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बदहाल है समग्र ग्राम दिगवार की हालत
ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2016 01:15 AM IST
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सिलावन (ललितपुर)। विकास की आधारभूत सुविधाओं से वंचित राजस्व ग्रामों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012 में डा. राममनोहर लोहिया समग्र विकास योजना लागू की थी, लेकिन समग्र ग्रामों के विकास पर पानी की तरह पैसा बहाने के बाद भी हालातों में ज्यादा सुधार नहीं आया है। स्थिति यह है कि संतृप्त हो जाने के बाद भी गलियां कच्ची हैं।
विद्यालय तक पहुंचने के रास्ते उबड़-खाबड़ हैं, कहीं उपस्वास्थ्य केंद्र बदहाल है तो कहीं पंचायत भवन, किसी का शौचालय अधूरा है तो कोई पात्र होने के बाद भी लाभार्थीपरक योजनाओं से वंचित है। इसकी बानगी ब्लाक महरौनी के अंतर्गत समग्र ग्राम कुरौरा और दिगवार हैं।
सरकार ने लोहिया समग्र गांवों में विकास की गंगा बहाने के लिए 21 विभागों को ग्रामों में संपर्क मार्ग, विद्युतीकरण, आंतरिक नालियों व गलियों का निर्माण, स्वच्छ शौचालयों का निर्माण, आवासहीनों को आवास उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य उपकेंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र की स्थापना के अलावा मार्ग प्रकाश व्यवस्था, नि:शुल्क बोरिंग, कुम्हारी कलां हेतु भूमि का आवंटन, छात्रवृत्तियां उपलब्ध कराने, लाभार्थीपरक योजनाओं आदि को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।
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वित्तीय वर्ष 2012-13 में विकासखंड महरौनी अंतर्गत कुरौरा गांव को योजना में शामिल किया गया। इससे ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यहां रहने वाले लोग बिजली, सड़क, नाली, शौचालय और आवासीय योजना की उम्मीद लगा बैठे।
लेकिन, धीरे-धीरे समय गुजरता गया और आशानुरूप विकास कार्य नहीं कराए गए। अभी भी यहां के ग्रामीण समस्याओं से जूझ रहे हैं। यहां परम कुशवाहा के मकान से पंचायत भवन तक 200 मीटर और पूर्व व प्राथमिक विद्यालय और उपस्वास्थ्य केंद्र तक जाने का 400 मीटर तक का रास्ता ऊबड़-खाबड़ और कच्चा है। पंचायत भवन खस्ताहाल हो गया। उपस्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन होने से पूर्व की क्षतिग्रस्त हो गया है।
तत्कालीन डीएम ने 10 दिनों में इसे दुरुस्त कर शुरू कराए जाने के निर्देश दिए थे, लेकिन स्थिति आज भी जस की तस है। किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीें दिया। यहां बिजली के खंभे तो लगा दिए गए, लेकिन इस आज तक करंट नहीं दौड़ा है। इस कारण ग्रामीण परेशान हैं।
मानकुंवर पत्नी छोटे राजा का शौचालय आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। कई बार अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दयाराम और नन्नु राजा के घर के सामने को हैंडपंप महीनों से खराब पड़ा है। साथ ही पीने के पानी के लिए कई हैंडपंपों की आवश्यकता है, जिसे संबंधित विभाग ने आज तक नहीं कराया है।
सौर ऊर्जा की लाइट खराब होने से ग्रामीणों को इसका लाभ भी नहीं मिल रहा है।
इसी विकासखंड के वर्ष 2014-15 में ग्राम दिगवार का चयन लोहिया समग्र ग्राम योजना में किया गया। यहां आज भी पात्र महिलाएं समाजवादी पेंशन का इंतजार कर रही हैं। साथ ही दर्जनों आवासहीन परिवार आवास का इंतजार कर रहे हैं। गांव में ड्रेनेज व्यवस्था को नजर अंदाज कर दिया गया। कहीं भी नाली का निर्माण नहीं कराए जाने से घरों व हैंडपंपों का गंदा पानी रास्ते में जमा रहता है।
इतना ही नहीं गांव के मुख्यमार्ग हनुमान मंदिर से लेकर 450 मीटर रास्ते को कच्चा छोड़ दिया गया, जिसके कारण ग्रामीणों को अपने - अपने आवास तक पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गांव का भीतरी इलाका आज भी नाली और पक्के रास्ते का इंतजार कर रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव के बाहरी इलाकों में ही विकास कार्य हुआ है, वह भी आधा-अधूरा।
