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बाल्मीकि टाइगर रिजर्व से टाइगर को भटकने की संभावना, चौकसी बढ़ी
Updated Wed, 08 Nov 2017 07:02 PM IST
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महराजगंज। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के सीमावर्ती वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बाघ भटकने की आशंका जताई जा रही है। यह आशंका भी जताई जा रही है कि बाघ गंडक दियारा के रास्ते सोनपुर मेला क्षेत्र में पहुंचकर नुकसान पहुंचा सकता है। इसको लेकर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्रशासन ने गंडक नदी के निकटवर्ती वन क्षेत्रों में हाई अलर्ट करते हुए चौकसी बढ़ा दी है। वन कर्मियों की टीम ने बाघ की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए गंडक दियारा क्षेत्र में गश्त शुरू कर दी है।
एक सेवानिवृत्त वन अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जब-जब सोनपुर में मेला लगता है गंडक नदी के निकटवर्ती वन क्षेत्रों से बाघों की गतिविधि दियारा की ओर बढ़ जाती है। वर्ष 2012 में एक बाघ मदनपुर वन क्षेत्र से गंडक दियारा के रास्ते सोनपुर मेला क्षेत्र में पहुंच गया था। उसके आतंक से लोग दहशत में थे। उसके हमले में एक डीएफओ समेत कई वन कर्मी घायल हो गए थे। वहीं, वन अधिकारी ने बताया कि सोनपुर मेला एक माह तक चलता है। ऐसे में दियारा के रास्ते बाघ वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से भटक कर सोनपुर दियारा में जा सकते हैं। इसको देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के निदेशक एस चंद्रशेखर ने बताया कि जंगल व गंडक दियारा का खुला क्षेत्र है। उन क्षेत्रों में भी बाघों का आवागमन होता रहता है। एक रात में बाघ करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। ऐसे में वह भटक कर कहीं भी जा सकते हैं। इस स्थिति को देखते हुए गंडक नदी के निकटवर्ती वन क्षेत्रों में हाई अलर्ट घोषित कर चौकसी बढ़ा दी गई है। वनकर्मियों की टीम को गंडक दियारा क्षेत्र में गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
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एक सेवानिवृत्त वन अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जब-जब सोनपुर में मेला लगता है गंडक नदी के निकटवर्ती वन क्षेत्रों से बाघों की गतिविधि दियारा की ओर बढ़ जाती है। वर्ष 2012 में एक बाघ मदनपुर वन क्षेत्र से गंडक दियारा के रास्ते सोनपुर मेला क्षेत्र में पहुंच गया था। उसके आतंक से लोग दहशत में थे। उसके हमले में एक डीएफओ समेत कई वन कर्मी घायल हो गए थे। वहीं, वन अधिकारी ने बताया कि सोनपुर मेला एक माह तक चलता है। ऐसे में दियारा के रास्ते बाघ वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से भटक कर सोनपुर दियारा में जा सकते हैं। इसको देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है।
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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के निदेशक एस चंद्रशेखर ने बताया कि जंगल व गंडक दियारा का खुला क्षेत्र है। उन क्षेत्रों में भी बाघों का आवागमन होता रहता है। एक रात में बाघ करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। ऐसे में वह भटक कर कहीं भी जा सकते हैं। इस स्थिति को देखते हुए गंडक नदी के निकटवर्ती वन क्षेत्रों में हाई अलर्ट घोषित कर चौकसी बढ़ा दी गई है। वनकर्मियों की टीम को गंडक दियारा क्षेत्र में गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
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