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गर्मी के मौसम में रहें हीट स्ट्रोक से सावधान
Updated Tue, 15 May 2018 11:47 PM IST
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महराजगंज। आंधी और तूफान के बीच ही तपिश बढ़ती जा रही है। तपिश ऐसी है की चमड़ी झुलस जाए। इस तपिश में बचने के लिए लोग घरों में कूलर और एसी का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन घर के बाहर तो गर्मी से बचाव और भी ज्यादा जरूरी है। ऐसे में शरीर के अंदर के कूलिंग सिस्टम के फेल होने पर आपको अस्पताल पहुंचना पड़ सकता है, क्योंकि अधिक गर्मी पड़ने पर रोम छिद्र बंद हो जाती है। पसीने के रूप में बदन से गर्मी बाहर नहीं निकल पाती है। यही हीट स्ट्रोक की वजह बनता है। इसलिए शरीर में पानी की कमी न होने दें।
सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी में भी देखने को मिल रहा है। जहां हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों के मुताबिक अधिक गर्मी पड़ने और ज्यादा समय धूप में रहने से शरीर से पसीना बाहर निकलने वाली रोम छिद्र बंद हो जाती है। इसके चलते शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती है। मरीजों को बेचैनी होने लगती है। ऐसे में इस मौसम में शरीर के कूलिंग सिस्टम को फेल होने से बचाने की जरूरत है। शरीर में पानी कमी न होने दें। लापरवाही पर हीट स्ट्रोक के मरीजों के जान को भी खतरा होता है।
तापमान संतुलन जरूरी
जिला अस्पताल के डॉक्टर एमएम भाष्कर ने बताया कि हीट स्ट्रोक के केस में बाड़ी का कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है। तापमान हाई होने पर शरीर की कोशिकाएं काम करना बंद कर देती है। तेज बुखार के साथ मरीजों को बेचैनी होने लगती है। मरीजों को 105 से 107 फरेनहाईड तक बुखार हो जाता है। ऐसे में शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के उपाय जरूरी है।
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बच्चों में डायरिया का खतरा
इस मौसम में बच्चों में डयरिया का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मौसम में पांच साल से कम और अस्सी साल के ऊपर के लोगों का खास ख्याल रखना चाहिए। लू लगने पर सिर में दर्द और तेज बुखार की शिकायत होती है। इसमें बुखार की दवा काम नहीं करती है। इसमें बुखार की दवा काम नहीं करती है। सबसे पहले बाडी का तापमान कम करना चाहिए।
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सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी में भी देखने को मिल रहा है। जहां हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों के मुताबिक अधिक गर्मी पड़ने और ज्यादा समय धूप में रहने से शरीर से पसीना बाहर निकलने वाली रोम छिद्र बंद हो जाती है। इसके चलते शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती है। मरीजों को बेचैनी होने लगती है। ऐसे में इस मौसम में शरीर के कूलिंग सिस्टम को फेल होने से बचाने की जरूरत है। शरीर में पानी कमी न होने दें। लापरवाही पर हीट स्ट्रोक के मरीजों के जान को भी खतरा होता है।
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तापमान संतुलन जरूरी
जिला अस्पताल के डॉक्टर एमएम भाष्कर ने बताया कि हीट स्ट्रोक के केस में बाड़ी का कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है। तापमान हाई होने पर शरीर की कोशिकाएं काम करना बंद कर देती है। तेज बुखार के साथ मरीजों को बेचैनी होने लगती है। मरीजों को 105 से 107 फरेनहाईड तक बुखार हो जाता है। ऐसे में शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के उपाय जरूरी है।
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बच्चों में डायरिया का खतरा
इस मौसम में बच्चों में डयरिया का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मौसम में पांच साल से कम और अस्सी साल के ऊपर के लोगों का खास ख्याल रखना चाहिए। लू लगने पर सिर में दर्द और तेज बुखार की शिकायत होती है। इसमें बुखार की दवा काम नहीं करती है। इसमें बुखार की दवा काम नहीं करती है। सबसे पहले बाडी का तापमान कम करना चाहिए।