फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Blood brokerage...private hospitals are rich, government hospitals are poor

Maharajganj News: खून की दलाली...निजी अस्पताल मालामाल, सरकारी में कंगाली

Fri, 30 May 2025 12:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Fri, 30 May 2025 12:38 AM IST
विज्ञापन
Blood brokerage...private hospitals are rich, government hospitals are poor
महराजगंज। जिला अस्पताल में अब तक मरीजों को ही प्राइवेट अस्पताल पहुंचाने का खेल चल रहा था। मगर अब सरकारी महकमे में इकट्ठा किए गए रक्त को बिना डोनर के ही निजी अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा है।
विज्ञापन

अस्पतालकर्मियों की मिलीभगत से दलाल डोनर के एवज में मोटी रकम ऐंठकर बिना डोनर के ही रक्त ले रहे हैं। वहीं सरकारी अस्पताल के मरीजों को रक्त लेने के लिए डोनर का इंतजाम करना पड़ रहा है। वर्तमान में ब्लड बैंक में महज 10 यूनिट ही रक्त बचा है। यहां ब्लड सेपरेशन यूनिट भी संचालित हो रही है। वहीं डायलिसिस यूनिट भी है।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार, एक साल में 37 कैंप लगाए गए। इसमें 557 यूनिट रक्त एकत्र हुआ। हैरानी की बात है कि 517 यूनिट रक्त सरकारी शुल्क 1100 रुपये जमा कराने के बाद बगैर डोनर के ही दे दिया गया। सूत्रों की मानें में 517 यूनिट में 60 प्रतिशत से अधिक निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मजह 40 प्रतिशत सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों को लाभ मिला। नियम के मुताबिक प्राथमिकता सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए होनी चाहिए। सूत्रों की मानें से दलाल निजी अस्पताल से साठगांठ बनाए रखते हैं। मरीजों को जरूरत होने पर तीमारदार से मोलभाव शुरू हो जाता है। आठ से 10 हजार के बीच में तीमारदार के बजट के हिसाब से रकम तय होती है।
सब कुछ तय होने के बाद दलाल किसी ऐसे आदमी को पकड़ता है, जिसका संबंध जिला अस्पताल में डॉक्टरों से होता है। असल खेल यहीं से शुरू होता है। जिला अस्पताल प्रशासन को इसकी भनक न लगे, इसे देखते हुए दलाल हमेशा नए चेहरे की तलाश करते हैं। इसमें नेता समेत प्रभावशाली व्यक्ति शामिल होते हैं।
उनके फोन जाने पर अस्पताल में बगैर डोनर के रक्त देने की व्यवस्था हो जाती है। दलालों को इसके एवज में मोटी रकम आसानी से मिल जाती है। इस खेल को अधिकारी समझ नहीं पाते हैं। निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए बगैर डोनर के रक्त की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पशुपतिनाथ गुप्त कहते हैं कि इसमें अधिकारियों को स्वयं विवेक से काम लेने की जरूरत है। जांच परख के बाद रक्त दिया जाए तो दलालों की व्यवस्था फेल हो जाएगी।

बी व एबी निगेटिव रक्त नहीं : ब्लड बैंक में बी व एबी निगेटिव रक्त नहीं है। इसमें ए पाॅजिटिव एक यूनिट, ए निगेटिव एक, बी पाॅजिटिव चार यूनिट, एबी पाॅजिटिव एक यूनिट, ओ पाॅजिटिव दो यूनिट रक्त बचा है। रक्त बढ़ाने के लिए बाहर कैंप के अलावा अस्पताल में भी शिविर लगाया जाता है। आने वाले एक, 14 व 21 जून को रक्तदान शिविर प्रस्तावित है। वहीं रक्त की कमी को दूर करने के लिए डोनर ग्रुप के जरिए लोगों को प्रेरित भी किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed