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समौसों की बिक्री घटी, रेलवे कैंटीन, होटलों में नहीं पहुंच रहे ग्राहक
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कृष्णा टॉकीज के पास मॉस्क लगाकर बैठे होटल संचालक
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। कोरोना वायरस से बचाव के चलते रेलवे यात्रियों एवं शहरवासियों ने खुले में बनाए जा रहे समोसा और मिठाई से परहेज करना शुरु कर दिया है। रेलवे कैंटीन एवं होटलों में समोसा व कचौड़ी की बिक्री एक सप्ताह में काफी घट गई है। मिठाइयों की बिक्री सत्तर फीसदी तक कम हो गई है। दुकानदार जहां बिक्री कम होने से परेशान हैं, वहीं कोरोना वायरस को लेकर चिंतित भी हैं।
कोरोना वायरस को लेकर रेलवे ने कई ट्रेनें निरस्त कर दी हैं। यात्री अपनी यात्राएं रद्द कर टिकट कैंसल करा रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर स्थित कैंटीनों पर समोसा की बिक्री सत्तर फीसदी तक घट गई है। रेलवे कैंटीनों पर चाय बिकना नब्बे फीसदी तक कम हो गया है। अधिकांश लोग कैंटीनों की चाय से परहेज कर रहे हैं। इस कारण कैंटीन संचालकों ने मांग होने पर ही समोसा, चाय या अन्य खाने के सामान बनाने का निर्णय लिया है।
कैंटीन संचालक तोताराम ने बताया कि पहले 70 से अधिक समोसे एक दिन में बिक जाते थे, जबकि आज शुक्रवार को मात्र 15 समोसे ही बिक सके हैं, पचास समोसे बनाए थे। चाय का हाल तो काफी खराब है। तीन दिन से कोई भी चाय नहीं बिक सकी है। पहले पचास से साठ चाय बिक जाती थीं। ट्रेनों में यात्री समोसा व चाय से परहेज कर रहे हैं।
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रेलवे स्टेशन के बाहर बाजार में समोसा व खाने पीने की वस्तुओं पर भी असर पड़ा है। कोरोना वायरस को लेकर होटलों पर समोसा की बिक्री पचास फीसदी घट गई है। इसका कारण होटलों का व्यापार अधिकांश ट्रेन यात्रियों पर ही निर्भर है। ट्रेन यात्रियों के साथ ही लोकल यात्री भी खुले में बनने वाली खाने पीने की खाद्य वस्तुओं से परहेज कर रहे हैं। होटल संचालक सुशील मोदी ने बताया कि कोरोना को लेकर ग्राहक कम ही दुकान पर आ रहे हैं। पहले जहां दिन में सौ समौसे बिकते थे, वहीं अब दिन भर में मात्र 25 से 30 समोसे ही बिक पा रहे हैं। अन्य खाने की चीजों पर बहुत असर पड़ा है। लोग पैक्ड सामान खरीद रहे हैं।
कृष्णा टाकीज के पास स्थित एक होटल संचालक संजय जैन ने बताया कि उनके यहां पहले दिन भर में करीब साढ़े पांच सौ तक समोसों की बिक्री हो जाती थी, लेकिन अब स्थिति यह है कि दिन में 200 समोसे मुश्किल से बिक रहे हैं। चटनी से तो लोग बिलकुल ही परहेज कर रहे हैं। यह असर समोसों पर ही नहीं, बल्कि मिठाई पर भी हुआ है। कोरोना को लेकर लोग बाहर की मिठाई लेने से परहेज कर रहे हैं। वर्तमान में मिठाई की बिक्री 80 से 90 फीसदी तक घट गई है। इसका साफ असर खाली दुकानों या उनमें बैठे इक्का- दुक्का ग्राहकों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। हालांकि, दुकान संचालकों ने इसे लोगों की सतर्कता बताते हुए खुद ही खाने के सामानों को मांग के अनुसार ही बनाने की बात कही है।
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कोरोना वायरस को लेकर रेलवे ने कई ट्रेनें निरस्त कर दी हैं। यात्री अपनी यात्राएं रद्द कर टिकट कैंसल करा रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर स्थित कैंटीनों पर समोसा की बिक्री सत्तर फीसदी तक घट गई है। रेलवे कैंटीनों पर चाय बिकना नब्बे फीसदी तक कम हो गया है। अधिकांश लोग कैंटीनों की चाय से परहेज कर रहे हैं। इस कारण कैंटीन संचालकों ने मांग होने पर ही समोसा, चाय या अन्य खाने के सामान बनाने का निर्णय लिया है।
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कैंटीन संचालक तोताराम ने बताया कि पहले 70 से अधिक समोसे एक दिन में बिक जाते थे, जबकि आज शुक्रवार को मात्र 15 समोसे ही बिक सके हैं, पचास समोसे बनाए थे। चाय का हाल तो काफी खराब है। तीन दिन से कोई भी चाय नहीं बिक सकी है। पहले पचास से साठ चाय बिक जाती थीं। ट्रेनों में यात्री समोसा व चाय से परहेज कर रहे हैं।
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रेलवे स्टेशन के बाहर बाजार में समोसा व खाने पीने की वस्तुओं पर भी असर पड़ा है। कोरोना वायरस को लेकर होटलों पर समोसा की बिक्री पचास फीसदी घट गई है। इसका कारण होटलों का व्यापार अधिकांश ट्रेन यात्रियों पर ही निर्भर है। ट्रेन यात्रियों के साथ ही लोकल यात्री भी खुले में बनने वाली खाने पीने की खाद्य वस्तुओं से परहेज कर रहे हैं। होटल संचालक सुशील मोदी ने बताया कि कोरोना को लेकर ग्राहक कम ही दुकान पर आ रहे हैं। पहले जहां दिन में सौ समौसे बिकते थे, वहीं अब दिन भर में मात्र 25 से 30 समोसे ही बिक पा रहे हैं। अन्य खाने की चीजों पर बहुत असर पड़ा है। लोग पैक्ड सामान खरीद रहे हैं।
कृष्णा टाकीज के पास स्थित एक होटल संचालक संजय जैन ने बताया कि उनके यहां पहले दिन भर में करीब साढ़े पांच सौ तक समोसों की बिक्री हो जाती थी, लेकिन अब स्थिति यह है कि दिन में 200 समोसे मुश्किल से बिक रहे हैं। चटनी से तो लोग बिलकुल ही परहेज कर रहे हैं। यह असर समोसों पर ही नहीं, बल्कि मिठाई पर भी हुआ है। कोरोना को लेकर लोग बाहर की मिठाई लेने से परहेज कर रहे हैं। वर्तमान में मिठाई की बिक्री 80 से 90 फीसदी तक घट गई है। इसका साफ असर खाली दुकानों या उनमें बैठे इक्का- दुक्का ग्राहकों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। हालांकि, दुकान संचालकों ने इसे लोगों की सतर्कता बताते हुए खुद ही खाने के सामानों को मांग के अनुसार ही बनाने की बात कही है।

खाली पड़ा होटल- फोटो : LALITPUR