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मुस्कुराती आखिरी सेल्फी: धार्मिक यात्रा बनी अंतिम सफर, अयोध्या से लौटते समय हादसे में आठ श्रद्धालुओं की मौत

Tue, 05 May 2026 10:34 AM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर Published by: दीपक महाजन Updated Tue, 05 May 2026 10:34 AM IST
सार

अयोध्या से लौट रहे महरौनी के आठ श्रद्धालुओं की सोमवार सुबह सड़क हादसे में मौत हो गई। सरयू नदी के घाट पर ली गई उनकी मुस्कुराती तस्वीर अब परिजनों के लिए आखिरी याद बन गई है।

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Smiling last selfie: Religious pilgrimage turns into final journey
हादसे से पहले अयोध्या में सरयू तट पर सेल्फी लेते हुए श्रद्धालु। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अयोध्या की धार्मिक यात्रा से लौट रहे महरौनी के आठ श्रद्धालुओं की सोमवार सुबह कालपी क्षेत्र के जोल्हूपुर मोड़ पर सड़क हादसे में मौत हो गई। सरयू नदी के घाट पर ली गई उनकी मुस्कुराती तस्वीर अब परिजनों के लिए आखिरी याद बन गई है, जिसने पूरे कस्बे को गहरे शोक में डुबो दिया।
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महरौनी के टीकमगढ़ रोड स्थित खचवाचपुरा मोहल्ले के रहने वाले सभी लोग 30 अप्रैल को अयोध्या गए थे। वहां उन्होंने सरयू नदी में खंडित मूर्तियों का विसर्जन किया और हनुमानगढ़ी व रामलला के दर्शन किए। इसी दौरान उन्होंने सरयू घाट पर मुस्कुराते हुए सेल्फी ली। शायद इस उम्मीद में कि यह पल जीवनभर की याद बनेगा, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी जिंदगी की आखिरी तस्वीर बन जाएगी।
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इनकी हो चुकी मौत
रविवार रात करीब आठ बजे सभी लोग टवेरा कार से महरौनी के लिए चले। सोमवार सुबह करीब छह बजे कालपी क्षेत्र के जोल्हूपुर मोड़ के पास उनकी कार हादसे का शिकार हो गई। इस दर्दनाक हादसे में शशिकांत तिवारी (30), कृष्णकांत नायक (38), स्वामी प्रसाद तिवारी (58), मनोज भोड़ेले (36), देशराज नामदेव (36), उमेश तिवारी (25), दीपक तिवारी (30) और बृजभूषण तिवारी (45) की मौत हो गई।
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Smiling last selfie: Religious pilgrimage turns into final journey
मृतकों की फाइल फोटो। - फोटो : सोशल मीडिया
मोहल्ले में पसरा सन्नाटा, हर घर में मातम
एक ही मोहल्ले के आठ लोगों की मौत की खबर ने पूरे महरौनी को झकझोर दिया। सोमवार सुबह जैसे ही सूचना पहुंची, परिजनों में कोहराम मच गया। कई परिवारों के चिराग एक साथ बुझ गए। मोहल्ले की गलियों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा और घरों से सिर्फ चीख-पुकार और रोने की आवाजें सुनाई देती रहीं। परिजन बदहवास हालत में मौके की ओर रवाना हो गए। पूरे कस्बे में यह घटना चर्चा का विषय बनी रही और हर आंख नम नजर आई।

इनके परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
शशिकांत तिवारी : बेकरी का संचालन करते थे, एक पुत्र है।
कृष्णकांत नायक : शिक्षा विभाग में शिक्षक थे और अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। परिवार सहित ससुराल पक्ष की जिम्मेदारी भी उन पर थी और उसकी दो पुत्रियां हैं।
स्वामी प्रसाद तिवारी : निजी विद्यालय में शिक्षक थे और उनके दो पुत्र हैं।
मनोज भोड़ेले : माता-पिता की इकलौती संतान और भागवत आचार्य के साथ शास्त्री थे। उनकी दो पुत्री व एक पुत्र है।
देशराज नामदेव : इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे और इलेक्ट्रिकल्स की दुकान का संचालित करते थे। उनकी दो पुत्रियां हैं।
उमेश तिवारी : परिवार में सबसे छोटा था और अविवाहित था।
बृजभूषण तिवारी : किसान थे। दो बेटियां हैं, जिनमें वैष्णवी तिवारी ने इसी वर्ष इंटरमीडिएट की परीक्षा में टॉप-10 में स्थान पाया।
दीपक तिवारी : अविवाहित थे और निजी कार्य करते थे।


धार्मिक यात्रा बनी अंतिम सफर
महरौनी के राम जानकी मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पुरानी खंडित मूर्तियों को सरयू नदी में विसर्जित करने के लिए सभी श्रद्धालु अयोध्या गए थे। पूजा-अर्चना और दर्शन के बाद लौटते समय यह यात्रा उनके जीवन का अंतिम सफर बन गई।
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