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खुले आसमान तले पढ़ते हैं वन टागियां के बच्चे
Updated Fri, 20 Jul 2018 06:24 PM IST
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खुले आसमान में पढ़ते हैं वनग्रामों के बच्चेे
वन ग्राम में विकास के दावे हुए फेल
अमर उजाला ब्यूरो
चौक बाजार। मिठौरा विकास खंड के वनटांगिया गांवों की शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। इन वनटांगियां गांवों के बच्चों को पढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने अध्यापकों की तैनाती तो कर दी है लेकिन विद्यालय भवन नहीं है। वनग्राम कम्पार्ट 24, 26, 27, 28 हथियहवा, बलुआहिया के बच्चे पीपल के पेड़ की छांव में पढ़ते हैं।
जब मध्याह्न भोजन की घंटी बजती है, तो घर से लाये हुए थाली में बच्चे भोजन करते हैं। कक्षा 2 के छात्र संदीप, रीना, कक्षा 3 के राम हरख, कक्षा 4 के छात्र अनुराग गुप्ता और तनु गुप्ता का कहना था कि अगर स्कूल का भवन रहता तो बरसात में परेशानी नहीं होती। पता नहीं कब स्कूल भवन बनेगा। कक्षा पांच के छात्र प्रेम निषाद, निरमा और शबनम का कहना था कि पढ़ाई खुले में होने के कारण परेशानी होती है। कभी - कभी पशु आ जाते हैं तो उन्हें हटाना पड़ता है। अभिभावक सर्वजीत, नूर मोहम्मद, रामभरोस गुप्ता, राधेश्याम, हदीश अली आदि ने कहा कि विद्यालय भवन और शौचालय के लिए अधिकारियों से कई बार सिफारिश की गई है लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। राजस्व गांव घोषित हो गया लेकिन बुनियादी सुविधाएं अब भी बदहाल हैं। प्रभारी प्रधानाध्यापक अजय पटेल ने बताया कि वर्तमान में 498 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए पांच अध्यापक तैनात हैं। जो संसाधन हैं, उसी में बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।
वन ग्राम में विकास के दावे हुए फेल
अमर उजाला ब्यूरो
चौक बाजार। मिठौरा विकास खंड के वनटांगिया गांवों की शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। इन वनटांगियां गांवों के बच्चों को पढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने अध्यापकों की तैनाती तो कर दी है लेकिन विद्यालय भवन नहीं है। वनग्राम कम्पार्ट 24, 26, 27, 28 हथियहवा, बलुआहिया के बच्चे पीपल के पेड़ की छांव में पढ़ते हैं।
जब मध्याह्न भोजन की घंटी बजती है, तो घर से लाये हुए थाली में बच्चे भोजन करते हैं। कक्षा 2 के छात्र संदीप, रीना, कक्षा 3 के राम हरख, कक्षा 4 के छात्र अनुराग गुप्ता और तनु गुप्ता का कहना था कि अगर स्कूल का भवन रहता तो बरसात में परेशानी नहीं होती। पता नहीं कब स्कूल भवन बनेगा। कक्षा पांच के छात्र प्रेम निषाद, निरमा और शबनम का कहना था कि पढ़ाई खुले में होने के कारण परेशानी होती है। कभी - कभी पशु आ जाते हैं तो उन्हें हटाना पड़ता है। अभिभावक सर्वजीत, नूर मोहम्मद, रामभरोस गुप्ता, राधेश्याम, हदीश अली आदि ने कहा कि विद्यालय भवन और शौचालय के लिए अधिकारियों से कई बार सिफारिश की गई है लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। राजस्व गांव घोषित हो गया लेकिन बुनियादी सुविधाएं अब भी बदहाल हैं। प्रभारी प्रधानाध्यापक अजय पटेल ने बताया कि वर्तमान में 498 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए पांच अध्यापक तैनात हैं। जो संसाधन हैं, उसी में बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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