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Lalitpur News: अलख जगाने से उच्च शिक्षा की राह आसान
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अशोक तिवारी
ललितपुर। झांसी से अलग होकर 1 मार्च 1974 को ललितपुर नया जिला बना। 51 साल की लंबी यात्रा में यहा शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति आई। जिला बनने से पूर्व जहां दो महाविद्यालय और गिने चुने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट कॉलेज थे। अब 126 हाईस्कूल-इंटर कॉलेज और 20 से अधिक निजी व सरकारी महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं।
खेत-खलिहानों में सिमटे ललितपुर में अब बड़ी-बड़ी इमारतें नजर आने लगी हैं। खेती किसानी, सिंचाई के साधन और पर्यटन विकास की रफ्तार के बीच यहां शिक्षा के साधन भी बेहतर हुए। वर्ष 1974 से पूर्व जनपद को जनपद को सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शुमार किया जाता था। हाईस्कूल-इंटरमीडिएट के लिए सिर्फ गिने चुने ही कॉलेज थे। उच्च शिक्षा के लिए यहां पर सिर्फ दो महाविद्यालय संचालित होते थे। शिक्षा का स्तर ग्रामीण क्षेत्रों में काफी खराब था। यहां रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चे या तो स्कूल ही नही जाते थे या फिर पांच या आठवीं तक ही पढ़ते थे।
बालिका शिक्षा का कमोवेश यही हाल था। बालिकाएं कक्षा पांच या आठ तक ही पढ़ाई करती थी। जिससे जनपद में साक्षरता भी काफी कम थी और साक्षरता दर 30-35 प्रतिशत थी। एक मार्च वर्ष 1974 में ललितपुर जिला बना। जिसके बाद यहां विकास की योजनाओं ने तेजी पकड़ी। साथ साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांति आई। अब यहां पर 8 राजकीय इंटर, 31 राजकीय हाईस्कूल, 11 अशासकीय सहायता प्राप्त और 76 वित्त विहीन विद्यालय है। साथ साथ जिले में 30 से अधिक निजी महाविद्यालय जिसमें पैरा मेडिकल कॉलेज, आईटीआई, कृषि महाविद्यालय, लॉ कॉलेज, राजकीय पॉलीटेक्नीक कॉलेज, बीएड कॉलेज, बीटीसी कॉलेज संचालित हो रहे हैं। संवादन
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ललितपुर। झांसी से अलग होकर 1 मार्च 1974 को ललितपुर नया जिला बना। 51 साल की लंबी यात्रा में यहा शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति आई। जिला बनने से पूर्व जहां दो महाविद्यालय और गिने चुने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट कॉलेज थे। अब 126 हाईस्कूल-इंटर कॉलेज और 20 से अधिक निजी व सरकारी महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं।
खेत-खलिहानों में सिमटे ललितपुर में अब बड़ी-बड़ी इमारतें नजर आने लगी हैं। खेती किसानी, सिंचाई के साधन और पर्यटन विकास की रफ्तार के बीच यहां शिक्षा के साधन भी बेहतर हुए। वर्ष 1974 से पूर्व जनपद को जनपद को सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शुमार किया जाता था। हाईस्कूल-इंटरमीडिएट के लिए सिर्फ गिने चुने ही कॉलेज थे। उच्च शिक्षा के लिए यहां पर सिर्फ दो महाविद्यालय संचालित होते थे। शिक्षा का स्तर ग्रामीण क्षेत्रों में काफी खराब था। यहां रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चे या तो स्कूल ही नही जाते थे या फिर पांच या आठवीं तक ही पढ़ते थे।
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बालिका शिक्षा का कमोवेश यही हाल था। बालिकाएं कक्षा पांच या आठ तक ही पढ़ाई करती थी। जिससे जनपद में साक्षरता भी काफी कम थी और साक्षरता दर 30-35 प्रतिशत थी। एक मार्च वर्ष 1974 में ललितपुर जिला बना। जिसके बाद यहां विकास की योजनाओं ने तेजी पकड़ी। साथ साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांति आई। अब यहां पर 8 राजकीय इंटर, 31 राजकीय हाईस्कूल, 11 अशासकीय सहायता प्राप्त और 76 वित्त विहीन विद्यालय है। साथ साथ जिले में 30 से अधिक निजी महाविद्यालय जिसमें पैरा मेडिकल कॉलेज, आईटीआई, कृषि महाविद्यालय, लॉ कॉलेज, राजकीय पॉलीटेक्नीक कॉलेज, बीएड कॉलेज, बीटीसी कॉलेज संचालित हो रहे हैं। संवादन
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