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चालक के अभाव में खड़ी रही बसें
Maharajganj
Updated Mon, 13 Jan 2014 05:43 AM IST
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महराजगंज। निचलौल डिपो में सब कुछ उल्टा हो रहा है। रविवार को 14 बसें चालकों के अभाव में खड़ी रहीं। इससे यात्रियों को प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ा। हालांकि, विभाग का कहना है कि मरम्मत के बाद सभी बसों को चलाया जाएगा।
निचलौल डिपो में कुल बसों की संख्या 39 हैं। जो विभिन्न रूटों पर चलती हैं। रविवार को 25 बसें ही डिपो से निकलीं। 14 बसें वर्कशाप में खड़ी रहीं। एक साथ 14 बसों के खड़ी होने से यात्रियों को प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ा। रविवार की छुट्टी होने से यात्रियों की संख्या कुछ कम थी। इसके बावजूद लोगों को अपने गंतव्य स्थल तक पहुंचने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। बसें खड़ी रहे या सड़कों पर चलें। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को इससे मतलब नहीं है। हालांकि, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बसें मरम्मत के लिए खड़ी हैं। मरम्मत के बाद उन्हें सड़कों पर निकाला जाएगा। ऐसे में अधिकारियों की यह बात गले नहीं उतरती। तीन बजे तक एक बस भी दुरुस्त नहीं हुई थी। दूसरी ओर वर्कशाप में कर्मचारियों की संख्या पहले से ही कम है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि शाम पांच बजे तक कितनी बसों की मरम्मत हो जाएगी और कितनी बसें सड़कों पर दौड़ेंगी। आएदिन बसें खड़ी रहती हैं। शनिवार को 11 बसें खड़ी थीं। एआरएम आरसी यादव का कहना है कि छह चालकों के अनुपस्थित रहने के कारण कुछ बसें खड़ी हैं। बाकी की बसों को मरम्मत के बाद सड़क पर चलने के लिए भेज दिया जाएगा।
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निचलौल डिपो में कुल बसों की संख्या 39 हैं। जो विभिन्न रूटों पर चलती हैं। रविवार को 25 बसें ही डिपो से निकलीं। 14 बसें वर्कशाप में खड़ी रहीं। एक साथ 14 बसों के खड़ी होने से यात्रियों को प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ा। रविवार की छुट्टी होने से यात्रियों की संख्या कुछ कम थी। इसके बावजूद लोगों को अपने गंतव्य स्थल तक पहुंचने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। बसें खड़ी रहे या सड़कों पर चलें। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को इससे मतलब नहीं है। हालांकि, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बसें मरम्मत के लिए खड़ी हैं। मरम्मत के बाद उन्हें सड़कों पर निकाला जाएगा। ऐसे में अधिकारियों की यह बात गले नहीं उतरती। तीन बजे तक एक बस भी दुरुस्त नहीं हुई थी। दूसरी ओर वर्कशाप में कर्मचारियों की संख्या पहले से ही कम है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि शाम पांच बजे तक कितनी बसों की मरम्मत हो जाएगी और कितनी बसें सड़कों पर दौड़ेंगी। आएदिन बसें खड़ी रहती हैं। शनिवार को 11 बसें खड़ी थीं। एआरएम आरसी यादव का कहना है कि छह चालकों के अनुपस्थित रहने के कारण कुछ बसें खड़ी हैं। बाकी की बसों को मरम्मत के बाद सड़क पर चलने के लिए भेज दिया जाएगा।
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