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Maharajganj News: दरवाजे तक पहुंचा बाढ़ का पानी, बच्चों ने छोड़ दिया स्कूल जाना
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फोटो परिचय: रोहुआ नाला पार करने के लिए नाव का सहारा लेते ग्रामीण।
- रोहुआ नाला छलका मार्ग पर तीन फीट पानी, पांच नावों के सहारे आवागमन
- पानी और जंगल के बीच जिंदगी जीने को मजबूर 19 हजार से अधिक की आबादी
- बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा व्यवस्था भी बदहाल
निचलौल। दियरा क्षेत्र में लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इन तीन गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग (रोहुआ नाला छलका मार्ग) पर करीब तीन फीट तक पानी भर गया है। बाढ़ का पानी दरवाजे तक पहुंचा तो इन टोलों में रहने वाले करीब दो दर्जन से अधिक बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है। साथ ही पशुओं के लिए चारे का संकट भी खड़ा हो गया है।
शिकारपुर गांव के धरमपुर टोला निवासी रामपति ने बताते हैं कि प्राथमिक विद्यालय शिकारपुर टोला के परिसर में करीब एक सप्ताह से पानी भर गया है। स्कूल तो खुलता है लेकिन यहां दो दर्जन बच्चे पढ़ने के लिए नहीं आ रहे हैं। शिकारपुर के कटबासी टोला की रहने वाली रजावती देवी ने कहा कि उनका भूसा पानी में भीग गया है। चारों तरफ पानी होने के कारण हरा चारा मिल नहीं पा रहा है। जिससे पशुओं के लिए चारे का संकट हो गया है।
शिकारपुर के रमाकांत यादव ने बताया कि उनके गांव में बिजली नहीं है और सोलर पैनल भी खराब है। शाम ढलने से पहले लोग भोजन कर ले रहे हैं। रात में घर से बाहर निकलने से लोग डर रहे हैं। सोहगीबरवा के बाबू टोला के नगीना साहनी ने बताया कि चारों तरफ जलभराव है। अब तो जलभराव के कारण संक्रमण व बीमारी का डर सताने लगा है।
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19 हजार की आबादी पर मात्र पांच नाव
तीन गांव की करीब 19 हजार से अधिक आबादी के लिए आवाजाही के लिए नाव ही सहारा बनी हुई है। हालांकि यहां प्रशासन ने महज पांच नाव का इंतजाम किया है। शिकारपुर गांव के मटियरवा टोला व धर्मपुर टोला, भोथहा के पिपरासी टोला व सोहगीबरवा के दवनहवा, कटवासी व नौका टोला बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। यहां रहने वाले तकरीबन हरेक घर के दरवाजे तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। चारों तरफ पानी होने के कारण पशुओं के लिए चारे का संकट आ चुका है। गांव के खेत में लगे गन्ना व धान की फसल तो पहले ही बाढ़ के पानी में डूब चुकी है। प्रशासन ने आवागमन के लिए रोहुआ नाला पर पांच नावें लगाई हैं लेकिन हजारों की आबादी के हिसाब से यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रहा है। दियरा क्षेत्र के कुछ लोगों के पास निजी नाव हैं, वे नाव ही गांव वालों के आवाजाही के लिए सहारा बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दियरा क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या स्थायी सड़क और रोहुआ नाला पर पुल का निर्माण है। बाढ़ देखने के लिए अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इसी रास्ते से होकर गांव पहुंचते हैं, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
बारिश के कारण दियरा क्षेत्र के विद्यालयों में पानी भर गया है। ऐसे में इन्हें तत्काल बाढ़ आश्रय स्थल के रूप में इस्तेमाल करना मुश्किल है। प्रशासन ने आपात स्थिति को देखते हुए सोहगीबरवा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भवन के ऊपरी हिस्से को बाढ़ आश्रय स्थल के रूप में रिजर्व कर दिया है। उपजिलाधिकारी अवनीश त्रिपाठी ने बताया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। हर घंटे स्थिति की जानकारी ली जा रही है। फिलहाल गंडक नदी में बाढ़ को लेकर कोई नया खतरा सामने नहीं आया है।
एक महिला डॉक्टर के भरोसे तीन गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था
दियरा क्षेत्र के तीनों गांवों के बीच सीएचसी भवन का निर्माण कराया गया है। यहां डॉ. ब्यूटी कुमारी की तैनाती है। करीब 19 हजार की आबादी वाले क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था एक महिला चिकित्सक के भरोसे है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि किसी भी विषम परिस्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ और बारिश के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में चिकित्सकीय सुविधाओं को और मजबूत किए जाने की जरूरत है।
मवेशियों के लिए चारा-पानी जुटाना चुनौती
चारों तरफ पानी भर जाने से पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए समय से चारा और पानी उपलब्ध कराना भी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पशु चिकित्सकों की मौजूदगी नियमित नहीं रहती। कई बार प्रशासनिक अधिकारी के गांव में पहुंचने पर ही पशु चिकित्सकों की सक्रियता दिखाई देती है। पशु बीमार पड़ने पर ग्रामीण घरेलू उपचार के सहारे काम चलाते हैं।
