{"_id":"609459198ebc3ed1fd083781","slug":"water-crisis-lalitpur-news-jhs194499427","type":"story","status":"publish","title_hn":"कारीटोरन में गहरा रहे पेयजल संकट पर विभाग चुप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कारीटोरन में गहरा रहे पेयजल संकट पर विभाग चुप
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कारीटोरन/ललितपुर। ब्लॉक बार क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कारीटोरन में पंद्रह दिन से पाइप लाइन से जलापूर्ति ठप होने के कारण पेयजल का भीषण संकट उत्पन्न हो गया है। लोग पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है।
पंद्रह दिन से नलों में पानी नहीं आ रहा है। इस कारण कई लोगों को एक किलोमीटर दूरी से पानी लाना पड़ रहा है। खराब हैंडपंपों की मरम्मत नहीं होने से लोगों की परेशानी और भी अधिक बढ़ गई है। अथाई और गुरइया बाबा के पास लगे हैंडपंप कई दिनों से खराब पड़े हैं। उनकी मरम्मत की सुध नहीं ली जा रही है। सुबह से पानी भरने का सिलसिला शुरू हो जाता है जो दोपहर तक चलता रहता है। हैंडपंपों पर पूरा लोड होने के कारण वह रुक- रुक कर पानी देने लगते हैं, जिसमें काफी समय बरबाद होता है। जहां कोरोना काल में लोगों को घर में रहने के लिए कहा जा रहा है, वहीं पीने के पानी का इंतजाम करने के लिए लोग घर से निकलने को विवश हैं।
कुलदीप दुबे का कहना है कि एक किलोमीटर दूर से पीने का पानी भरकर लाना पड़ रहा है। पाइप लाइन की आपूर्ति जब कभी खोली जाती है। पाइप लाइनों में पानी का प्रेशर लगभग समाप्त हो गया है, जिससे पाइप लाइन का पानी घर के अंदर लगे नल तक नहीं पहुंच पाता है। आशीष गोस्वामी का कहना है कि लोगों को अपनी साइकिल में प्लास्टिक के कुप्पा बांधकर पानी भरना पड़ रहा है।
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पंद्रह दिन से नलों में पानी नहीं आ रहा है। इस कारण कई लोगों को एक किलोमीटर दूरी से पानी लाना पड़ रहा है। खराब हैंडपंपों की मरम्मत नहीं होने से लोगों की परेशानी और भी अधिक बढ़ गई है। अथाई और गुरइया बाबा के पास लगे हैंडपंप कई दिनों से खराब पड़े हैं। उनकी मरम्मत की सुध नहीं ली जा रही है। सुबह से पानी भरने का सिलसिला शुरू हो जाता है जो दोपहर तक चलता रहता है। हैंडपंपों पर पूरा लोड होने के कारण वह रुक- रुक कर पानी देने लगते हैं, जिसमें काफी समय बरबाद होता है। जहां कोरोना काल में लोगों को घर में रहने के लिए कहा जा रहा है, वहीं पीने के पानी का इंतजाम करने के लिए लोग घर से निकलने को विवश हैं।
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कुलदीप दुबे का कहना है कि एक किलोमीटर दूर से पीने का पानी भरकर लाना पड़ रहा है। पाइप लाइन की आपूर्ति जब कभी खोली जाती है। पाइप लाइनों में पानी का प्रेशर लगभग समाप्त हो गया है, जिससे पाइप लाइन का पानी घर के अंदर लगे नल तक नहीं पहुंच पाता है। आशीष गोस्वामी का कहना है कि लोगों को अपनी साइकिल में प्लास्टिक के कुप्पा बांधकर पानी भरना पड़ रहा है।
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