{"_id":"604a69f08ebc3e5916635195","slug":"shantinath-statue-565-year-old-lalitpur-news-jhs190631533","type":"story","status":"publish","title_hn":"धसान नदी में 565 वर्ष पुरानी तीर्थंकर शांतिनाथ की प्रतिमा मिली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धसान नदी में 565 वर्ष पुरानी तीर्थंकर शांतिनाथ की प्रतिमा मिली
विज्ञापन
गिरार में नदी से प्राप्त 565 वर्ष प्राचीन जैन मूर्ति।
- फोटो : LALITPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। विकासखंड मड़ावरा में धसान नदी से 565 वर्ष पुरानी तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा मिली है। पास में ही गिरार गिरि में श्री आदिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र में इस प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।
गिरार गिरि में राजकुमार चरवाहा प्रतिदिन बकरी चराने के लिए धसान नदी के किनारे जाता था। वह बकरियां चरा रहा था कि इसी दौरान उसे नदी में कुछ दिखाई दिया। उसने निकाला तो जैन प्रतिमा मिली। अभिषेक जैन और प्रदीप जैन ने बताया कि चरवाहे ने समाज के प्रमुखजन और गिरार कमेटी के पदाधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी। इसके बाद उसने गिरार गिरि कमेटी वालों को प्रतिमा को सौंप दिया। गिरार थाने में भी इसकी सूचना दर्ज करा दी गई है।
प्रतिमा पीतल की है और लगभग 9 इंच लंबी है। प्रतिमा के पीछे एक प्रशस्ति भी अंकित है, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि यह शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा है। प्रतिमा दर्शन हेतु मंदिर में रखी गई है। इस दौरान त्रिलोक जैन, आशीष जैन, अजित जैन स्टील मड़ावरा, मुकेश जैन, चक्रेश जैन, गजेंद्र जैन, दीपचंद्र जैन आदि प्रमुख लोग उपस्थित रहे। गिरार गिरि क्षेत्र के मीडिया प्रभारी डॉ. सुनील संचय ने बताया कि प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालु आ रहे हैं।
विज्ञापन
-----
श्रद्धालु दर्शन को आ रहे
शांति नाथ भगवान की प्रतिमा धसान नदी से प्राप्त होने की सूचना प्राप्त होने पर अतिशय क्षेत्र गिरार गिरि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया पर अनेक विद्वानों ने प्रतिमा की प्राचीनता पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इनमें पुरातत्व प्रेमी शैलेंद्र जैन लखनऊ, वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन जयपुर, प्रद्युम्न शास्त्री जयपुर, नीरज शास्त्री बरायठा, सचिन जैन बड़ौत, संजय जैन दिल्ली, अजित जैन, डॉ. महेंद्र मनुज इंदौर, गौरव जैन, राजस्थान, अखिलेश जैन आदि प्रमुख हैं। शिलालेख विशेषज्ञ नवनीत मुरैना का कहना है कि प्रतिमा पर संवत 1513, शांतिनाथ बिंब अंकित है।
------
प्रतिमा के पीछे अंकित है कि प्रतिमा जैन तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान की है। इस पर उल्लिखित लिपि 14-15 शताब्दी की है। पुरातत्व की दृष्टि से मूर्ति महत्वपूर्ण है। इस पर अनुसंधान की आवश्यकता है।
- प्रोफेसर भागचंद्र भास्कर नागपुर (जैन मूर्ति विज्ञान व पुरातत्व के जानकार)
-------------
- ऐतिहासिक दृष्टि से प्रतिमा को संग्रहालय में संग्रहित करना चाहिए, प्रतिमा के अंगोपांग सुव्यवस्थित न होने से पूजनीय नहीं है।
- ब्रह्मचारी जय निशांत भैया (जैन प्रतिमाओं के प्रतिष्ठाचार्य एवं निर्देशक प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़)
विज्ञापन
गिरार गिरि में राजकुमार चरवाहा प्रतिदिन बकरी चराने के लिए धसान नदी के किनारे जाता था। वह बकरियां चरा रहा था कि इसी दौरान उसे नदी में कुछ दिखाई दिया। उसने निकाला तो जैन प्रतिमा मिली। अभिषेक जैन और प्रदीप जैन ने बताया कि चरवाहे ने समाज के प्रमुखजन और गिरार कमेटी के पदाधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी। इसके बाद उसने गिरार गिरि कमेटी वालों को प्रतिमा को सौंप दिया। गिरार थाने में भी इसकी सूचना दर्ज करा दी गई है।
विज्ञापन
प्रतिमा पीतल की है और लगभग 9 इंच लंबी है। प्रतिमा के पीछे एक प्रशस्ति भी अंकित है, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि यह शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा है। प्रतिमा दर्शन हेतु मंदिर में रखी गई है। इस दौरान त्रिलोक जैन, आशीष जैन, अजित जैन स्टील मड़ावरा, मुकेश जैन, चक्रेश जैन, गजेंद्र जैन, दीपचंद्र जैन आदि प्रमुख लोग उपस्थित रहे। गिरार गिरि क्षेत्र के मीडिया प्रभारी डॉ. सुनील संचय ने बताया कि प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालु आ रहे हैं।
विज्ञापन
-----
श्रद्धालु दर्शन को आ रहे
शांति नाथ भगवान की प्रतिमा धसान नदी से प्राप्त होने की सूचना प्राप्त होने पर अतिशय क्षेत्र गिरार गिरि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया पर अनेक विद्वानों ने प्रतिमा की प्राचीनता पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इनमें पुरातत्व प्रेमी शैलेंद्र जैन लखनऊ, वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन जयपुर, प्रद्युम्न शास्त्री जयपुर, नीरज शास्त्री बरायठा, सचिन जैन बड़ौत, संजय जैन दिल्ली, अजित जैन, डॉ. महेंद्र मनुज इंदौर, गौरव जैन, राजस्थान, अखिलेश जैन आदि प्रमुख हैं। शिलालेख विशेषज्ञ नवनीत मुरैना का कहना है कि प्रतिमा पर संवत 1513, शांतिनाथ बिंब अंकित है।
------
प्रतिमा के पीछे अंकित है कि प्रतिमा जैन तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान की है। इस पर उल्लिखित लिपि 14-15 शताब्दी की है। पुरातत्व की दृष्टि से मूर्ति महत्वपूर्ण है। इस पर अनुसंधान की आवश्यकता है।
- प्रोफेसर भागचंद्र भास्कर नागपुर (जैन मूर्ति विज्ञान व पुरातत्व के जानकार)
-------------
- ऐतिहासिक दृष्टि से प्रतिमा को संग्रहालय में संग्रहित करना चाहिए, प्रतिमा के अंगोपांग सुव्यवस्थित न होने से पूजनीय नहीं है।
- ब्रह्मचारी जय निशांत भैया (जैन प्रतिमाओं के प्रतिष्ठाचार्य एवं निर्देशक प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़)