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मिल के लिए दुकानों व गोदामों का बदला स्वरूप

Sun, 07 Aug 2016 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 07 Aug 2016 01:13 AM IST
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 Shops and warehouses to find nature 's revenge
dal, lalitpur news - फोटो : demo
ललितपुर। गल्ला मंडी में छन्ना सेंटर की आड़ में आधा दर्जन से अधिक दाल मिलें संचालित हो रही हैं। दाल मिलों के लिए दुकानों व गोदामों का स्वरूप भी बदल दिया जा रहा है, जबकि आवंटित दुकानों में दाल मिल संचालन व स्वरूप बदलना अवैधानिक है। कृषि उप निदेशक ने मंडी समिति से दाल मिलों के संचालन की  रिपोर्ट तलब की है। 
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शहर की नवीन गल्ला मंडी प्रदेश में अपनी व्यापकता और आवक के लिए अव्वल नंबर में शुमार है। यहां करीब 395 दुकानें संचालित  हो रही हैं। इसके साथ ही यहां जिंस रखने के लिए व्यापारियों के तीन दर्जन  गोदा व नौ टीन शेड युक्त चबूतरे भी स्थापित हैं। मंडी में हर साल हजारों क्विंटल जिंस की आवक होती है। आम दिनों में ही करीब दस से बारह हजार क्विंटल तक जिंस की आवक हो जाती है। गल्ला मंडी समिति द्वारा यहां कच्चे आढ़तियों  के लिए दुकानें आवंटित की गई हैं, जबकि पक्के आढ़तियों को दुकानों के साथ  गोदाम भी आवंटित हैं। 
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गल्ला मंडी में करीब दस व्यापारियों  द्वारा छन्ना सेंटर की आड़ में दाल मिलें संचालित की जा रही हैं, जबकि  नियमत: गल्ला मंडी में दाल मिल संचालित नहीं हो सकती हैं। वैसे तो जिंस की छनाई के सेंटर भी संचालित नहीं किए जा सकते हैं। इसके लिए मंडी समिति  से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। लेकिन गल्ला मंडी में मंडी प्रशासन की नाक  के नीचे धड़ल्ले से दाल मिलें संचालित की जा रही हैं। इससे मंडी समिति को राजस्व की  हानि हो रही है।
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जैसे यदि कोई व्यापारी चंदेरा दाल मिल से दाल ले जाता  है, तो उसे गेट पास बनवाना होता है और उस दाल को अन्य स्थानों या जनपद में ले जाने पर निर्धारित मंडी शुल्क अदा करना होता है। जबकि मंडी में ही दाल मिल संचालित होने से उसे गेट पास बनवाने की जरुरत नहीं होती है, जिससे यह  जिंस 9-आर में भी नहीं चढ़ती है। दाल पर एक बार ही मंडी  शुल्क देकर आसानी से राजस्व बचा लिया जाता है। 
हालांकि, मंडी प्रशासन का दावा है कि गल्ला मंडी में कोई दाल मिल नहीं है, सिर्फ जिंस को साफ करने के लिए  छन्ना लगाया गया है। यदि आलाधिकारियों द्वारा मौके पर जाकर निरीक्षण  किया जाए, तो सच्चाई कुछ और ही निकलेगी। मिलों के लिए व्यापारियों द्वारा  बड़े-बड़े साइलेंट जेनरेटर भी स्थापित कराए गए हैं और मशीनों व बड़ी  चक्कियों के माध्यम से जिंस को दाल में बदलकर व्यापार किया जा रहा है। रिकार्ड में गल्ला मंडी में एक भी दाल मील पंजीकृत नहीं है।  

