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कागजों में सिमटा खुले में शौचमुक्त के लिए जागरूकता
Updated Sun, 16 Dec 2018 12:22 AM IST
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कागजों तक सिमटा खुले में शौचमुक्त अभियान
कई गांवों में अब भी शौचालयों के निर्माण के काम अधूरे
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। गांवों को खुले में शौचमुक्त करने और गंदगी से होने वाली बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सफाई कर्मियों और स्वेच्छाग्रहियाें को जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन यह काम कागजों पर अधिक और धरातल पर कम हो रहा है। परिणामस्वरूप स्वच्छता अभियान के तहत गांवों में करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी हालात जस के तस हैं।
जिले के नौ ब्लॉकों तथा नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान के तहत शौचालयों के निर्माण, ओडीएफ के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए स्वेच्छाग्रहियों की तैनाती की गई है। गांवों के लोगों को जागरूक करने के लिए जिला स्तरीय अधिकारी को नोडल अफसर बनाया गया था। यह अधिकारी सुबह चार से छह बजे तक मार्निंग फॉलोअप कराकर ग्रामीणों को जागरूक करते रहे हैं। अब भी यदा कदा मार्निंग फॉलोअप के कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। पूरे जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है, लेकिन अब भी कई गांवों में शौचालयों के निर्माण अभी अधूरे हैं। कागजों पर सभी राजस्व गांव ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं लेकिन तमाम लोगों के घरों में शौचालय नहीं हैं। अभियान के तहत जिले में कुल 1246 सफाई कर्मचारी, 982 स्वेच्छाग्रही लगाए गए हैं। इन्हें गांवों में लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नोडल अधिकारी स्वच्छता मनोज त्यागी ने बताया कि सफाई कर्मियों व स्वेच्छाग्रहियों को ग्रामीणों को खुले में शौच करने से होने वाली दिक्कतों को बताकर उन्हें जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है। लोग शौचालयों के निर्माण और उनके उपयोग के प्रति जागरूक भी हो रहे हैं। लेकिन अभी और अधिक जागरूकता की जरूरत है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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कई गांवों में अब भी शौचालयों के निर्माण के काम अधूरे
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। गांवों को खुले में शौचमुक्त करने और गंदगी से होने वाली बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सफाई कर्मियों और स्वेच्छाग्रहियाें को जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन यह काम कागजों पर अधिक और धरातल पर कम हो रहा है। परिणामस्वरूप स्वच्छता अभियान के तहत गांवों में करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी हालात जस के तस हैं।
जिले के नौ ब्लॉकों तथा नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान के तहत शौचालयों के निर्माण, ओडीएफ के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए स्वेच्छाग्रहियों की तैनाती की गई है। गांवों के लोगों को जागरूक करने के लिए जिला स्तरीय अधिकारी को नोडल अफसर बनाया गया था। यह अधिकारी सुबह चार से छह बजे तक मार्निंग फॉलोअप कराकर ग्रामीणों को जागरूक करते रहे हैं। अब भी यदा कदा मार्निंग फॉलोअप के कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। पूरे जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है, लेकिन अब भी कई गांवों में शौचालयों के निर्माण अभी अधूरे हैं। कागजों पर सभी राजस्व गांव ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं लेकिन तमाम लोगों के घरों में शौचालय नहीं हैं। अभियान के तहत जिले में कुल 1246 सफाई कर्मचारी, 982 स्वेच्छाग्रही लगाए गए हैं। इन्हें गांवों में लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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नोडल अधिकारी स्वच्छता मनोज त्यागी ने बताया कि सफाई कर्मियों व स्वेच्छाग्रहियों को ग्रामीणों को खुले में शौच करने से होने वाली दिक्कतों को बताकर उन्हें जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है। लोग शौचालयों के निर्माण और उनके उपयोग के प्रति जागरूक भी हो रहे हैं। लेकिन अभी और अधिक जागरूकता की जरूरत है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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