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संसाधन सीमित, हॉट स्पॉट तक में करना पड़ता काम
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ललितपुर। कोरोना वायरस के चलते बिजली कर्मचारी सच्चे वॉरियर्स साबित हो रहे हैं। दिन हो या रात अभियंताओं से लेकर लाइनमैन तक सीमित संसाधनों में अपना फर्ज निभा रहे हैं। घर-घर बिजली पहुंचाने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। फिरोजाबाद के डबरई क्षेत्र में बिजली संविदा कर्मचारी की कोरोना पॉजीटिव रिपोर्ट आने के बाद प्रबंध निदेशक ने सभी विद्युुत कर्मचारियों को एहतियात बरतते हुए अलर्ट जारी किया है।
बिजली कर्मचारी फील्ड में उतरकर फाल्टों को दूरकर क्षेत्रों में विद्युत समस्याओं का समाधान करने में जुटे हैं। जहां भी फाल्ट या तार टूटने या फिर ट्रांसफार्मर खराब होने जैसी सूचनाएं मिलती हैं, वह उन स्थानों पर, यहां तक कि हॉटस्पॉट क्षेत्र में भी सीमित संसाधनों में पहुंचते हैं और फाल्ट दूर कर लोगों के घरों व गली मोहल्लों में बिजली आपूर्ति बहाल कर रहे हैं। कई बार तो उन्हें कई लोगों के बीच में पहुंचकर भी अपना फर्ज निभाना पड़ता है और कई बार तो अस्पताल या क्वारंटीन क्षेत्र में भी पहुंचकर फाल्ट को सुधारना होता है।
ऐसे में बिजली कर्मचारी कोरोना महामारी की इस जंग के बीच गड़बड़ाई बिजली को ठीक कर सच्चे कोरोना वॉरियर्स साबित हो रहे हैं। ड्यूटी के उपरांत उनके सामने घर पहुंचकर परिवार को कोरोना से मुक्त रखने की बड़ी चुनौती बन रही है। कई बार तो यह बिजली कर्मचारी घर में ही अलग कमरे में रहकर परिवार की सुरक्षा का प्रयास करते हैं, लेकिन घर जाना और रोज ड्यूटी करना भी उनकी अपनी मजबूरी है। इस संबंध में जब बिजली कर्मचारियों से बात की तो उन्होंने अपनी व्यथा बताई।
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महामारी के दौर में रिस्क उठाकर फाल्ट सुधारने के लिए जाना पड़ता है। बहुत पहले मास्क बांटे गए थे और उसी एक मास्क को बार-बार धोकर मुंह पर बांध लेते हैं। सैनिटाइजर भी नहीं है। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच काम कर रहे हैं। ड्यूटी करके लौटते हैं तो अपने कपड़े व सामान परिवार के सदस्यों से अलग रखते हैं। परिवार की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।
- रामसेवक, विद्युत लाइनमैन।
ड्यूटी जाने के दौरान घर से निकलने में डर लगता है कि कहीं किसी कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में न आ जाएं। लेकिन, काम करना भी जरुरी है। मास्क लगाकर ही काम पर जा रहे हैं और जब भी मौका मिलता है तो साबुन से हाथ धो लेते हैं उसके बाद भी कुछ खाते -पीते हैं। परिवार के सदस्यों को भी एहतिआत बरतने की सलाह देते हैं।
- उजागर, लाइनमैन।
कोरोना के इस संकट काल में काम करना जरुरी है और परिवार में रहना भी जरुरी है। जब काम पर निकलते हैं तो हर प्रकार से एहतिआत बरतने का प्रयास करते हैं। लोगों को दूरी बनाकर लाइनों के फाल्ट व अन्य विद्युत काम करते हैं। इसके बाद जब घर पहुुंचते हैं तो साबुन से हाथ धोने के साथ ही परिवार के सदस्यों से भी दूूरी बनाकर रहते हैं, ताकि यदि वह दिन भर में किसी के संदिग्ध के संपर्क में आए हों तो परिवार पर उसका असर न पड़े।
- अतुल, लाइनमैन।
विभाग व जनता के लिए काम करना हमारा काम है। विभाग में सीमित संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। ग्लब्ज नहीं हैं, जिससे फाल्ट सुधारने में भी दिक्कत होती है। मास्क पहले मिला था, उसी को रोजाना धोकर उपयोग कर लेते हैं। सैनिटाइजर भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। क्षेत्र में जाने पर लोगों से दूरी बनाकर काम करना भी कई बार मुश्किल हो जाता है। फिर भी काम तो करना ही है।
- छोटेलाल, लाइनमैन।
विद्युत सब स्टेशन पर रहकर और क्षेत्र में जाकर बिजली संबंधी काम करते समय कई बार डर लगता है कि किसी कोरोना संक्रमित के संपर्क में न आ जाएं, फिर भी बचाव करते हुए काम तो कर ही रहे हैं। दिन में कई विद्युत संबंधी शिकायती आती हैं, जो सुधरवाना पड़ता है।
- अजय साहू, विद्युत कर्मचारी।
