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जर्जर भवन दे रहे हादसो को न्यौता, प्रशासन का ध्यान नहीं
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राजकीय इंटर कॉलेज का जर्जर हालत में पड़ा भवन
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। शहर में कई दशकों पुराने सरकारी और व्यवसायिक भवन जर्जर हालत में हो चुके हैं। उनके ढहने से कभी भी गंभीर हादसे हो सकता है। वकीलों के बैठने के स्थान के पास पुराने कलक्ट्रेट भवन के छज्जा का पत्थर भी पूर्व में गिर चुका है, इसके बाद भी अब तक स्थायी समाधान नहीं किया जा सका है।
कलक्ट्रेट परिसर में वकीलों के बस्तों के पास पुराने भवन का छज्जा काफी जर्जर हो चुका है। इस छज्जे की छत के कुछ पत्थर तीन वर्ष पूर्व वकीलों के बैठने के स्थान पर गिर गए थे, हालांकि उस समय कचहरी का समय नहीं होने के कारण कोई वकील या वादकारी नहीं था, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया था। बाद में उस स्थान पर आने- जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन उसका कोई स्थाई समाधान अब तक नहीं किया गया है, इससे हादसे का डर बना रहता है। इसी प्रकार राजकीय इंटर कॉलेज का पुराना भवन काफी जर्जर है। इस भवन केे पास से छात्रों का अन्य कक्षों में जाने का रास्ता है। यदि भवन की दीवार गिरती है तो बड़ा हादसा होने की संभावना है। इसी तरह नझाई बाजार के पास बंद पड़े पुराने सिनेमाघर की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है। इसका छज्जा का कुछ हिस्सा पहले गिर चुका है। सिनेमाघर के नीचे कई दुकानें हैं, जहां ग्राहक हर समय रहते हैं। यदि इनकी ओर ध्यान नहीं दिया गया तो हादसा हो सकता है।
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शहर में जहां भी जर्जर हो चुकी इमारतें या भवन हैं, उनका सर्वे कराया जाएगा और उनके स्थायी समाधान के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
- अनिल कुुमार मिश्रा, अपर जिलाधिकारी।
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कलक्ट्रेट परिसर में वकीलों के बस्तों के पास पुराने भवन का छज्जा काफी जर्जर हो चुका है। इस छज्जे की छत के कुछ पत्थर तीन वर्ष पूर्व वकीलों के बैठने के स्थान पर गिर गए थे, हालांकि उस समय कचहरी का समय नहीं होने के कारण कोई वकील या वादकारी नहीं था, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया था। बाद में उस स्थान पर आने- जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन उसका कोई स्थाई समाधान अब तक नहीं किया गया है, इससे हादसे का डर बना रहता है। इसी प्रकार राजकीय इंटर कॉलेज का पुराना भवन काफी जर्जर है। इस भवन केे पास से छात्रों का अन्य कक्षों में जाने का रास्ता है। यदि भवन की दीवार गिरती है तो बड़ा हादसा होने की संभावना है। इसी तरह नझाई बाजार के पास बंद पड़े पुराने सिनेमाघर की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है। इसका छज्जा का कुछ हिस्सा पहले गिर चुका है। सिनेमाघर के नीचे कई दुकानें हैं, जहां ग्राहक हर समय रहते हैं। यदि इनकी ओर ध्यान नहीं दिया गया तो हादसा हो सकता है।
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शहर में जहां भी जर्जर हो चुकी इमारतें या भवन हैं, उनका सर्वे कराया जाएगा और उनके स्थायी समाधान के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
- अनिल कुुमार मिश्रा, अपर जिलाधिकारी।