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अस्पताल के जर्जर भवन बयां कर रहे स्वास्थ्य सेवाओं का हाल
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डोंगराखुर्द /ललितपुर। ब्लॉक मड़ावरा के अंतर्गत ग्राम डोंगराखुर्द स्थित न्यू पीएचसी का जर्जर भवन अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बयां कर रहा है। यहां पर चिकित्सक का अभाव है, तो फार्मासिस्ट भी अवकाश पर चल रहे हैं। अस्पताल स्वीपर के सहारे चल रहा है। दोनों हैंडपंप खराब पड़े हैं। दो माह से बिजली नहीं आ रही है। इलाज को आने वाले मरीजों को उपचार की जगह मायूसी हाथ लग रही है।
शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में उपचार की सुविधा के लिए न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की गई है। जिनमें करोड़ों रुपये की लागत से भवनों का निर्माण कराया गया है, इन अस्पतालों की हालत को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने मंत्री और विधायक से लेकर पार्टी पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। जिसमें सभी को एक-एक अस्पताल गोद लेने का फरमान जारी किया, लेकिन सरकारी अस्पतालों की बद इंतजामी में सुधार नहीं हो पा रहा है।
ऐसी स्थिति ब्लॉक मड़ावरा के अंतर्गत ग्राम डोंगराखुर्द स्थित न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की है। यहां पर अस्पताल पहुंचने के लिए कच्चे मार्ग से होकर गुजरना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में अस्पताल पहुंचने में दिक्कत आती है। बिजली की समस्या है। इसके अलावा प्रमुख समस्या चिकित्सक की तैनाती हुई, लेकिन जिला अस्पताल अटैच होने से अस्पताल खाली हो गया है। वर्तमान में फार्मासिस्ट अवकाश पर चल रहे हैं। ऐसे में अस्पताल स्वीपर के सहारे है। यहां पर बीमरियों से परेशान मरीज इलाज की आस में आते हैं लेकिन चिकित्सक के अभाव में मायूस होकर लौट रहे हैं। लगभग 12 गांव के लोग निजी क्लीनिकों के सहारे हैं।
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दोनों हैंडपंप पड़े हैं खराब, जर्जर हालत में है उपकेंद्र का भवन
अस्पताल में दो हैंडपंप हैं, लेकिन वर्तमान में एक हैंडपंप खराब पड़ा है। इसे एक वर्ष बीत गया पर, अब तक सुधार नहीं हो सका है। दूसरा हैंडपंप कई माह से पानी कम दे रहा है। इसको चलाते-चलाते ही लोग थक जाते है। अस्पताल में पानी की सुविधा को एक टंकी भी रखवाई गई हैै, जो अभी शोपीस साबित हो रही है। अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की जांच व टीकाकरण की सुविधा के लिए उपकेंद्र का निर्माण किया गया है। मरम्मत के अभाव में उपकेंद्र जर्जर हालत में हो गया है। ऐसी स्थिति में महिलाओं को सुविधा अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रही है। शीध्र ही मरम्मत न होने पर हालत और भी खराब हो जाएगी।
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प्रसव की नहीं है सुविधा
अस्पताल को भले ही न्यू पीएचसी का दर्जा दिया गया हो, लेेकिन अब तक गर्भवती महिलाओं को प्रसव की सुविधा नहीं मिली है। इसका कारण यहां पर महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। स्टाफ नर्स की तैनाती नहीं होने से सामान्य प्रसव भी नहीं हो पा रहे हैं। इससे गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए जिला मुख्यालय लगभग 40 किलोमीटर की दूरी तक जाना पड़ता है।
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शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में उपचार की सुविधा के लिए न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की गई है। जिनमें करोड़ों रुपये की लागत से भवनों का निर्माण कराया गया है, इन अस्पतालों की हालत को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने मंत्री और विधायक से लेकर पार्टी पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। जिसमें सभी को एक-एक अस्पताल गोद लेने का फरमान जारी किया, लेकिन सरकारी अस्पतालों की बद इंतजामी में सुधार नहीं हो पा रहा है।
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ऐसी स्थिति ब्लॉक मड़ावरा के अंतर्गत ग्राम डोंगराखुर्द स्थित न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की है। यहां पर अस्पताल पहुंचने के लिए कच्चे मार्ग से होकर गुजरना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में अस्पताल पहुंचने में दिक्कत आती है। बिजली की समस्या है। इसके अलावा प्रमुख समस्या चिकित्सक की तैनाती हुई, लेकिन जिला अस्पताल अटैच होने से अस्पताल खाली हो गया है। वर्तमान में फार्मासिस्ट अवकाश पर चल रहे हैं। ऐसे में अस्पताल स्वीपर के सहारे है। यहां पर बीमरियों से परेशान मरीज इलाज की आस में आते हैं लेकिन चिकित्सक के अभाव में मायूस होकर लौट रहे हैं। लगभग 12 गांव के लोग निजी क्लीनिकों के सहारे हैं।
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दोनों हैंडपंप पड़े हैं खराब, जर्जर हालत में है उपकेंद्र का भवन
अस्पताल में दो हैंडपंप हैं, लेकिन वर्तमान में एक हैंडपंप खराब पड़ा है। इसे एक वर्ष बीत गया पर, अब तक सुधार नहीं हो सका है। दूसरा हैंडपंप कई माह से पानी कम दे रहा है। इसको चलाते-चलाते ही लोग थक जाते है। अस्पताल में पानी की सुविधा को एक टंकी भी रखवाई गई हैै, जो अभी शोपीस साबित हो रही है। अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की जांच व टीकाकरण की सुविधा के लिए उपकेंद्र का निर्माण किया गया है। मरम्मत के अभाव में उपकेंद्र जर्जर हालत में हो गया है। ऐसी स्थिति में महिलाओं को सुविधा अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रही है। शीध्र ही मरम्मत न होने पर हालत और भी खराब हो जाएगी।
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प्रसव की नहीं है सुविधा
अस्पताल को भले ही न्यू पीएचसी का दर्जा दिया गया हो, लेेकिन अब तक गर्भवती महिलाओं को प्रसव की सुविधा नहीं मिली है। इसका कारण यहां पर महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। स्टाफ नर्स की तैनाती नहीं होने से सामान्य प्रसव भी नहीं हो पा रहे हैं। इससे गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए जिला मुख्यालय लगभग 40 किलोमीटर की दूरी तक जाना पड़ता है।