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हम सभी कर्मों की कठपुतिलियां हैं, कर्म जैसा नचाते हैं हम वैसे ही नाचते हैं: सुधासागर

Sat, 29 Oct 2022 11:24 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Oct 2022 11:24 PM IST
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We are all puppets of karma: Sudha Sagar Maharaj
ललितपुर। श्रीअभिनंदनोदय अतिशय तीर्थ में निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव सुधा सागर महाराज ने कहा कि हम सभी कर्मों की कठपुतलियां हैं और कर्म जैसा नचाते हैं, हम वैसे ही नाचते हैं।
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शनिवार को सतोदय तीर्थ क्षेत्र सेरोनजी से आए बच्चों एवं श्रद्धालुओं को संबोधित करतेे हुए कहा कि आज मनुष्य की जिंदगी समस्याओं में उलझी हुई है, सुबह उठता है तो चिंता के साथ, सुबह से शाम तक इसी चिंता में निकलती है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए। सोते समय टेंशन कि रात कैसी निकलेगी, हम सुबह का उगता हुआ सूरज देख पाएंगे कि नहीं, खुशी-खुशी सोता है और रोते-रोते उठता है। यह मात्र हम और आपकी कहानी नहीं बड़े-बड़े महापुरुषों की भी यही कहानी थी। उन्होंने आगे कहा कि शाम खुशी से बीत रही थी, अयोेध्या झूम रही थी, कण-कण पुलकित हो रहा था, बड़े बड़े ज्योतिषाचार्य भी वहां पर थे और दशरथ जैसे पिता, वशिष्ठ जैसे गुरु, वे भी घोषणा नहीं कर पाए। दशरथ ने कहा गुरु वशिष्ठ आप ही तो कह रहे थे ऐसा शुभ समय पिछले सौ वर्षों में नहीं आया। राम को राजगद्दी का सबसे अच्छा समय है, तब वशिष्ठ बोले मैंने तो कागज बांचा था, किस्मत नहीं बांची थी। कागज में जो राजयेाग का शुभ समय था। बहुत कठिन है इस दुनिया में जीना, दूसरे पल क्या हो जाये, हम कह नहीं सकते। हम सभी कर्मों की कठपुतलियां हैं, कर्म जैसा नचाते हैं हम वैसे ही नाचते हैं। कर्मों से हमें भगवान भी नहीं बचा सकते।
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शनिवार को सतोदय तीर्थ क्षेत्र सेरोनजी पदाधिकारियों एवं वहां से आए छात्रों ने मुनिश्री को श्रीफल देकर सीरोनजी पदार्पण करने का अनुरोध किया। क्षुल्लक गंभीर सागर ने सभी छात्रों को प्रोत्साहन एवं आशीर्वाद दिया। मुनिश्री ने छात्रों से कहा कि जीवन में आगे बढ़ने में धर्म और जाति बाधक नहीं बनती है। हम असफल इसलिए होते हैं क्योंकि हम पूरी ईमानदारी से मेहनत नहीं करते। सफल न होने पर भगवान को दोष मत दो, पने आप को दोषी मानो। कार्यक्रम का संचालन डा. अक्षय टड़ैया ने किया ।
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अभिनन्दनोदय तीर्थ में मुनि श्री के मुखारविंद से शांतिधारा करने का सौभाग्य तरूण रजनी काला व्यावर मुंबई, चंद्रावाई संदीप सराफ के अलावा स्थानीय श्रावक श्रष्ठियों के परिवार को मिला।
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