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साइबर ठगों ने दो युवकों को बनाया शिकार
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साइबर ठगों ने दो युवकों को बनाया शिकार
तालबेहट (ललितपुर)। विकासखंड तालबेहट के अंतर्गत ग्राम कड़ेसराकलां निवासी सौरभ पुत्र सुनील कुमार जैन ने ऑनलाइन एक टायर कंपनी की एजेंसी लेने के लिए आवेदन किया। दो दिन बाद एक युवक ने अपना नाम आलोक रंजन बताते हुए खुद को कंपनी का प्रमुख बताया। उसने ऑनलाइन आवेदन भेजकर भरने को कहा। सौरभ ने उसे भर कर भेज दिया। इसके बाद कंपनी की रिफंडेबल सिक्योरिटी के रूप में सौरभ से 25 हजार रुपये की मांग की गई। इस पर उसने पैसा जमा कर दिया। अगले दिन कार्यालय की साज सज्जा, सीसीटीवी कैमरों के नाम पर 25 हजार आठ सौ रुपये की मांग की। सौरभ ने यह पैसा भी जमा कर दिया। दो दिन बाद जब सौरभ ने उन फोन नंबरों पर संपर्क किया तो वहां से कोई उत्तर नहीं आया। इसके बाद उसे ठगी का आभास हुआ। वह टायर कंपनी के कार्यालय गया। वहां कर्मचारियों ने बताया कि उनकी कंपनी का कार्यालय कोलकाता में नहीं है और ऐसी कोई कंपनी भी नहीं है। सौरभ ने कोतवाली पुलिस को शिकायती पत्र देकर ऑनलाइन ठगी करने वालों का पता लगाने की मांग की है।
इसी तरह, नगर के रानीपुरा निवासी धर्मेंद्र पुत्र दुर्गा प्रसाद झा के पास एक फोन नंबर से कॉल आया। उसने अपना नाम धीरज कुमार निवासी फूलपुर उत्तर प्रदेश बताते हुए एक नामी फाइनेंस कंपनी से व्यापार के लिए ऋण उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद उसने धर्मेंद्र से एसबीआई के खाते में बारी-बारी से 50 हजार रुपये जमा करा लिए। कुछ दिन बाद जब धर्मेंद्र ने ऋण देने की बात की तो वह टाल-मटोल करते हुए और पैसा जमा करने को कहा। जब धर्मेंद्र ने पता किया तो मालूम चला की इस नाम की कोई कंपनी नहीं है। इस पर धर्मेंद्र ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर मामला दर्ज करने की मांग की है।
लालच में होते हैं ठगी के शिकार
तालबेहट। पुलिस विभाग द्वारा समय- समय पर लोगों को साइबर अपराधियों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इसके लिए सोशल मीडिया सहित समाचार पत्रों में सूचनाएं दी जाती हैं। लेकिन, इसके बाद भी पढ़े- लिखे लोग रोजगार के लिए धन जुटाने और लालच में ठगी के शिकार होते हैं।
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तालबेहट (ललितपुर)। विकासखंड तालबेहट के अंतर्गत ग्राम कड़ेसराकलां निवासी सौरभ पुत्र सुनील कुमार जैन ने ऑनलाइन एक टायर कंपनी की एजेंसी लेने के लिए आवेदन किया। दो दिन बाद एक युवक ने अपना नाम आलोक रंजन बताते हुए खुद को कंपनी का प्रमुख बताया। उसने ऑनलाइन आवेदन भेजकर भरने को कहा। सौरभ ने उसे भर कर भेज दिया। इसके बाद कंपनी की रिफंडेबल सिक्योरिटी के रूप में सौरभ से 25 हजार रुपये की मांग की गई। इस पर उसने पैसा जमा कर दिया। अगले दिन कार्यालय की साज सज्जा, सीसीटीवी कैमरों के नाम पर 25 हजार आठ सौ रुपये की मांग की। सौरभ ने यह पैसा भी जमा कर दिया। दो दिन बाद जब सौरभ ने उन फोन नंबरों पर संपर्क किया तो वहां से कोई उत्तर नहीं आया। इसके बाद उसे ठगी का आभास हुआ। वह टायर कंपनी के कार्यालय गया। वहां कर्मचारियों ने बताया कि उनकी कंपनी का कार्यालय कोलकाता में नहीं है और ऐसी कोई कंपनी भी नहीं है। सौरभ ने कोतवाली पुलिस को शिकायती पत्र देकर ऑनलाइन ठगी करने वालों का पता लगाने की मांग की है।
इसी तरह, नगर के रानीपुरा निवासी धर्मेंद्र पुत्र दुर्गा प्रसाद झा के पास एक फोन नंबर से कॉल आया। उसने अपना नाम धीरज कुमार निवासी फूलपुर उत्तर प्रदेश बताते हुए एक नामी फाइनेंस कंपनी से व्यापार के लिए ऋण उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद उसने धर्मेंद्र से एसबीआई के खाते में बारी-बारी से 50 हजार रुपये जमा करा लिए। कुछ दिन बाद जब धर्मेंद्र ने ऋण देने की बात की तो वह टाल-मटोल करते हुए और पैसा जमा करने को कहा। जब धर्मेंद्र ने पता किया तो मालूम चला की इस नाम की कोई कंपनी नहीं है। इस पर धर्मेंद्र ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर मामला दर्ज करने की मांग की है।
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लालच में होते हैं ठगी के शिकार
तालबेहट। पुलिस विभाग द्वारा समय- समय पर लोगों को साइबर अपराधियों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इसके लिए सोशल मीडिया सहित समाचार पत्रों में सूचनाएं दी जाती हैं। लेकिन, इसके बाद भी पढ़े- लिखे लोग रोजगार के लिए धन जुटाने और लालच में ठगी के शिकार होते हैं।
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