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Lalitpur News: दो माह से बिजली नहीं, बस्ती में लगे तीनों हैंडपंप खराब
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ललितपुर। ब्लॉक बिरधा के ग्राम कल्यानपुरा के मजरा नई बस्ती में पिछले दो माह से बिजली नहीं आ रही है। इसके साथ ही बस्ती में लगे तीनों हैंडपंप भी खराब हैं, जिससे ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ गई हैं। अंधेरे में रहने के कारण ग्रामीणों को जहरीले कीड़ों के काटने का डर सता रहा है। इन समस्याओं से त्रस्त ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर बिजली और हैंडपंपों को ठीक कराने की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम कल्यानपुरा के मजरा नई बस्ती में दो माह से बिजली की आपूर्ति ठप है। इस संबंध में बिजली विभाग में शिकायत की गई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त, बस्ती में लगे तीनों हैंडपंप भी खराब हैं, जिससे पीने के पानी की गंभीर किल्लत हो गई है। मुख्यमंत्री हेल्पडेस्क पर शिकायत के बावजूद हैंडपंपों की मरम्मत नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उनके यहां पानी के अन्य साधन या सौर ऊर्जा की व्यवस्था नहीं है और मिट्टी के तेल का वितरण भी बंद हो गया है। इस कारण उन्हें अंधेरे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। शाम होते ही ग्रामीण घरों में सिमट जाते हैं, क्योंकि बरसात के मौसम में जहरीले कीड़ों के काटने का भय बना रहता है। रात में अंधेरे के कारण बच्चों को जहरीले कीड़ों ने काट भी लिया है, जिससे ग्रामीण अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
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ग्रामीणों द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम कल्यानपुरा के मजरा नई बस्ती में दो माह से बिजली की आपूर्ति ठप है। इस संबंध में बिजली विभाग में शिकायत की गई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त, बस्ती में लगे तीनों हैंडपंप भी खराब हैं, जिससे पीने के पानी की गंभीर किल्लत हो गई है। मुख्यमंत्री हेल्पडेस्क पर शिकायत के बावजूद हैंडपंपों की मरम्मत नहीं की गई है।
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ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उनके यहां पानी के अन्य साधन या सौर ऊर्जा की व्यवस्था नहीं है और मिट्टी के तेल का वितरण भी बंद हो गया है। इस कारण उन्हें अंधेरे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। शाम होते ही ग्रामीण घरों में सिमट जाते हैं, क्योंकि बरसात के मौसम में जहरीले कीड़ों के काटने का भय बना रहता है। रात में अंधेरे के कारण बच्चों को जहरीले कीड़ों ने काट भी लिया है, जिससे ग्रामीण अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
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