गांव में उपस्वास्थ केंद्र का निर्माण नहीं कराया गया है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए मुख्यालय तक जाना पड़ता है। सच्चाई यह है कि जिस उद्देश्य के साथ योजना संचालित की गई थी, उस पर वह खरी नहीं उतरी है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है।
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विद्यालय तक पहुंचने के रास्ते उबड़-खाबड़ हैं, कहीं उपस्वास्थ्य केंद्र बदहाल है तो कहीं पंचायत भवन, किसी का शौचालय अधूरा है तो कोई पात्र होने के बाद भी लाभार्थीपरक योजनाओं से वंचित है। इसकी बानगी ब्लाक महरौनी के अंतर्गत समग्र ग्राम कुरौरा और दिगवार हैं।
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सरकार ने लोहिया समग्र गांवों में विकास की गंगा बहाने के लिए 21 विभागों को ग्रामों में संपर्क मार्ग, विद्युतीकरण, आंतरिक नालियों व गलियों का निर्माण, स्वच्छ शौचालयों का निर्माण, आवासहीनों को आवास उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य उपकेंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र की स्थापना के अलावा मार्ग प्रकाश व्यवस्था, नि:शुल्क बोरिंग, कुम्हारी कलां हेतु भूमि का आवंटन, छात्रवृत्तियां उपलब्ध कराने, लाभार्थीपरक योजनाओं आदि को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।
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वित्तीय वर्ष 2012-13 में विकासखंड महरौनी अंतर्गत कुरौरा गांव को योजना में शामिल किया गया। इससे ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यहां रहने वाले लोग बिजली, सड़क, नाली, शौचालय और आवासीय योजना की उम्मीद लगा बैठे।
लेकिन, धीरे-धीरे समय गुजरता गया और आशानुरूप विकास कार्य नहीं कराए गए। अभी भी यहां के ग्रामीण समस्याओं से जूझ रहे हैं। यहां परम कुशवाहा के मकान से पंचायत भवन तक 200 मीटर और पूर्व व प्राथमिक विद्यालय और उपस्वास्थ्य केंद्र तक जाने का 400 मीटर तक का रास्ता ऊबड़-खाबड़ और कच्चा है। पंचायत भवन खस्ताहाल हो गया। उपस्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन होने से पूर्व की क्षतिग्रस्त हो गया है।
तत्कालीन डीएम ने 10 दिनों में इसे दुरुस्त कर शुरू कराए जाने के निर्देश दिए थे, लेकिन स्थिति आज भी जस की तस है। किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीें दिया। यहां बिजली के खंभे तो लगा दिए गए, लेकिन इस आज तक करंट नहीं दौड़ा है। इस कारण ग्रामीण परेशान हैं।
मानकुंवर पत्नी छोटे राजा का शौचालय आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। कई बार अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दयाराम और नन्नु राजा के घर के सामने को हैंडपंप महीनों से खराब पड़ा है। साथ ही पीने के पानी के लिए कई हैंडपंपों की आवश्यकता है, जिसे संबंधित विभाग ने आज तक नहीं कराया है।
सौर ऊर्जा की लाइट खराब होने से ग्रामीणों को इसका लाभ भी नहीं मिल रहा है।
इसी विकासखंड के वर्ष 2014-15 में ग्राम दिगवार का चयन लोहिया समग्र ग्राम योजना में किया गया। यहां आज भी पात्र महिलाएं समाजवादी पेंशन का इंतजार कर रही हैं। साथ ही दर्जनों आवासहीन परिवार आवास का इंतजार कर रहे हैं। गांव में ड्रेनेज व्यवस्था को नजर अंदाज कर दिया गया। कहीं भी नाली का निर्माण नहीं कराए जाने से घरों व हैंडपंपों का गंदा पानी रास्ते में जमा रहता है।
इतना ही नहीं गांव के मुख्यमार्ग हनुमान मंदिर से लेकर 450 मीटर रास्ते को कच्चा छोड़ दिया गया, जिसके कारण ग्रामीणों को अपने - अपने आवास तक पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गांव का भीतरी इलाका आज भी नाली और पक्के रास्ते का इंतजार कर रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव के बाहरी इलाकों में ही विकास कार्य हुआ है, वह भी आधा-अधूरा।
गांव में उपस्वास्थ केंद्र का निर्माण नहीं कराया गया है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए मुख्यालय तक जाना पड़ता है। सच्चाई यह है कि जिस उद्देश्य के साथ योजना संचालित की गई थी, उस पर वह खरी नहीं उतरी है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है।