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गर्मी में दुश्वारियों से भरा है रोडवेज बस का सफर
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गर्मी में दुश्वारियों से भरा है रोडवेज बस से सफर
यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ जाए को फर्स्ट एड तक के इंतजाम नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। इन दिनों में गर्मी चरम पर है। तपती दोपहरी में रोडवेज से सफर दुश्वारियों से भरा होता है। ज्यादातर बसों की खिड़कियां ठीक नहीं होने से गर्म हवा के कारण यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं, अगर बस में अचानक किसी यात्री की तबीयत खराब हो जाए तो उसमें फर्स्ट एड बाक्स तक की व्यवस्था भी नहीं है। बसों में लगे फर्स्ट एड बाक्स शो पीस बनकर रह गए हैं। बसों में लगे बाक्स तो हैं लेकिन उसमें जरूरी दवाएं नहीं रहती हैं। इसके अलावा आग से बचाव के इंतजाम भी नहीं हैं, जिन बसों में अग्निशमन यंत्र लगे हैं, उनमें से अधिकांश में यह यंत्र खराब पड़े हैं जबकि कुछ बसों में तो अग्निशमन यंत्र तक नहीं लगे हैं। यात्री इन दुश्वारियों के बीच रोडवेज बस से सफर करने को विवश हैं।
जिले में स्थित निचलौल डिपो में 44 रोडवेज एवं 5 अनुबंधित बसें हैं। इस बसों के संचालन के लिए 38 संविदा एवं 22 स्थायी चालकों की तैनाती की गई है। इसके अलावा 38 संविदा एवं 40 स्थायी परिचालक तैनात हैं। उधर, निचलौल डिपो के बेड़े में शामिल अधिकांश बसों में खिड़कियों की हालत ठीक नहीं है। खिड़कियों में शीशा नहीं रहने से गर्म हवा सीधे चेहरे पर लगती है। बसों में सफर करने के दौरान लू से बचाव तक की व्यवस्था नहीं है। कुछ बसों में सीट भी ठीक दशा में नहीं हैं। कुछ सीट तो ऐसे हैं, जिनके नट-बोल्ट ठीक से कसे तक नहीं गए हैं। इसके चलते सीटें हिलती रहती हैं और यात्री यात्रा के दौरान अपने स्थान से इधर उधर हो जाते हैं। बसों में सफर के दौरान अगर तबीयत खराब हो जाए तो प्राथमिक उपचार तक की व्यवस्था नहीं है। अधिकांश बसों में फर्स्ट एड बाक्स तो हैं लेकिन उनमें दवा व प्राथमिक उपचार से संबंधित अन्य संसाधन नहीं हैं। कुछ बसों में तो फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं हैं। हैरत की बात है कि अग्निशमक यंत्र भी ठीक हालत में नहीं है। कुछ बसों में तो बेकार हालत में अग्निशमक यंत्र पड़े रहते हैं। कुछ बसों में तो अग्निशमन यंत्र लगे तक नहीं है। हालत यह है कि आग से बचाव के इंतजाम तक नहीं हैं। कुल मिलाकर रोडवेज बस से सफर मुश्किलों से भरा है।
एआरएम भुनेश्वर प्रसाद कहते हैं कि यात्रियों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाता है। लगभग सभी बसों में खिड़कियां ठीक हालत में हैं। अग्निशमन यंत्र भी लगे हैं। अगर कोई खराब है तो उसे ठीक करा दिया जाएगा। सीमित संसाधनों में बेहतर यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
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यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ जाए को फर्स्ट एड तक के इंतजाम नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। इन दिनों में गर्मी चरम पर है। तपती दोपहरी में रोडवेज से सफर दुश्वारियों से भरा होता है। ज्यादातर बसों की खिड़कियां ठीक नहीं होने से गर्म हवा के कारण यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं, अगर बस में अचानक किसी यात्री की तबीयत खराब हो जाए तो उसमें फर्स्ट एड बाक्स तक की व्यवस्था भी नहीं है। बसों में लगे फर्स्ट एड बाक्स शो पीस बनकर रह गए हैं। बसों में लगे बाक्स तो हैं लेकिन उसमें जरूरी दवाएं नहीं रहती हैं। इसके अलावा आग से बचाव के इंतजाम भी नहीं हैं, जिन बसों में अग्निशमन यंत्र लगे हैं, उनमें से अधिकांश में यह यंत्र खराब पड़े हैं जबकि कुछ बसों में तो अग्निशमन यंत्र तक नहीं लगे हैं। यात्री इन दुश्वारियों के बीच रोडवेज बस से सफर करने को विवश हैं।
जिले में स्थित निचलौल डिपो में 44 रोडवेज एवं 5 अनुबंधित बसें हैं। इस बसों के संचालन के लिए 38 संविदा एवं 22 स्थायी चालकों की तैनाती की गई है। इसके अलावा 38 संविदा एवं 40 स्थायी परिचालक तैनात हैं। उधर, निचलौल डिपो के बेड़े में शामिल अधिकांश बसों में खिड़कियों की हालत ठीक नहीं है। खिड़कियों में शीशा नहीं रहने से गर्म हवा सीधे चेहरे पर लगती है। बसों में सफर करने के दौरान लू से बचाव तक की व्यवस्था नहीं है। कुछ बसों में सीट भी ठीक दशा में नहीं हैं। कुछ सीट तो ऐसे हैं, जिनके नट-बोल्ट ठीक से कसे तक नहीं गए हैं। इसके चलते सीटें हिलती रहती हैं और यात्री यात्रा के दौरान अपने स्थान से इधर उधर हो जाते हैं। बसों में सफर के दौरान अगर तबीयत खराब हो जाए तो प्राथमिक उपचार तक की व्यवस्था नहीं है। अधिकांश बसों में फर्स्ट एड बाक्स तो हैं लेकिन उनमें दवा व प्राथमिक उपचार से संबंधित अन्य संसाधन नहीं हैं। कुछ बसों में तो फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं हैं। हैरत की बात है कि अग्निशमक यंत्र भी ठीक हालत में नहीं है। कुछ बसों में तो बेकार हालत में अग्निशमक यंत्र पड़े रहते हैं। कुछ बसों में तो अग्निशमन यंत्र लगे तक नहीं है। हालत यह है कि आग से बचाव के इंतजाम तक नहीं हैं। कुल मिलाकर रोडवेज बस से सफर मुश्किलों से भरा है।
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एआरएम भुनेश्वर प्रसाद कहते हैं कि यात्रियों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाता है। लगभग सभी बसों में खिड़कियां ठीक हालत में हैं। अग्निशमन यंत्र भी लगे हैं। अगर कोई खराब है तो उसे ठीक करा दिया जाएगा। सीमित संसाधनों में बेहतर यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
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