विद्युत सब स्टेशन नझाई बाजार में एसएसओ का कार्य करना पड़ता है। यहां दिन में करीब 35 से 40 विद्युत संबंधी शिकायतें रोज आती हैं और लोग आते हैं तो उनसे दूरी बनाना कई बार कठिन हो जाता है। फिर भी प्रयास करते हुए लोगों को मजबूरी में दूर से ही शिकायत बताने को कहा जाता है। ऐसे में यहां काम के दौरान रिस्क तो है ही, लेकिन काम करना भी जरुरी है।
- आरबी कटियार, विद्युत सब स्टेशन ऑपरेटर।
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बिजली कर्मचारी फील्ड में उतरकर फाल्टों को दूरकर क्षेत्रों में विद्युत समस्याओं का समाधान करने में जुटे हैं। जहां भी फाल्ट या तार टूटने या फिर ट्रांसफार्मर खराब होने जैसी सूचनाएं मिलती हैं, वह उन स्थानों पर, यहां तक कि हॉटस्पॉट क्षेत्र में भी सीमित संसाधनों में पहुंचते हैं और फाल्ट दूर कर लोगों के घरों व गली मोहल्लों में बिजली आपूर्ति बहाल कर रहे हैं। कई बार तो उन्हें कई लोगों के बीच में पहुंचकर भी अपना फर्ज निभाना पड़ता है और कई बार तो अस्पताल या क्वारंटीन क्षेत्र में भी पहुंचकर फाल्ट को सुधारना होता है।
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ऐसे में बिजली कर्मचारी कोरोना महामारी की इस जंग के बीच गड़बड़ाई बिजली को ठीक कर सच्चे कोरोना वॉरियर्स साबित हो रहे हैं। ड्यूटी के उपरांत उनके सामने घर पहुंचकर परिवार को कोरोना से मुक्त रखने की बड़ी चुनौती बन रही है। कई बार तो यह बिजली कर्मचारी घर में ही अलग कमरे में रहकर परिवार की सुरक्षा का प्रयास करते हैं, लेकिन घर जाना और रोज ड्यूटी करना भी उनकी अपनी मजबूरी है। इस संबंध में जब बिजली कर्मचारियों से बात की तो उन्होंने अपनी व्यथा बताई।
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महामारी के दौर में रिस्क उठाकर फाल्ट सुधारने के लिए जाना पड़ता है। बहुत पहले मास्क बांटे गए थे और उसी एक मास्क को बार-बार धोकर मुंह पर बांध लेते हैं। सैनिटाइजर भी नहीं है। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच काम कर रहे हैं। ड्यूटी करके लौटते हैं तो अपने कपड़े व सामान परिवार के सदस्यों से अलग रखते हैं। परिवार की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।
- रामसेवक, विद्युत लाइनमैन।
ड्यूटी जाने के दौरान घर से निकलने में डर लगता है कि कहीं किसी कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में न आ जाएं। लेकिन, काम करना भी जरुरी है। मास्क लगाकर ही काम पर जा रहे हैं और जब भी मौका मिलता है तो साबुन से हाथ धो लेते हैं उसके बाद भी कुछ खाते -पीते हैं। परिवार के सदस्यों को भी एहतिआत बरतने की सलाह देते हैं।
- उजागर, लाइनमैन।
कोरोना के इस संकट काल में काम करना जरुरी है और परिवार में रहना भी जरुरी है। जब काम पर निकलते हैं तो हर प्रकार से एहतिआत बरतने का प्रयास करते हैं। लोगों को दूरी बनाकर लाइनों के फाल्ट व अन्य विद्युत काम करते हैं। इसके बाद जब घर पहुुंचते हैं तो साबुन से हाथ धोने के साथ ही परिवार के सदस्यों से भी दूूरी बनाकर रहते हैं, ताकि यदि वह दिन भर में किसी के संदिग्ध के संपर्क में आए हों तो परिवार पर उसका असर न पड़े।
- अतुल, लाइनमैन।
विभाग व जनता के लिए काम करना हमारा काम है। विभाग में सीमित संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। ग्लब्ज नहीं हैं, जिससे फाल्ट सुधारने में भी दिक्कत होती है। मास्क पहले मिला था, उसी को रोजाना धोकर उपयोग कर लेते हैं। सैनिटाइजर भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। क्षेत्र में जाने पर लोगों से दूरी बनाकर काम करना भी कई बार मुश्किल हो जाता है। फिर भी काम तो करना ही है।
- छोटेलाल, लाइनमैन।
विद्युत सब स्टेशन पर रहकर और क्षेत्र में जाकर बिजली संबंधी काम करते समय कई बार डर लगता है कि किसी कोरोना संक्रमित के संपर्क में न आ जाएं, फिर भी बचाव करते हुए काम तो कर ही रहे हैं। दिन में कई विद्युत संबंधी शिकायती आती हैं, जो सुधरवाना पड़ता है।
- अजय साहू, विद्युत कर्मचारी।
विद्युत सब स्टेशन नझाई बाजार में एसएसओ का कार्य करना पड़ता है। यहां दिन में करीब 35 से 40 विद्युत संबंधी शिकायतें रोज आती हैं और लोग आते हैं तो उनसे दूरी बनाना कई बार कठिन हो जाता है। फिर भी प्रयास करते हुए लोगों को मजबूरी में दूर से ही शिकायत बताने को कहा जाता है। ऐसे में यहां काम के दौरान रिस्क तो है ही, लेकिन काम करना भी जरुरी है।
- आरबी कटियार, विद्युत सब स्टेशन ऑपरेटर।