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गैंगस्टर के अपराधी को साढ़े तीन साल की सजा
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- फोटो : court.jpeg
ललितपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (गैंगेस्टर) निर्भय प्रकाश की अदालत ने गैंगेस्टर के अपराधी को साढ़े तीन वर्ष के कारावास एवं दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
पंद्रह वर्ष पूर्व प्रभारी निरीक्षक कोतवाली जगदीश सिंह ने कोतवाली में तहरीर में बताया था कि 14 मई 2005 को सिपाहियों के साथ गश्त पर थे। मोहल्ला तालाबपुरा व लक्ष्मीपुरा में गश्त करते हुए नदीपुरा पहुंचे तो यहां लोगों ने बताया कि नदीपुरा निवासी धीरज पुत्र नाथूराम संगठित अपराधियों का गिरोह चला रहा है व स्वयं गैंग का लीडर है। इसके गैंग में राजकुमार, राकेश व विनोद शामिल हैं। इनके खिलाफ चोरी के कई मुकदमे दर्ज हैं। राजकुमार व राकेश को छह माह का कारावास हो चुका है। धीरज के खिलाफ अभियोग विचाराधीन हैं। इस गैंग का क्षेत्र में भय व आतंक है। प्रभारी निरीक्षक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिए थे।
न्यायालय ने बुधवार को सुनवाई करते हुए आरोपी धीरज के जुर्म इकबाल करने पर उसकी फाइल को अलग करते हुए निर्णय सुनाया। नदीपुरा निवासी धीरज को साढ़े तीन साल का कारावास एवं दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। शेष आरोपी राकेश व विनोद का मामला विचाराधीन है। जबकि, राजकुमार ने 2007 में जुर्म स्वीकार किया था और उसे सजा हो चुकी है। मामले की पैरवी ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रामनरेश राजपूत ने की।
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पंद्रह वर्ष पूर्व प्रभारी निरीक्षक कोतवाली जगदीश सिंह ने कोतवाली में तहरीर में बताया था कि 14 मई 2005 को सिपाहियों के साथ गश्त पर थे। मोहल्ला तालाबपुरा व लक्ष्मीपुरा में गश्त करते हुए नदीपुरा पहुंचे तो यहां लोगों ने बताया कि नदीपुरा निवासी धीरज पुत्र नाथूराम संगठित अपराधियों का गिरोह चला रहा है व स्वयं गैंग का लीडर है। इसके गैंग में राजकुमार, राकेश व विनोद शामिल हैं। इनके खिलाफ चोरी के कई मुकदमे दर्ज हैं। राजकुमार व राकेश को छह माह का कारावास हो चुका है। धीरज के खिलाफ अभियोग विचाराधीन हैं। इस गैंग का क्षेत्र में भय व आतंक है। प्रभारी निरीक्षक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिए थे।
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न्यायालय ने बुधवार को सुनवाई करते हुए आरोपी धीरज के जुर्म इकबाल करने पर उसकी फाइल को अलग करते हुए निर्णय सुनाया। नदीपुरा निवासी धीरज को साढ़े तीन साल का कारावास एवं दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। शेष आरोपी राकेश व विनोद का मामला विचाराधीन है। जबकि, राजकुमार ने 2007 में जुर्म स्वीकार किया था और उसे सजा हो चुकी है। मामले की पैरवी ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रामनरेश राजपूत ने की।
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