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स्क्रब टाइफस : मरीज मिलने के बाद भी जारी नहीं की गई एडवाइजरी
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ललितपुर। जनपद में स्क्रब टाइफस के हाल ही में दो दिन के अंतराल में दो मरीज मिल चुके हैं। इनकी सूचना विभागीय पोर्टल पर अपलोड की गई। इसके बाद भी जागरुकता तो दूर एडवाजारी तक जारी नहीं की गई है। ऐसे में जिम्मेदारों की कार्य प्रणाली का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
शासन ने स्वास्थ्य विभाग को बीमारियों की रोकथाम के लिए लक्षण व बचाव के प्रति जागरूक करने व मरीज मिलने की स्थिति में संक्रमण नियंत्रण के लिए निरोधात्मक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी है। मरीज मिलने पर समुचित मात्रा में उपचार दिलाने व देने का भी जिम्मा है। लेकिन, विभागीय अधिकारी खानापूर्ति मात्र ही कर रहे हैं। इसका खुलासा बीते माह मिले स्क्रब टाइफस के मरीजों को लेकर हो रहा है। यह मरीज 29 व 31 अगस्त को मिल गए थे। छह दिन बाद भी विभागीय अधिकारियों की ओर से न तो बचाव और न ही लक्षणों के प्रति जागरूक किया।
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बीते माह दो दिन के अंतराल में मिले थे दो मरीज
केस - एक
ब्लॉक बिरधा अंतर्गत ग्राम सिंगेपुर निवासी 35 वर्षीय महिला गुजरात में परिवार के साथ मजदूरी करती थी। तबीयत खराब होने पर 21 को चंदेरा में भाई के पास आ गई थी, और मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया। हालत में सुधार न होने पर 24 अगस्त को झांसी रेफर किया गया था। झांसी में 25 अगस्त को सैंपल लेकर जांच की गई। 29 अगस्त को आई रिपोर्ट में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई। यहां से उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया। अब महिला पूर्ण रूप से स्वस्थ है।
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केस दो
ब्लॉक मड़ावरा अंतर्गत ग्राम डेंगरा सलैया निवासी 28 वर्षीय महिला का सीएचसी मड़ावारा में 18 अगस्त को प्रसव हुआ था। 19 को रक्तस्राव होने पर मेडिकल काॅलेज ललितपुर रेफर किया। यहां पर तीन दिन तक उपचार चला। 23 अगस्त को मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया। 26 को लक्षणों के आधार पर सैंपल लेकर जांच की गई। 31 अगस्त को स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई। स्वस्थ होने पर महिला को डिस्चार्ज कर दिया। अब महिला स्वस्थ है।
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यह है स्क्रब टाइफस
स्क्रब टाइफस झाड़ियों, घास व खेतों में रहने वाले छोटे कीटों माइट्स के काटने से होता है। यह एक मरीज से दूसरे में नहीं फैलता है। बारिश के मौसम में अधिक मामले आते हैं। साफ-सफाई न होने से यह कीट अधिक पनपते हैं।
-- -यह हैं स्क्रब टाइफस के लक्षण
- कीट के काटने के एक से तीन सप्ताह में लक्षण आते हैं।
- तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द होना।
- मांशपेशियों में अधिक दर्द होना।
- गर्दन, बगल में गांठें सूज जाना।
- आंखें लाल हो जाना
- गंभीर स्थिति में सांस लेने में दिक्कत।
- समय से उपचार न मिलने पर लिवर, किडनी, फेफड़ों में परेशानी बढ़ती है।
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बचाव कैसे करें
- खेत, घास, झाड़ी में जाने पर कपड़ा व जूते पहनकर जाएं।
- शरीर पर कीट-रोधी क्रीम लगाएं
- घर के आसपास घास-झाड़ियों की सफाई रखें।
- शरीर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें।
- कीट के काटने पर तत्काल ठीक से सफाई करें।
- समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
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जनपद में बीते माह दो स्क्रब टाइफस के मरीज मिले थे। इन क्षेत्रों में बीते दिन निरोधात्मक कार्रवाई कराई गई है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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शासन ने स्वास्थ्य विभाग को बीमारियों की रोकथाम के लिए लक्षण व बचाव के प्रति जागरूक करने व मरीज मिलने की स्थिति में संक्रमण नियंत्रण के लिए निरोधात्मक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी है। मरीज मिलने पर समुचित मात्रा में उपचार दिलाने व देने का भी जिम्मा है। लेकिन, विभागीय अधिकारी खानापूर्ति मात्र ही कर रहे हैं। इसका खुलासा बीते माह मिले स्क्रब टाइफस के मरीजों को लेकर हो रहा है। यह मरीज 29 व 31 अगस्त को मिल गए थे। छह दिन बाद भी विभागीय अधिकारियों की ओर से न तो बचाव और न ही लक्षणों के प्रति जागरूक किया।
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बीते माह दो दिन के अंतराल में मिले थे दो मरीज
केस - एक
ब्लॉक बिरधा अंतर्गत ग्राम सिंगेपुर निवासी 35 वर्षीय महिला गुजरात में परिवार के साथ मजदूरी करती थी। तबीयत खराब होने पर 21 को चंदेरा में भाई के पास आ गई थी, और मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया। हालत में सुधार न होने पर 24 अगस्त को झांसी रेफर किया गया था। झांसी में 25 अगस्त को सैंपल लेकर जांच की गई। 29 अगस्त को आई रिपोर्ट में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई। यहां से उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया। अब महिला पूर्ण रूप से स्वस्थ है।
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केस दो
ब्लॉक मड़ावरा अंतर्गत ग्राम डेंगरा सलैया निवासी 28 वर्षीय महिला का सीएचसी मड़ावारा में 18 अगस्त को प्रसव हुआ था। 19 को रक्तस्राव होने पर मेडिकल काॅलेज ललितपुर रेफर किया। यहां पर तीन दिन तक उपचार चला। 23 अगस्त को मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया। 26 को लक्षणों के आधार पर सैंपल लेकर जांच की गई। 31 अगस्त को स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई। स्वस्थ होने पर महिला को डिस्चार्ज कर दिया। अब महिला स्वस्थ है।
यह है स्क्रब टाइफस
स्क्रब टाइफस झाड़ियों, घास व खेतों में रहने वाले छोटे कीटों माइट्स के काटने से होता है। यह एक मरीज से दूसरे में नहीं फैलता है। बारिश के मौसम में अधिक मामले आते हैं। साफ-सफाई न होने से यह कीट अधिक पनपते हैं।
- कीट के काटने के एक से तीन सप्ताह में लक्षण आते हैं।
- तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द होना।
- मांशपेशियों में अधिक दर्द होना।
- गर्दन, बगल में गांठें सूज जाना।
- आंखें लाल हो जाना
- गंभीर स्थिति में सांस लेने में दिक्कत।
- समय से उपचार न मिलने पर लिवर, किडनी, फेफड़ों में परेशानी बढ़ती है।
बचाव कैसे करें
- खेत, घास, झाड़ी में जाने पर कपड़ा व जूते पहनकर जाएं।
- शरीर पर कीट-रोधी क्रीम लगाएं
- घर के आसपास घास-झाड़ियों की सफाई रखें।
- शरीर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें।
- कीट के काटने पर तत्काल ठीक से सफाई करें।
- समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
जनपद में बीते माह दो स्क्रब टाइफस के मरीज मिले थे। इन क्षेत्रों में बीते दिन निरोधात्मक कार्रवाई कराई गई है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