झोपड़ियों में गुजर रही जिंदगी
दियरा क्षेत्र के गांवों की तस्वीर किसी पिछड़े इलाके की कहानी बयां करती है। बड़ी संख्या में झोपड़ियां दिखाई देती हैं। चारों तरफ पानी और जंगल के बीच ग्रामीणों का रहन-सहन आज भी पुराने दौर जैसा नजर आता है। बारिश के तीन महीने यहां के लोगों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होते। पानी घटने के बाद भी बदहाल रास्तों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण दुश्वारियां बनी रहती हैं।
सुरक्षा को लेकर पुलिस भी सतर्क
पुलिस क्षेत्राधिकारी रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि दियरा क्षेत्र के गांवों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सतर्क है। कई टीमें लगाई गई हैं। सोहगीबरवा थाना प्रभारी के नेतृत्व में टीम गठित कर गांवों में प्रतिदिन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। फिलहाल गंडक नदी की स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। लेकिन चारों तरफ पानी और जंगल से घिरे इन गांवों के लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि हर साल आने वाली इस मुसीबत का स्थायी समाधान आखिर कब होगा।
स्पीकअप
गांव में सबसे बड़ी समस्या बिजली और सड़क की है। बरसात के दिनों में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। कई बार जरूरी काम के लिए भी ग्रामीणों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। सरकार और प्रशासन को सड़क निर्माण के साथ ही बिजली व्यवस्था को भी बेहतर करना चाहिए।
- कुसुमावती देवी, सोहगीबरवा
दियरा क्षेत्र चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ है। बारिश और बाढ़ का पानी अब घरों तक पहुंच गया है। ग्रामीणों को मवेशियों के लिए चारा-पानी जुटाने में काफी दिक्कत हो रही है। गांव के प्राथमिक विद्यालय परिसरों में भी पानी भरा होने से विद्यालय खुलने के बावजूद जलभराव के कारण विद्यार्थी स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं।
- ब्रह्मा यादव, सोहगीबरवा
वर्जन
सोहगीबरवा में हाई अलर्ट की स्थिति में प्रशासन पूरी तरह तैयार है। पूर्व में बनाए गए बाढ़ आश्रय स्थल में पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण सीएचसी भवन को खाली रखा गया है। जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को वहां ठहराने की पूरी व्यवस्था की जाएगी। रोहुआ नाला सबसे अधिक दिक्कत वाला स्थान है। यहां पांच सरकारी नावों के अलावा कुछ निजी नावें भी लगाई गई हैं।
- अवनीश त्रिपाठी, उपजिलाधिकारी
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- पानी और जंगल के बीच जिंदगी जीने को मजबूर 19 हजार से अधिक की आबादी
- बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा व्यवस्था भी बदहाल
निचलौल। दियरा क्षेत्र में लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इन तीन गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग (रोहुआ नाला छलका मार्ग) पर करीब तीन फीट तक पानी भर गया है। बाढ़ का पानी दरवाजे तक पहुंचा तो इन टोलों में रहने वाले करीब दो दर्जन से अधिक बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है। साथ ही पशुओं के लिए चारे का संकट भी खड़ा हो गया है।
शिकारपुर गांव के धरमपुर टोला निवासी रामपति ने बताते हैं कि प्राथमिक विद्यालय शिकारपुर टोला के परिसर में करीब एक सप्ताह से पानी भर गया है। स्कूल तो खुलता है लेकिन यहां दो दर्जन बच्चे पढ़ने के लिए नहीं आ रहे हैं। शिकारपुर के कटबासी टोला की रहने वाली रजावती देवी ने कहा कि उनका भूसा पानी में भीग गया है। चारों तरफ पानी होने के कारण हरा चारा मिल नहीं पा रहा है। जिससे पशुओं के लिए चारे का संकट हो गया है।
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शिकारपुर के रमाकांत यादव ने बताया कि उनके गांव में बिजली नहीं है और सोलर पैनल भी खराब है। शाम ढलने से पहले लोग भोजन कर ले रहे हैं। रात में घर से बाहर निकलने से लोग डर रहे हैं। सोहगीबरवा के बाबू टोला के नगीना साहनी ने बताया कि चारों तरफ जलभराव है। अब तो जलभराव के कारण संक्रमण व बीमारी का डर सताने लगा है।
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19 हजार की आबादी पर मात्र पांच नाव
