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गर्मी शुरू, अमृत प्रोजेक्ट अभी भी अधर में

Wed, 05 Apr 2017 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 05 Apr 2017 12:37 AM IST
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Summer start, amrat project not to be started
पेयजल संकट - फोटो : demo
शहर की पेयजल सुधार की कार्ययोजना और बजट होने के बाद भी शहरवासियों को इस भीषण गर्मी में भी पेयजल की समस्या से जूझना पड़ेगा। अमृत योजना के तहत शहर के शतप्रतिशत घरों में नलों के कनेक्शन कराए जाने हैं। इसके लिए शासन ने बजट की प्रथम किश्त भी जारी कर दी है। इसके बावजूद अब तक कार्ययोजना धरातल पर शुरू नहीं हो पाई है।      
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वर्तमान में शहर के आधे से अधिक आबादी वाले क्षेत्र में पानी की पाइप लाइन नहीं है। वर्ष 2009 में नगर पालिका द्वारा कराए सर्वे के आधार पर नगर सीमा में कुल 23 हजार 644 घर विभाग में दर्ज है। इन घरों के सापेक्ष वर्तमान में मात्र 10 हजार 115 घरों में ही नलों के कनेक्शन है। उक्त आंकड़ों के अनुसार नगर सीमा में 13 हजार से अधिक घर ऐसे हैं जहां पर नलों के कनेक्शन की सुविधा नहीं होने के कारण इन घरों में जल संस्थान का स्वच्छ पेयजल नहीं पहुंच रहा है। शहर के शत प्रतिशत घरों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए जिन मुहल्लों व क्षेत्रों में पाइप लाइन की सुविधा नहीं है, ऐसी जगहों पर भारत सरकार द्वारा अटल मिशन फॉर रिजूविनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) योजना के तहत शासन द्वारा पाइप लाइन बिछवाई जा रही है और जिन घरों में नलों के कनेक्शन नहीं है, वहां पर निशुल्क कनेक्शन कराए जा रहे हैं। इस योजना के तहत वर्ष 2015 में नगर पालिका व जल निगम ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। इसके क्रम में बीते वर्ष शासन ने कार्ययोजना को मंजूरी देते हुए वित्तीय स्वीकृति भी दे दी थी। अब जल निगम ने छह माह पूर्व अक्तूबर माह में इस कार्य का टेंडर व अन्य विभागीय औपचारिकताएं पूर्ण कर ली हैं और दो-तीन माह पूर्व शासन ने इसके लिए 39.61 लाख रुपये प्रथम किश्त के रूप में उपलब्ध भी करा दिया हैं। इसे शहरवासियों की बदकिस्मती ही कहेंगे कि अब तक जल निगम द्वारा कार्ययोजना को धरातल पर नहीं उतारा गया है। यदि हाल में ही यह योजना धरातल पर शुरू भी हो जाती है तो कार्ययोजना को पूर्ण होने में कम से कम एक वर्ष का समय लग जाएगा। इससे यह तय है कि कार्ययोजना व बजट उपलब्ध होने के बाद भी शहर की आधी आबादी को इस वर्ष भी भीषण गर्मी में पेयजल का संकट झेलना पड़ेगा।      
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जल संस्थान कर रहा लेटलतीफी      
शासन व नगर पालिका द्वारा बजट तो उपलब्ध है और विभागीय औपचारिकताएं भी पूर्ण कर ली गई है, लेकिन जल संस्थान विभाग के सूचना नहीं मिल पाने के कारण लेटलतीफी हो रही है। जल संस्थान को तीन बार पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक घरेलू कनेक्शनों की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। सूचना उपलब्ध होते ही अगले दिन से काम शुरू कर दिया जाएगा।      
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- दिनेश कुमार      
सहायक अभियंता, निर्माण ईकाई जल निगम ललितपुर।      
     
हैंडपंप भी छोड़ देते हैं सहारा
शहर का पारा 43 डिग्री से ऊपर पहुंच गया है। इस भीषण गर्मी से पठारी मैदानों पर बसे इलाकों का भू-जल स्तार अभी नीचे जाने लगा है। आने वाले कुछ ही दिनों में इन इलाकों में लगे हैंडपंप सूखने की कगार पर आ जाएंगे और पानी के लिए लोगों का संघर्ष शुरू हो जाएगा। इसकी मुख्य वजह यह है कि शहर के तो मुहल्लें व बस्तियां पठारी मैदानों पर बसे हैं जैसे पठापुरा, खिरकापुरा, नारायणपुरा, रामनगर, नेहरू नगर क्षेत्र, सिद्धनपुरा, चौकाबाग, गांधीनगर, चांदमारी, वसुंधरा कालोनी, पिसनारीबाग आदि मुहल्लों में पाइप लाइन नहीं है और यहां पर जलापूर्ति का हैंडपंप ही एक मात्र सहारा हैं। वर्तमान हालातों को देखकर ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में तापमान और चढ़ेगा व गर्मी भी भीषण पड़ेगी, यदि समय रहते कोई समाधान नहीं निकाला गया तो भारी संकट हो सकता है। बीते एक सप्ताह से नेहरू नगर के बाशिंदे हर रोज जिला प्रशासन व जल संस्थान को पानी की समस्या के समाधान के लिए ज्ञापन सौंप रहे हैं, यहां अभी से हैंडपंपों से पानी निकलना बंद होने लगा है।
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