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Lalitpur News: रिटायर्ड इंजीनियर को 48 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 31 लाख निकाले
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झांसी। भेल से रिटायर्ड इंजीनियर एके गुप्ता (70) को साइबर जालसाजों ने करीब 48 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बंधक बनाए रखा। क्राइम ब्रांच का अफसर बनकर फोन करने वाले जालसाजों ने आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तारी का डर दिखाया। जांच के नाम पर उनसे 31,00,047 रुपये वसूल ले गए। रकम गंवाने के बाद भयभीत रिटायर्ड इंजीनियर ने पड़ोस में रहने वाले भाई को आपबीती बताई। परिजनों के समझाने पर वह साइबर थाने पहुंचे। उनकी तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात जालसाज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित एके गुप्ता ने पुलिस को बताया पिछले माह पत्नी के साथ नासिक समेत कुछ इलाकों में घूमने गए थे। इस दौरान ठहरने एवं आने-जाने के लिए ऑनलाइन पेमेंट के साथ कई जगह उन्होंने आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था। 23 सितंबर को झांसी लौटने के बाद 26 सितंबर को उनके पास फोन आया। कॉल करने वाला खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताते हुए धमकाने लगा।
पुलिस वर्दी में दिखाई दे रहे जालसाज ने आपराधिक गतिविधियों के सहारे पैसा जमा करने की बात कही। उनके आधार नंबर एवं बैंक खातों के बारे में बताते हुए कई मामलों में उनके आधार नंबर के इस्तेमाल की बात बताई। एके गुप्ता ने कहा वह पेंशनर हैं। उन्होंने खाते में इस तरह की कोई रकम नहीं ली। ठग ने उनकी एटीएस के कथित अफसरों से भी बात कराई। गंभीर मामले में जेल जाने के लिए तैयार रहने को धमकाते हुए कहा अब झांसी आकर पुलिस गिरफ्तार करेगी। धमकाने वाले अंदाज से वह सहम उठे। जालसाज ने कहा कि उनके बैंक खाते में जमा रकम की जांच होगी। गलती न मिलने पर पूरा पैसा रिलीज हो जाएगा। किसी से यह बात भी न बताने को कहा। ठगों ने उनके सारे बैंक खातों की जानकारी ले ली। साइबर थाना प्रभारी सत्येंद्र यादव के मुताबिक करीब दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनसे 31 लाख रुपये वसूल लिए। यह पैसा किन-किन खातों में भेजा गया, इसकी जांच कराई जा रही है। तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ साइबर अपराध, धोखाधड़ी, जबरन वसूली समेत बीएनएस की अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
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बैंक जाकर तुड़वाई एफडी
साइबर जालसाजों ने उनसे बैंक की पूरी जानकारी धमका कर ले ली थी। एफडी की रकम की भी जांच करने के लिए उसे तुड़वाने को कहा था। इस वजह से उन्होंने बैंक से अपनी एफडी भी तुड़वा दी हालांकि बैंक अफसरों ने उनसे कारण पूछा लेकिन, उन्होंने बताया कि किसी काम की वजह से उनको पैसों की जरूरत है। इस वजह से वह एफडी को तुड़वा रहे हैं।
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व्हाट्सएप कॉल एवं फोन से करते रहे निगरानी
शातिर जालसाज उनकी निगरानी के लिए लगातार व्हाट्सएप कॉल एवं फोन पर बने हुए थे। इस दौरान उनको किसी से भी बात करने के लिए मना किया था। उन्होंने पत्नी को भी यह बात नहीं बताई। पैसा देने के बाद उन्होंने यह बात पड़ोस में रहने वाले भाई से बताई। जब परिवार के अन्य सदस्यों को इसका पता चला तब उन्होंने उनको काफी समझाया, तब जाकर वह शिकायत दर्ज कराने पर राजी हुए।
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घबराएं नहीं बल्कि बरतें सतर्कता
साइबर विशेषज्ञ डा.राजीव त्रिपाठी का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई भी चीज कानून में नहीं है। कोई भी फोन करके अगर कानूनी कार्रवाई की धमकी दे तब उससे अनिवार्य तौर पर सतर्क रहें-
- पुलिस, सीबीआई, ईडी या क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति गिरफ्तारी का डर दिखाए तो तुरंत विश्वास न करें।
- जांच, खाते के सत्यापन, रकम सुरक्षित रखने या केस खत्म करने के नाम पर पैसा मांगना आम है। ऐसे में किसी खाते में रुपये ट्रांसफर न करें।
