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Maharajganj News: होश संभालते ही गो तस्करी की कमान, फर्श से अर्श तक पहुंचा अमरेश

Fri, 06 Feb 2026 01:46 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 06 Feb 2026 01:46 AM IST
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As soon as he came to his senses, he took over cow smuggling, and Amresh rose from rags to riches.
पडरौना। तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के छंहू गांव निवासी पूर्व प्रधान और सपा के वर्तमान जिला पंचायत सदस्य अमरेश यादव का नाम एक बार फिर गो तस्करी से जुड़े मामलों में सामने आया है। पुलिस अभिलेखों के अनुसार, अमरेश यादव पिछले करीब 14 वर्षों से पशु तस्करी के मामलों में संलिप्त रहा है और इस दौरान उसने पूर्वांचल से लेकर बिहार तक तस्करी का नेटवर्क खड़ा किया।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पिता चंद्रभान यादव पर कार्रवाई के बाद अमरेश यादव ने तस्करी के नेटवर्क की कमान संभाली और अलग-अलग जिलों में सक्रिय गिरोहों से संपर्क बढ़ाया। इस नेटवर्क में गोरखपुर के सतीश यादव और जवाहिर यादव समेत कई नाम सामने आए हैं। बताया जातहहै कि परिवार के कई सदस्य गो तस्करी से जुड़े मामलों में नामजद रहे हैं।
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पुलिस के अनुसार, वर्ष 2012 में अमरेश यादव के खिलाफ गोवध से जुड़ा पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद कुशीनगर, गोरखपुर समेत अन्य जिलों के विभिन्न थानों में गोवध निवारण अधिनियम, पशु क्रूरता अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज होते चले गए। वर्ष 2023 तक उसके खिलाफ मुकदमों की संख्या 32 तक पहुंच चुकी थी। कई मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अभी भी लंबित है। आरोप है कि बढ़ते पुलिस दबाव के बीच अमरेश यादव राजनीति में सक्रिय हुआ और जिला पंचायत सदस्य चुना गया। इसी दौरान वह तस्करी के नेटवर्क को प्रत्यक्ष रूप से संचालित करने के बजाय संरक्षण और लॉजिस्टिक सहायता देने लगा।
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पूर्वांचल में लंबे समय से सक्रियता..संपत्ति भी हुई थी कुर्क



फरवरी 2023 में अमरेश यादव के 80 लाख के ईंट-भट्ठे को गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त किया गया था। तब बसडिला के हरेंद्र यादव पर भी कार्रवाई हुई थी। इसके बाद जून में भी जिला पंचायत सदस्य की ढाई करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई थी। गैंगस्टर अमरेश यादव के छहूं स्थित आठ जगह की संपत्तियों को कुर्क किया गया था। यह संपत्ति जिला पंचायत सदस्य के पिता चंद्रभान यादव और माता सूर्यमुखी देवी के नाम से दर्ज थे। तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के छहूं गांव निवासी चंद्रभान तथा उनके परिवारवालों पर गोवध से जुड़े करीब 60 मुकदमे विभिन्न जिलों में दर्ज है। चंद्रभान पर बस्ती, देवरिया, संतकबीरनगर और गोरखपुर जनपद के विभिन्न थानों में करीब 12 तो उसके पुत्र अमरेश यादव पर कई जनपदों में हत्या के प्रयास तथा गोवध से जुड़े 32 मुकदमे दर्ज हैं। चंद्रभान के ही एक और पुत्र गुड्डू पर भी विभिन्न थानों में 12 से अधिक गोवध से जुड़े केस दर्ज हैं।






गिरफ्तारी की सूचना पर थाने पहुंच गए समर्थक

गोतस्करी से जुड़े प्रकरण में तुर्कपट्टी थानाध्यक्ष स्वतंत्र कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम ने रात के अंधेरे में अमरेश यादव के आवास पर दबिश दी और उसे हिरासत में लिया। इसके बाद आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी कर उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। मामले की जानकारी होते ही कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता और समर्थक थाने पहुंच गए। सपा नेता विजय यादव, राजन शुक्ला, संतोष तिवारी आदि के नेतृत्व में लोग वहां मौजूद रहे और स्थिति की जानकारी लेते रहे। इस दौरान पुलिस अपनी प्रक्रिया में लगी रही। इधर पुलिस आगे नेताओं को समझती समझाती रही और पीछे की ओर से अमरेश यादव को कोर्ट भेज दिया गया।


कार्रवाई के दौरान रही हलचल
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान थाने से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक लगातार फोन आते रहे। हालांकि पुलिस टीम ने किसी भी दबाव से इन्कार करते हुए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई पूरी की। अधिकारियों का कहना है कि चर्चित मामलों में प्रशासनिक हलचल स्वाभाविक होती है, लेकिन गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई साक्ष्यों और विधिक प्रावधानों के आधार पर ही की जाती है।
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