विद्युत संयोजन में भी बड़ा खेल
विद्युत विभाग द्वारा गल्ला मंडी के लिए सौ किलोवाट का एक ही विद्युत कनेक्शन आवंटित किया गया है। इस पर मंडी समिति द्वारा हर दुकानदार से तीन सौ रुपए लेकर विद्युत बिल का भुगतान किया जाता है। इसके साथ ही दाल मिल के व्यापारी को भी अन्य दुकानदारों की तरह मात्र तीन सौ रुपए का ही भुगतान  करना होता है। जबकि चंदेरा स्थित दाल मिलों के लिए विद्युत विभाग द्वारा  औद्योगिक संयोजन देकर कई गुना अधिक करीब तीस हजार रुपए माह तक का  भुगतान लिया जाता है। ऐसे में गल्ला मंडी में संचालित हो रही दाल मिलों द्वारा भारी विद्युत उपभोग करके हर माह लाखों रुपए की चपत लगाई जा रही है। 

किसानों को नहीं दी जाती 6-आर की रसीद
गल्ला मंडी में हर रोज हजारों क्विंटल जिंस किसान लेकर आढ़तियों के पास  पहुंचते हैं। जिस पर आढ़तियों को नियमानुसार जिंस बेचने वाले हर किसान को  6-आर की रसीद देनी होती है। 6-आर में जिंस उत्पादन की किस्म, तौल की  मात्रा, जिंस की दर, जिंस का दर के हिसाब से कुल मूल्य, विक्रेता को भुगतान  की गई शुद्ध राशि, आढ़तियों द्वारा मंडी समिति को भुगतान की गई धनराशि का  पूरा ब्यौरा दिया होता है। जिसके आधार पर मंडी समिति के आढ़तियों को मंडी  शुल्क व विकास सेस अदा करना होता है। 
लेकिन आढ़तियों द्वारा 6-आर की  रसीद अधिकांशत:किसानों को मुहैया नहीं कराई जाती है, जिससे किसानों से  खरीदी गई जिंस का मंडी शुल्क भी आढ़तियों को नहीं चुकाना होता है। इससे  मंडी समिति को भारी राजस्व की हानि होती है और किसानों को भी 6-आर नहीं  मिलने से वे कई लाभांवित योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। 

6-आर के अभाव में इन योजनाओं से वंचित रहते किसान
मंडी में किसानों द्वारा जिंस बेचने पर मंडी आवक किसान उपहार योजना लागू की गई है, जिसमें किसान अपनी फसल व्यापारी को बेचकर 6-आर प्राप्त करता है। लिखे हुए मूल्य के प्रत्येक पांच हजार पर एक कूपन मंडी समिति कार्यालय से प्राप्त होता है, जो उसे निशुल्क दिया जाता है। लेकिन इसके लिए उसे किसान बही दिखानी होती है। मासिक, त्रैमासिक, एवं छमाही बंपर ड्रा मंडलायुक्त द्वारा निकाला जाता है। मासिक ड्रा में दस किसानों को मोबाइल फोन, त्रैमासिक ड्रा में प्रथम, द्वितीय व तृतीय उपहार में सीड ड्रिल, स्प्रेयर और धातु निर्मित बखारी दी जाती है। छमाही ड्रा में प्रथम उपहार में ट्रैक्टर, द्वितीय में राइस ट्रांस्प्लांटर व तृतीय उपहार में पावर ट्रिलर दिया जाता है।   

गल्ला  मंडी में दाल मिलें संचालन के संबंध में मंडी सचिव से सोमवार तक  रिपोर्ट मांगी गई है। यदि मिलें अवैध रुप से संचालन होती पाई जाती हैं तो नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। 

रविशंकर गुप्ता, उपनिदेशक गल्ला मंडी समिति, झांसी। 

गल्ला मंडी में जिंस की सफाई के लिए सिर्फ कुछ स्थानों पर छन्ना लगाए गए हैं,  यहां दाल मिलों का संचालन नहीं हो रहा है। यदि कोई दाल मिल के लिए  अनुमति चाहे तो संचालित की जा सकती है।
अनिल कुमार यादव, मंडी सचिव, ललितपुर।
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