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बायोवेस्ट कक्ष बेमतलब, इधर-उधर बिखरा है कूड़ा
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सिसवां सीएचसी के करीब बिखरा मेडिकल बायोवेस्ट।
- फोटो : MAHARAJGANJ
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बायोवेस्ट कक्ष बेमतलब, इधर-उधर बिखरा है कूड़ा
महराजगंज। मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष अब तक जिले के सीएचसी को हैंडओवर नहीं हो पाए हैं। ऐसे में सीएचसी से निकलने वाले कूड़ा-कचरा इधर-उधर बिखरे रहते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले के 14 सीएचसी पर मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष बनकर तैयार हो गए हैं, लेकिन विभाग को हैंडओवर नहीं किए गए हैं। इससे मेडिकल कूड़ा निस्तारण में समस्या हो रही है। वर्ष 2019-20 में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग और कंस्ट्रक्शन एवं डिजाइन सर्विसेज को कार्यदायी संस्था नामित करते हुए निर्माण कार्य के लिए पहली किस्त भेजी गई। इसमें ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को नौ सीएचसी पर मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। जबकि कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज को पांच सीएचसी पर मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष के निर्माण की जिम्मेदारी मिली। एक कक्ष के बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से तीन लाख रुपये खर्च हुए हैं। कार्यदायी संस्था को दो किस्तों में निर्धारित रकम दी गई है, लेकिन निर्माण में कमियों को दूर नहीं किया जा सका है। स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता के अनुसार मानक के तहत मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष का निर्माण नहीं होने के कारण हैंडओवर नहीं लिया गया है।
मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था नहीं
अस्पतालों में रोजाना निकलने वाले मेडिकल वेस्ट का उचित निस्तारण नहीं होने से मरीजों में संक्रमण का खतरा बना रहता है। इमरजेंसी वार्ड, दवा काउंटर, टीकाकरण केंद्र के पास मेडिकल वेस्ट फेंकने के लिए डस्टबिन रखे गए हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल करने से लोग कतराते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता ने मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष निर्माण की जांच की है। कमियों के बारे में कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों को अवगत कराया गया है। कमियां दूर होने के बाद विभाग मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष को हैंडओवर ले लेगा। कूडा निस्तारण का समुचित प्रबंध अस्पतालों में है।
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डॉ. एके श्रीवास्तव, सीएमओ
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महराजगंज। मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष अब तक जिले के सीएचसी को हैंडओवर नहीं हो पाए हैं। ऐसे में सीएचसी से निकलने वाले कूड़ा-कचरा इधर-उधर बिखरे रहते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले के 14 सीएचसी पर मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष बनकर तैयार हो गए हैं, लेकिन विभाग को हैंडओवर नहीं किए गए हैं। इससे मेडिकल कूड़ा निस्तारण में समस्या हो रही है। वर्ष 2019-20 में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग और कंस्ट्रक्शन एवं डिजाइन सर्विसेज को कार्यदायी संस्था नामित करते हुए निर्माण कार्य के लिए पहली किस्त भेजी गई। इसमें ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को नौ सीएचसी पर मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। जबकि कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज को पांच सीएचसी पर मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष के निर्माण की जिम्मेदारी मिली। एक कक्ष के बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से तीन लाख रुपये खर्च हुए हैं। कार्यदायी संस्था को दो किस्तों में निर्धारित रकम दी गई है, लेकिन निर्माण में कमियों को दूर नहीं किया जा सका है। स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता के अनुसार मानक के तहत मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष का निर्माण नहीं होने के कारण हैंडओवर नहीं लिया गया है।
मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था नहीं
अस्पतालों में रोजाना निकलने वाले मेडिकल वेस्ट का उचित निस्तारण नहीं होने से मरीजों में संक्रमण का खतरा बना रहता है। इमरजेंसी वार्ड, दवा काउंटर, टीकाकरण केंद्र के पास मेडिकल वेस्ट फेंकने के लिए डस्टबिन रखे गए हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल करने से लोग कतराते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता ने मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष निर्माण की जांच की है। कमियों के बारे में कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों को अवगत कराया गया है। कमियां दूर होने के बाद विभाग मेडिकल बायोवेस्ट कक्ष को हैंडओवर ले लेगा। कूडा निस्तारण का समुचित प्रबंध अस्पतालों में है।
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डॉ. एके श्रीवास्तव, सीएमओ