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Maharajganj News: अन्नपूर्णा के किरदार पर बेकदरी का ताला
Thu, 08 May 2025 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 08 May 2025 01:02 AM IST
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घुघली। आठ लाख रुपये खर्च कर स्थानीय विकास क्षेत्र की छह ग्राम सभाओं में पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में निर्मित अन्नपूर्णा भवन में तीन साल बीतने के बाद भी ताला लटक रहा है।
इस प्रोजेक्ट के तहत ग्रामीणों को राशन लेने में सहूलियत देने के लिए पकड़ियार बिशनपुर, चौमुखा, टेढवा, बसंतपुर, मंगलपुर पटखौली, परसौनी बुजुर्ग, ढेकही में अन्नपूर्णा भवन का निर्माण किया गया है।
विभाग का दावा है परसौनी बुजुर्ग, पकड़ियार विशुनपुर में बने अन्नपूर्णा भवन हैंडओवर नहीं हुए हैं, जबकि बाकी चार गांवों के भवन हैंडओवर कर दिए गए हैं। मगर, मौके पर सभी अन्नपूर्णा भवनों में पानी और बिजली की व्यवस्था नहीं होने से अभी भी ताला लटक रहा है।
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बसंतपुर की ग्राम प्रधान अनामिका सिंह ने बताया कि उनके गांव में बना अन्नपूर्णा भवन हैंडओवर तो हुआ है मगर पानी और बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाने से यहां राशन का संग्रहण और वितरण नहीं हो पा रहा है।
हालत यह है कि कोटेदार अभी भी राशन को अपने निजी गोदामों में रखे हुए हैं। मार्च 2022 में आठ लाख रुपये खर्च कर बनाए गए अन्नपूर्णा भवनों के बारे में पूछे जाने पर ग्रामीण भीम यादव, रमाकर कृष्ण त्रिपाठी ने कहा कि अगर विभाग की ओर से इन भवनों को हैंडओवर कर दिया जाता तो हर महीने राशन इसी भवन पर उतारा जाता और यहीं से ग्रामीणों में वितरित भी होता। इससे ग्रामीणों को समय से राशन मिलने के साथ ही उसकी हेराफेरी पर भी अंकुश लग जाता। े
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इस प्रोजेक्ट के तहत ग्रामीणों को राशन लेने में सहूलियत देने के लिए पकड़ियार बिशनपुर, चौमुखा, टेढवा, बसंतपुर, मंगलपुर पटखौली, परसौनी बुजुर्ग, ढेकही में अन्नपूर्णा भवन का निर्माण किया गया है।
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विभाग का दावा है परसौनी बुजुर्ग, पकड़ियार विशुनपुर में बने अन्नपूर्णा भवन हैंडओवर नहीं हुए हैं, जबकि बाकी चार गांवों के भवन हैंडओवर कर दिए गए हैं। मगर, मौके पर सभी अन्नपूर्णा भवनों में पानी और बिजली की व्यवस्था नहीं होने से अभी भी ताला लटक रहा है।
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बसंतपुर की ग्राम प्रधान अनामिका सिंह ने बताया कि उनके गांव में बना अन्नपूर्णा भवन हैंडओवर तो हुआ है मगर पानी और बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाने से यहां राशन का संग्रहण और वितरण नहीं हो पा रहा है।
हालत यह है कि कोटेदार अभी भी राशन को अपने निजी गोदामों में रखे हुए हैं। मार्च 2022 में आठ लाख रुपये खर्च कर बनाए गए अन्नपूर्णा भवनों के बारे में पूछे जाने पर ग्रामीण भीम यादव, रमाकर कृष्ण त्रिपाठी ने कहा कि अगर विभाग की ओर से इन भवनों को हैंडओवर कर दिया जाता तो हर महीने राशन इसी भवन पर उतारा जाता और यहीं से ग्रामीणों में वितरित भी होता। इससे ग्रामीणों को समय से राशन मिलने के साथ ही उसकी हेराफेरी पर भी अंकुश लग जाता। े