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चारों हाथियों को यहां की आबोहवा अब रास आ गई
Updated Fri, 06 Jul 2018 11:16 PM IST
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चारों हाथियों को यहां की आबोहवा आ गई रास
हाथियों का भोजन चार्ट बनाया गया
अमर उजाला ब्यूरो
सोहगीबरवां। सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग के सीमावर्ती बाल्मीकि टाइगर रिजर्व में कर्नाटक से लाए गए चारों हाथियों को यहां की आबोहवा रास आ गई है। चारों हाथी पूरी तरह से बाल्मीकि टाइगर रिजर्व के कायदे-कानून और यहां की व्यवस्था में ढल गए हैं। यहां का भोजन भी उन्हें पसंद आने लगा है। महावतों की बातें भी समझ आने लगी है। नदी-नालों व झील-झरने को पार कर गश्त करने में मजा आने लगा हैं।
बाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के सहायक वन संरक्षक आरके सिन्हा ने बताया कि मदनपुर रेंज में रूपा नाम की हथिनी पहले से आती रही है। रूपा यहां के वातावरण में ढल चुकी है। कर्नाटक से चार नर हाथियों को यहां लाया गया था। उन्हें कालेश्वर स्थित हाथीशाला में रखा गया है। कुछ दिनों तक यहां महावतों के अलावा किसी को जाने की इजाजत नहीं थी। मकसद यह था कि हाथी यहां की आबोहवा में ढल जाएं। उनके लिए बाल्मीकि टाइगर रिजर्व में मिलने वाले खानपान में भी परिवर्तन किया गया है। हाथियों का भोजन चार्ट बनाया गया है। यहां हाथियों को धान, पुआल, गुड़, नमक, हींग, मिनरल मिक्सचर, चावल, मक्का दर्रा, गेहूं दर्रा, चना और गन्ना दिया जाता है।। अब वह घूम-घूम कर पेड़ों के पत्ते भी खा रहे हैं। मानसून गश्ती में चारों हाथी कार्यकुशल हो चुके हैं।
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हाथियों का भोजन चार्ट बनाया गया
अमर उजाला ब्यूरो
सोहगीबरवां। सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग के सीमावर्ती बाल्मीकि टाइगर रिजर्व में कर्नाटक से लाए गए चारों हाथियों को यहां की आबोहवा रास आ गई है। चारों हाथी पूरी तरह से बाल्मीकि टाइगर रिजर्व के कायदे-कानून और यहां की व्यवस्था में ढल गए हैं। यहां का भोजन भी उन्हें पसंद आने लगा है। महावतों की बातें भी समझ आने लगी है। नदी-नालों व झील-झरने को पार कर गश्त करने में मजा आने लगा हैं।
बाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के सहायक वन संरक्षक आरके सिन्हा ने बताया कि मदनपुर रेंज में रूपा नाम की हथिनी पहले से आती रही है। रूपा यहां के वातावरण में ढल चुकी है। कर्नाटक से चार नर हाथियों को यहां लाया गया था। उन्हें कालेश्वर स्थित हाथीशाला में रखा गया है। कुछ दिनों तक यहां महावतों के अलावा किसी को जाने की इजाजत नहीं थी। मकसद यह था कि हाथी यहां की आबोहवा में ढल जाएं। उनके लिए बाल्मीकि टाइगर रिजर्व में मिलने वाले खानपान में भी परिवर्तन किया गया है। हाथियों का भोजन चार्ट बनाया गया है। यहां हाथियों को धान, पुआल, गुड़, नमक, हींग, मिनरल मिक्सचर, चावल, मक्का दर्रा, गेहूं दर्रा, चना और गन्ना दिया जाता है।। अब वह घूम-घूम कर पेड़ों के पत्ते भी खा रहे हैं। मानसून गश्ती में चारों हाथी कार्यकुशल हो चुके हैं।
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