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प्रधान के बर्ताव पर भड़के मजदूर, नहीं किया काम
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जमीन का समतलीकरण का काम हुआ बंद
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। ब्लाक बार के अंतर्गत ग्राम कारीटोरन में ग्राम प्रधान के बर्ताव पर श्रमिक भड़क उठे हैं। उन्होंने कार्यस्थल पर काम नहीं किया। इससे समतलीकरण कार्य नहीं कराया जा सका।
इन दिनों श्रमिकों के लिए मनरेगा जीवनदायिनी साबित हो रही है, लेकिन ब्लाक बार में ग्राम प्रधान और श्रमिकों के टकराव के कारण मनरेगा के काम परवान नहीं चढ़ पा रहे हैं। शनिवार को भंते के खेत पर चल रहा समतलीकरण कार्य रुक गया है। श्रमिकों ने प्रधान पर बुरा बर्ताव करने और मनमानी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि श्रमिकों को बैठेे-बैठे का पैसा नहीं मिलेगा, उन्हें समय-समय पर काम करना होगा। इस वजह से श्रमिक नाखुश हो गए।
ग्राम में दो जगहों पर काम कराया जा रहा है। भंते के खेत पर समतलीकरण के काम शुरू होना था। ग्राम प्रधान आए और कहने लगे कि लेट हो गए। ऐसे काम नहीं चलेगा। इससे दोनों में तनातनी बढ़ गई।
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- मनीराम
मनरेगा में श्रमिकों को काम मिलने की आश बनी थी, लेकिन इसमें भी श्रमिकों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जा रहा है। इस वजह से श्रमिक इसमें काम करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
- हरीराम अहिरवार
श्रमिक उतना ही काम करेंगे, जितनी उनमें क्षमता है। प्रधान चाहते हैं कि श्रमिक ज्यादा काम करें। इसी बात को लेकर श्रमिकों में नाराजगी है। अच्छा व्यवहार नहीं किया जा रहा है।
- माया
श्रमिक कोई कामचोर नहीं होता है। यदि उसे कामचोर ठहराया जाएगा तो लोग अपनी नाराजगी तो प्रकट करेंगे ही। ग्राम प्रधान को बातचीत करते हुए शालीनता दिखानी चाहिए।
- फूला
यदि ठीक तरीके से मनरेगा के कार्य कराए जाएं तो श्रमिकों को काम मिलेगा और गांव का भी विकास होगा। लेकिन, कुछ लोग ऐसा नहीं चाहते हैं, जिस वजह से मनरेगा के काम में बाधा उत्पन्न हो रही है।
- रामकुंवर
मनरेगा में जो मन से काम नहीं करेगा, उससे काम नहीं लिया जाएगा। ग्राम प्रधान कहते हैं कि इस्टीमेट कम है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा काम करना होगा। इस बात को लेकर ही श्रमिकों में नाराजगी है।
- दरऊ
सुबह और शाम ठंडक में कार्य करने के लिए निर्देशित किया तो श्रमिक काम करने में आनाकानी करने लगे। इस वजह से काम प्रभावित हुआ। रविवार को काम शुरू कराया जाएगा।
रामदयाल, ग्राम प्रधान, कारीटोरन
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इन दिनों श्रमिकों के लिए मनरेगा जीवनदायिनी साबित हो रही है, लेकिन ब्लाक बार में ग्राम प्रधान और श्रमिकों के टकराव के कारण मनरेगा के काम परवान नहीं चढ़ पा रहे हैं। शनिवार को भंते के खेत पर चल रहा समतलीकरण कार्य रुक गया है। श्रमिकों ने प्रधान पर बुरा बर्ताव करने और मनमानी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि श्रमिकों को बैठेे-बैठे का पैसा नहीं मिलेगा, उन्हें समय-समय पर काम करना होगा। इस वजह से श्रमिक नाखुश हो गए।
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ग्राम में दो जगहों पर काम कराया जा रहा है। भंते के खेत पर समतलीकरण के काम शुरू होना था। ग्राम प्रधान आए और कहने लगे कि लेट हो गए। ऐसे काम नहीं चलेगा। इससे दोनों में तनातनी बढ़ गई।
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- मनीराम
मनरेगा में श्रमिकों को काम मिलने की आश बनी थी, लेकिन इसमें भी श्रमिकों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जा रहा है। इस वजह से श्रमिक इसमें काम करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
- हरीराम अहिरवार
श्रमिक उतना ही काम करेंगे, जितनी उनमें क्षमता है। प्रधान चाहते हैं कि श्रमिक ज्यादा काम करें। इसी बात को लेकर श्रमिकों में नाराजगी है। अच्छा व्यवहार नहीं किया जा रहा है।
- माया
श्रमिक कोई कामचोर नहीं होता है। यदि उसे कामचोर ठहराया जाएगा तो लोग अपनी नाराजगी तो प्रकट करेंगे ही। ग्राम प्रधान को बातचीत करते हुए शालीनता दिखानी चाहिए।
- फूला
यदि ठीक तरीके से मनरेगा के कार्य कराए जाएं तो श्रमिकों को काम मिलेगा और गांव का भी विकास होगा। लेकिन, कुछ लोग ऐसा नहीं चाहते हैं, जिस वजह से मनरेगा के काम में बाधा उत्पन्न हो रही है।
- रामकुंवर
मनरेगा में जो मन से काम नहीं करेगा, उससे काम नहीं लिया जाएगा। ग्राम प्रधान कहते हैं कि इस्टीमेट कम है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा काम करना होगा। इस बात को लेकर ही श्रमिकों में नाराजगी है।
- दरऊ
सुबह और शाम ठंडक में कार्य करने के लिए निर्देशित किया तो श्रमिक काम करने में आनाकानी करने लगे। इस वजह से काम प्रभावित हुआ। रविवार को काम शुरू कराया जाएगा।
रामदयाल, ग्राम प्रधान, कारीटोरन