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बौद्ध धर्म में हिंसा का स्थान नहीं: गणेश
Updated Tue, 17 Oct 2017 05:46 PM IST
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महराजगंज। देवदह में आयोजित बौद्ध महासम्मेलन के चौथे दिन मंगलवार को बतौर मुख्य अतिथि गणेश शंकर पांडेय ने कहा कि बुद्ध के त्रिशरण, पंचशील व अष्टांगिकमार्ग पर चलकर जीवन खुशहाल बना सकते हैं। महात्मा बुद्ध ने मोक्ष नहीं, बल्कि निर्वाण की बात कही है। निर्वाण का अर्थ है राग, द्वेष, लोभ, क्रोध से मुक्त जीवन।
उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म का उद्देश्य सभी प्राणियों का कल्याण और समाज में सम्मान है। बौद्ध धर्म में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। गौतम बुद्ध ने कहा था कि जीवन से दु:ख भगाने के लिए लोभ का लोप करना होगा। लोभ ही कष्ट का कारण है। कार्यक्रम का संचालन जितेंद्र राव ने किया। इस अवसर पर सारनाथ के भंते रत्नाकर, महानाम, नन्दरतन, धम्मपाल, महिपाल, शुभसागर, आनंद, ग्यानशील, राजाराम, महेंद्र जायसवाल, लक्ष्मी चंद्र पटेल, प्रह्लाद, रामबेलास, दीनानाथ, योगेंद्र, रामलगन, संतराम, अखिलेश एवं ईश्वर निगम आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म का उद्देश्य सभी प्राणियों का कल्याण और समाज में सम्मान है। बौद्ध धर्म में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। गौतम बुद्ध ने कहा था कि जीवन से दु:ख भगाने के लिए लोभ का लोप करना होगा। लोभ ही कष्ट का कारण है। कार्यक्रम का संचालन जितेंद्र राव ने किया। इस अवसर पर सारनाथ के भंते रत्नाकर, महानाम, नन्दरतन, धम्मपाल, महिपाल, शुभसागर, आनंद, ग्यानशील, राजाराम, महेंद्र जायसवाल, लक्ष्मी चंद्र पटेल, प्रह्लाद, रामबेलास, दीनानाथ, योगेंद्र, रामलगन, संतराम, अखिलेश एवं ईश्वर निगम आदि मौजूद रहे।
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