- अनजान आदमी का वीडियो कॉल आने पर उसे तुरंत काट दें। कोई भी एजेंसी कभी वीडियो कॉल नहीं करती।
- किसी भी स्थिति में खुद को कमरे में बंद करके या परिजनों से बात रोकने के ठगों के निर्देश न मानें।
- आधार की प्रति, बैंक संबंधी जानकारी, पासवर्ड या ओटीपी अनजान लोगों से साझा न करें।
- ठगी होते ही तुरंत 1930 पर फोन करें
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पीड़ित एके गुप्ता ने पुलिस को बताया पिछले माह पत्नी के साथ नासिक समेत कुछ इलाकों में घूमने गए थे। इस दौरान ठहरने एवं आने-जाने के लिए ऑनलाइन पेमेंट के साथ कई जगह उन्होंने आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था। 23 सितंबर को झांसी लौटने के बाद 26 सितंबर को उनके पास फोन आया। कॉल करने वाला खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताते हुए धमकाने लगा।
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पुलिस वर्दी में दिखाई दे रहे जालसाज ने आपराधिक गतिविधियों के सहारे पैसा जमा करने की बात कही। उनके आधार नंबर एवं बैंक खातों के बारे में बताते हुए कई मामलों में उनके आधार नंबर के इस्तेमाल की बात बताई। एके गुप्ता ने कहा वह पेंशनर हैं। उन्होंने खाते में इस तरह की कोई रकम नहीं ली। ठग ने उनकी एटीएस के कथित अफसरों से भी बात कराई। गंभीर मामले में जेल जाने के लिए तैयार रहने को धमकाते हुए कहा अब झांसी आकर पुलिस गिरफ्तार करेगी। धमकाने वाले अंदाज से वह सहम उठे। जालसाज ने कहा कि उनके बैंक खाते में जमा रकम की जांच होगी। गलती न मिलने पर पूरा पैसा रिलीज हो जाएगा। किसी से यह बात भी न बताने को कहा। ठगों ने उनके सारे बैंक खातों की जानकारी ले ली। साइबर थाना प्रभारी सत्येंद्र यादव के मुताबिक करीब दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनसे 31 लाख रुपये वसूल लिए। यह पैसा किन-किन खातों में भेजा गया, इसकी जांच कराई जा रही है। तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ साइबर अपराध, धोखाधड़ी, जबरन वसूली समेत बीएनएस की अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
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बैंक जाकर तुड़वाई एफडी
साइबर जालसाजों ने उनसे बैंक की पूरी जानकारी धमका कर ले ली थी। एफडी की रकम की भी जांच करने के लिए उसे तुड़वाने को कहा था। इस वजह से उन्होंने बैंक से अपनी एफडी भी तुड़वा दी हालांकि बैंक अफसरों ने उनसे कारण पूछा लेकिन, उन्होंने बताया कि किसी काम की वजह से उनको पैसों की जरूरत है। इस वजह से वह एफडी को तुड़वा रहे हैं।
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व्हाट्सएप कॉल एवं फोन से करते रहे निगरानी
शातिर जालसाज उनकी निगरानी के लिए लगातार व्हाट्सएप कॉल एवं फोन पर बने हुए थे। इस दौरान उनको किसी से भी बात करने के लिए मना किया था। उन्होंने पत्नी को भी यह बात नहीं बताई। पैसा देने के बाद उन्होंने यह बात पड़ोस में रहने वाले भाई से बताई। जब परिवार के अन्य सदस्यों को इसका पता चला तब उन्होंने उनको काफी समझाया, तब जाकर वह शिकायत दर्ज कराने पर राजी हुए।
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घबराएं नहीं बल्कि बरतें सतर्कता
साइबर विशेषज्ञ डा.राजीव त्रिपाठी का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई भी चीज कानून में नहीं है। कोई भी फोन करके अगर कानूनी कार्रवाई की धमकी दे तब उससे अनिवार्य तौर पर सतर्क रहें-
- पुलिस, सीबीआई, ईडी या क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति गिरफ्तारी का डर दिखाए तो तुरंत विश्वास न करें।
- जांच, खाते के सत्यापन, रकम सुरक्षित रखने या केस खत्म करने के नाम पर पैसा मांगना आम है। ऐसे में किसी खाते में रुपये ट्रांसफर न करें।
- अनजान आदमी का वीडियो कॉल आने पर उसे तुरंत काट दें। कोई भी एजेंसी कभी वीडियो कॉल नहीं करती।
- किसी भी स्थिति में खुद को कमरे में बंद करके या परिजनों से बात रोकने के ठगों के निर्देश न मानें।
- आधार की प्रति, बैंक संबंधी जानकारी, पासवर्ड या ओटीपी अनजान लोगों से साझा न करें।
- ठगी होते ही तुरंत 1930 पर फोन करें