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राम नाम जीवन का आधार: महाराज
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संवाद न्यूज एजेंसी
डोंगराखुर्द (ललितपुर)। प्रयाग पीठाधीश्वर जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद महाराज ने श्रीराम चरित्र का गुणगान करते हुए कहा कि भगवान को पाने के लिए साक्षात इस रामचरित मानस रूपी सरोवर में स्नान करने से प्राणी शुद्ध बुद्ध से धन्य होता है। वह रविवार को कस्बा नाराहट में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव के प्रथम दिन श्रीराम कथा का वर्णन कर रहे थे।
महाराज ने मंगला चरण की व्याख्या करते हुए कहा कि सबको प्रणाम करके फिर रामजी को प्रणाम करने का अर्थ यही हुआ कि अब किसी और प्रणाम करने की आवश्यकता नहीं है, यानि भगवान राम पूर्ण हैं और पूर्ण को प्राप्त करने के बाद कुछ शेष नहीं रहता है। इसलिए जीवन में जिसने भगवान राम को पा लिया, उसने समझो सब कुछ प्राप्त कर लिया। जीवन का आधार ही राम नाम है। उन्होंने कहा कि हर जगह राम नाम की महिमा का गुणगान है। भगवान भोलेशंकर भी राम नाम जपते रहते हैं। संसार ही राम नाम से चल रहा है। राम नाम में पूरा ब्रह्मांड समाहित है। जीवन के हर पल हर क्षण में राम का चलन रहता है।
बच्चों के जन्म में राम नाम का सोहर होता है। विवाह आदि मांगलिक कार्यों में श्रीराम के गीत गाए जाते हैं। श्रीराम को शिव का महामंत्र माना गया है। राम में शिव और शिव में राम विद्यमान हैं। इस अवसर पर कृष्ण सखा उद्धव महाराज, आचार्य महेंद्र त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष अशोकनगर राव साहब, अजय यादव, एसपी सिंह बघेल आदि प्रमुख लोग मौजूद रहे।
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-- -- -- -नहीं मिल सकी सुरक्षा व्यवस्था:
प्रयाग पीठाधीश्वर स्वामी ओंकारानंद सरस्वती महाराज का ललितपुर में 25 मई को आगमन हुआ। वह यहां नौ दिवसीय रामकथा में भक्तों को राम कथा सुनाएंगे। साथ ही वह कुछ प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन भी करेंगे। शंकराचार्य के नाराहट आगमन एवं आयोजित कार्यक्रम को लेकर आचार्य महेंद्र त्रिपाठी ने 18 मई को जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर रामकथा के समय सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन कहीं भी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई। सुरक्षा व्यवस्था में की जा रही अनदेखी से उनके शिष्यों एवं ग्राम वासियों में रोष है।
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डोंगराखुर्द (ललितपुर)। प्रयाग पीठाधीश्वर जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद महाराज ने श्रीराम चरित्र का गुणगान करते हुए कहा कि भगवान को पाने के लिए साक्षात इस रामचरित मानस रूपी सरोवर में स्नान करने से प्राणी शुद्ध बुद्ध से धन्य होता है। वह रविवार को कस्बा नाराहट में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव के प्रथम दिन श्रीराम कथा का वर्णन कर रहे थे।
महाराज ने मंगला चरण की व्याख्या करते हुए कहा कि सबको प्रणाम करके फिर रामजी को प्रणाम करने का अर्थ यही हुआ कि अब किसी और प्रणाम करने की आवश्यकता नहीं है, यानि भगवान राम पूर्ण हैं और पूर्ण को प्राप्त करने के बाद कुछ शेष नहीं रहता है। इसलिए जीवन में जिसने भगवान राम को पा लिया, उसने समझो सब कुछ प्राप्त कर लिया। जीवन का आधार ही राम नाम है। उन्होंने कहा कि हर जगह राम नाम की महिमा का गुणगान है। भगवान भोलेशंकर भी राम नाम जपते रहते हैं। संसार ही राम नाम से चल रहा है। राम नाम में पूरा ब्रह्मांड समाहित है। जीवन के हर पल हर क्षण में राम का चलन रहता है।
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बच्चों के जन्म में राम नाम का सोहर होता है। विवाह आदि मांगलिक कार्यों में श्रीराम के गीत गाए जाते हैं। श्रीराम को शिव का महामंत्र माना गया है। राम में शिव और शिव में राम विद्यमान हैं। इस अवसर पर कृष्ण सखा उद्धव महाराज, आचार्य महेंद्र त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष अशोकनगर राव साहब, अजय यादव, एसपी सिंह बघेल आदि प्रमुख लोग मौजूद रहे।
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प्रयाग पीठाधीश्वर स्वामी ओंकारानंद सरस्वती महाराज का ललितपुर में 25 मई को आगमन हुआ। वह यहां नौ दिवसीय रामकथा में भक्तों को राम कथा सुनाएंगे। साथ ही वह कुछ प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन भी करेंगे। शंकराचार्य के नाराहट आगमन एवं आयोजित कार्यक्रम को लेकर आचार्य महेंद्र त्रिपाठी ने 18 मई को जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर रामकथा के समय सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन कहीं भी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई। सुरक्षा व्यवस्था में की जा रही अनदेखी से उनके शिष्यों एवं ग्राम वासियों में रोष है।