तीन गांव की करीब 19 हजार से अधिक आबादी के लिए आवाजाही के लिए नाव ही सहारा बनी हुई है। हालांकि यहां प्रशासन ने महज पांच नाव का इंतजाम किया है। शिकारपुर गांव के मटियरवा टोला व धर्मपुर टोला, भोथहा के पिपरासी टोला व सोहगीबरवा के दवनहवा, कटवासी व नौका टोला बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। यहां रहने वाले तकरीबन हरेक घर के दरवाजे तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। चारों तरफ पानी होने के कारण पशुओं के लिए चारे का संकट आ चुका है। गांव के खेत में लगे गन्ना व धान की फसल तो पहले ही बाढ़ के पानी में डूब चुकी है। प्रशासन ने आवागमन के लिए रोहुआ नाला पर पांच नावें लगाई हैं लेकिन हजारों की आबादी के हिसाब से यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रहा है। दियरा क्षेत्र के कुछ लोगों के पास निजी नाव हैं, वे नाव ही गांव वालों के आवाजाही के लिए सहारा बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दियरा क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या स्थायी सड़क और रोहुआ नाला पर पुल का निर्माण है। बाढ़ देखने के लिए अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इसी रास्ते से होकर गांव पहुंचते हैं, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
बारिश के कारण दियरा क्षेत्र के विद्यालयों में पानी भर गया है। ऐसे में इन्हें तत्काल बाढ़ आश्रय स्थल के रूप में इस्तेमाल करना मुश्किल है। प्रशासन ने आपात स्थिति को देखते हुए सोहगीबरवा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भवन के ऊपरी हिस्से को बाढ़ आश्रय स्थल के रूप में रिजर्व कर दिया है। उपजिलाधिकारी अवनीश त्रिपाठी ने बताया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। हर घंटे स्थिति की जानकारी ली जा रही है। फिलहाल गंडक नदी में बाढ़ को लेकर कोई नया खतरा सामने नहीं आया है।
एक महिला डॉक्टर के भरोसे तीन गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था
दियरा क्षेत्र के तीनों गांवों के बीच सीएचसी भवन का निर्माण कराया गया है। यहां डॉ. ब्यूटी कुमारी की तैनाती है। करीब 19 हजार की आबादी वाले क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था एक महिला चिकित्सक के भरोसे है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि किसी भी विषम परिस्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ और बारिश के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में चिकित्सकीय सुविधाओं को और मजबूत किए जाने की जरूरत है।
मवेशियों के लिए चारा-पानी जुटाना चुनौती
चारों तरफ पानी भर जाने से पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए समय से चारा और पानी उपलब्ध कराना भी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पशु चिकित्सकों की मौजूदगी नियमित नहीं रहती। कई बार प्रशासनिक अधिकारी के गांव में पहुंचने पर ही पशु चिकित्सकों की सक्रियता दिखाई देती है। पशु बीमार पड़ने पर ग्रामीण घरेलू उपचार के सहारे काम चलाते हैं।
झोपड़ियों में गुजर रही जिंदगी
दियरा क्षेत्र के गांवों की तस्वीर किसी पिछड़े इलाके की कहानी बयां करती है। बड़ी संख्या में झोपड़ियां दिखाई देती हैं। चारों तरफ पानी और जंगल के बीच ग्रामीणों का रहन-सहन आज भी पुराने दौर जैसा नजर आता है। बारिश के तीन महीने यहां के लोगों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होते। पानी घटने के बाद भी बदहाल रास्तों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण दुश्वारियां बनी रहती हैं।
सुरक्षा को लेकर पुलिस भी सतर्क
पुलिस क्षेत्राधिकारी रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि दियरा क्षेत्र के गांवों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सतर्क है। कई टीमें लगाई गई हैं। सोहगीबरवा थाना प्रभारी के नेतृत्व में टीम गठित कर गांवों में प्रतिदिन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। फिलहाल गंडक नदी की स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। लेकिन चारों तरफ पानी और जंगल से घिरे इन गांवों के लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि हर साल आने वाली इस मुसीबत का स्थायी समाधान आखिर कब होगा।
स्पीकअप
गांव में सबसे बड़ी समस्या बिजली और सड़क की है। बरसात के दिनों में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। कई बार जरूरी काम के लिए भी ग्रामीणों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। सरकार और प्रशासन को सड़क निर्माण के साथ ही बिजली व्यवस्था को भी बेहतर करना चाहिए।
- कुसुमावती देवी, सोहगीबरवा
दियरा क्षेत्र चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ है। बारिश और बाढ़ का पानी अब घरों तक पहुंच गया है। ग्रामीणों को मवेशियों के लिए चारा-पानी जुटाने में काफी दिक्कत हो रही है। गांव के प्राथमिक विद्यालय परिसरों में भी पानी भरा होने से विद्यालय खुलने के बावजूद जलभराव के कारण विद्यार्थी स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं।
- ब्रह्मा यादव, सोहगीबरवा
वर्जन
सोहगीबरवा में हाई अलर्ट की स्थिति में प्रशासन पूरी तरह तैयार है। पूर्व में बनाए गए बाढ़ आश्रय स्थल में पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण सीएचसी भवन को खाली रखा गया है। जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को वहां ठहराने की पूरी व्यवस्था की जाएगी। रोहुआ नाला सबसे अधिक दिक्कत वाला स्थान है। यहां पांच सरकारी नावों के अलावा कुछ निजी नावें भी लगाई गई हैं।
- अवनीश त्रिपाठी, उपजिलाधिकारी