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Lalitpur News: सीटें फुल...गेट व गैलरी में खड़े होकर करनी पड़ी यात्रा
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ललितपुर। दीपावली के चलते ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई है। अधिकांश ट्रेनों में आरक्षण फुल चल रहे हैं। लोग गैलरी में और गेटों पर लटक कर यात्रा करने को मजबूर दिखे।
त्योहार की शुरुआत धनतेरस से हो चुकी है। जनपद के निवासी जो बाहर नौकरी कर रहे हैं या कंपनियों में युवा नौकरी कर रहे हैं या फिर अन्य जनपदों व राज्यों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, वे सभी अब दीपावली मनाने के लिए अपने घरों को लौट रहे हैं। कई ने तो दो से तीन महीने पहले ही ट्रेनों में रिजर्वेशन करा लिया था, जबकि बहुत से लोगों की छुट्टियाें की तारीखें पक्की न होने पर वे तत्काल का इंतजार करते रहे, लेकिन तत्काल में भी उन्हें रिजर्वेशन नहीं मिल सका। इसके चलते कई लोग बिना सीट मिले ही किसी प्रकार ट्रेनों में धंसकर लौट रहे हैं।
शनिवार को झेलम एक्सप्रेस ट्रेन में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यात्री वेटिंग टिकट या फिर जनरल टिकट लेकर ट्रेनों के स्लीपर कोचों में भी धंसकर यात्रा करते रहे। ट्रेन के किसी भी कोच में चढ़ने तक की जगह नहीं मिल रही थी। किसी प्रकार कोच में चढ़ भी गए तो उन्हें गेट के पास गैलरी में ही धंसकर खड़े होकर यात्रा को मजबूर होना पड़ा। आरक्षित सीटों पर भी तीन की जगह पांच से छह यात्री बैठकर यात्रा करते रहे। अन्य ट्रेनों का भी यही हाल रहा।
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त्योहार की शुरुआत धनतेरस से हो चुकी है। जनपद के निवासी जो बाहर नौकरी कर रहे हैं या कंपनियों में युवा नौकरी कर रहे हैं या फिर अन्य जनपदों व राज्यों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, वे सभी अब दीपावली मनाने के लिए अपने घरों को लौट रहे हैं। कई ने तो दो से तीन महीने पहले ही ट्रेनों में रिजर्वेशन करा लिया था, जबकि बहुत से लोगों की छुट्टियाें की तारीखें पक्की न होने पर वे तत्काल का इंतजार करते रहे, लेकिन तत्काल में भी उन्हें रिजर्वेशन नहीं मिल सका। इसके चलते कई लोग बिना सीट मिले ही किसी प्रकार ट्रेनों में धंसकर लौट रहे हैं।
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शनिवार को झेलम एक्सप्रेस ट्रेन में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यात्री वेटिंग टिकट या फिर जनरल टिकट लेकर ट्रेनों के स्लीपर कोचों में भी धंसकर यात्रा करते रहे। ट्रेन के किसी भी कोच में चढ़ने तक की जगह नहीं मिल रही थी। किसी प्रकार कोच में चढ़ भी गए तो उन्हें गेट के पास गैलरी में ही धंसकर खड़े होकर यात्रा को मजबूर होना पड़ा। आरक्षित सीटों पर भी तीन की जगह पांच से छह यात्री बैठकर यात्रा करते रहे। अन्य ट्रेनों का भी यही हाल रहा।
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