
विज्ञापन
प्रदर्शन के बावजूद यूनिवर्सिटी ने युद्ध शुरू होने से पहले नहीं आने दिया
हुस्नआरा ने बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी की थी कि छात्र घर लौट जाएं, लेकिन यूनिवर्सिटी ने छात्रों को आश्वासन देकर रोके रखा कि युद्ध नहीं होगा। हालात खराब होते देख ऑनलाइन क्लास चलाने के लिए इवानो में शिक्षारत 1200 छात्रों ने प्रदर्शन भी किया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। मैंने एक मार्च को वतन वापसी के लिए टिकट बुक कर लिया था, तभी युद्ध शुरू हो गया और उड़ानें निरस्त कर दी गईं। यूनिवर्सिटी ने बस से यूक्रेन भेजा, जो हमें सीमा से आठ किलोमीटर पहले छोड़ दिया। बाकी दूरी पैदल चल कर पूरी की। इसके बाद रोमानिया में प्रवेश किया। वहां की सरकार ने काफी सहयोग किया। किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी।
राहुल को एयरपोर्ट पर देख बहनें हो गईं भावुक, गले लगाकर रोईं
सिसवा बाजार। राहुल प्रियनंदन शनिवार भोर में चार बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे। उन्हें लेने गई उनकी बहन आकांक्षा व सुचित्रा ने भाई को देखते ही गले से लगा लिया और रोने लगीं। सिसवा निवासी राहुल यूक्रेन के खारकीव में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र हैं। उनके पिता डॉ. केसरी नंदन ने बताया कि बेटी आकांक्षा यूक्रेन से पहले आ गई थी। बेटा राहुल शनिवार को दिल्ली लौट आया है। उन्होंने बताया कि रूस ने सबसे ज्यादा आक्रमण खारकीव में ही किया था। वहां का समाचार सुनकर भय सताने लगा था, परंतु अब बेटा वतन वापस आ गया है। वह अपने बहनों के साथ दिल्ली में है। सब एक साथ एक दो दिन में घर वापस आएंगे। डॉ केसरी ने भारत सरकार को छात्रों के सकुशल स्वदेश वापसी के लिए धन्यवाद दिया।
यूक्रेन से आया छात्र, परिवार में खुशी
परतावल। परसा खुर्द निवासी नौशाद यूक्रेन में एमबीबीएस के छात्र हैं। शनिवार को नौशाद घर पहुंचे तो परिवार सहित आसपास के लोग खुशी से गदगद हो गए। परतावल ब्लाक के खंड विकास अधिकारी लक्ष्मण चतुर्वेदी भी नौशाद के घर पहुंचे और बधाई दी। नौशाद के घर पहुंचने पर परिजनों ने जोरदार स्वागत किया। नौशाद ने बताया कि यूक्रेन में हालात बहुत गंभीर हैं। लगातार बमबारी हो रही है। ऐसे में सीमा तक पहुंचना काफी कठिन है। कुछ छात्र वतन वापस आ चुके हैं। कुछ सीमा पर ही हैं, जो भारतीय उड़ानों का इंतजार कर रहे हैं। युद्ध की परिस्थिति में यूक्रेन में छात्रों को स्थानीय सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही है। नौशाद ने बताया कि हंगरी बॉर्डर से दिल्ली तक फ्लाइट से आया। दिल्ली से गाड़ी से आया हूं। भारत सरकार ने हमारी बहुत मदद की। मेरा कोई खर्च नहीं हुआ। नौशाद और उनके परिजनों ने भारत सरकार को धन्यवाद दिया।