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पीएचसी : कहीं डॉक्टर नहीं तो कहीं स्टाफ की कमी
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ललितपुर। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 20 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं, लेकिन इन स्वास्थ्य केंद्रों पर कहीं स्टाफ की कमी है तो कहीं पर डॉक्टर तैनात नहीं हैं। इसके चलते मरीजों को जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज जाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। हैरत की बात तो यह है कि शनिवार को ग्राम पंचायत पारौन में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट पर सुबह 11 बजे तक ताला लटक रहा था। ऐसे में आसपास के गांवों से आए मरीज व तीमारदार डॉक्टर का इंतजार करते रहे। हालांकि विभागीय अधिकारी का कहना है कि बारिश के चलते स्टाफ नहीं पहुंचा था लेकिन 12 बजे तक सभी मरीजों को देख कर उन्हें उपचार दिया गया। पेश है तीन ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का हाल...।
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संसाधनों की कमी, नौ कर्मचारियों के भरोसे चल रही स्वास्थ्य सेवाएं
बानपुर। नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों की कमी के चलते मरीज और तीमारदार परेशान हैं। आलम यह है कि अस्पताल में एक्स-रे मशीन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वैक्सीन और इंजेक्शन सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज तो मौजूद है, लेकिन पर्याप्त बिजली न मिलने के कारण दवाइयों के खराब होने का खतरा बना रहता है। परिसर में रोशनी के लिए लगाई गईं 10 स्ट्रीट लाइटें भी लंबे समय से खराब पड़ी हैं। पेयजल की स्थिति भी चिंताजनक है। पानी की मुख्य टंकी फूटी होने के कारण पानी भर नहीं पाता, जिससे पूरा अस्पताल परिसर जलापूर्ति के लिए महज एक हैंडपंप पर निर्भर है। यहां एमबीबीएस (सर्जन) की आवश्यकता है क्योंकि एमएलसी (मेडिको लीगल सर्टिफिकेट) करने के लिए ग्रामीणों को ललितपुर या महरौनी जाना पड़ता है। अस्पताल में एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, एक वार्डबॉय, एक स्वीपर, दो टीबी एचबीओ और तीन स्टाफ नर्स कार्यरत हैं। डॉक्टर के मुताबिक ओपीडी में 75 मरीज पहुंचे, जिनमें मुख्य रूप से सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार, खुजली और एलर्जी से पीड़ित मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें दवाइयां दी गईं। संवाद
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फार्मासिस्ट के हवाले है मरीजों का उपचार
जाखलौन। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर न होने से क्षेत्र की करीब 20 हजार की आबादी को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिससे लोगों में भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर न होने से छोटी-छोटी बीमारी के लिए भी लोगों को जिला मुख्यालय या निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। शनिवार को इस केंद्र पर तैनात फार्मासिस्ट राकेश पाठक मरीज को देखकर दवा दे रहे थे, उन्होंने बताया कि यहां डॉक्टर व एएनएम तैनात नहीं हैं। संवाद
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पारोन पीएचसी पर 11 बजे तक लटका रहा ताला, मरीज करते रहे डॉक्टर का इंतजार
बार-पुलवारा। ब्लॉक बार अंतर्गत गांव पारौन स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के गेट पर शनिवार को सुबह 11 बजे तक मुख्य गेट पर ताला लटका रहा है। अस्पताल के बाहर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीज और तीमारदार डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे। एक मरीज ने अस्पताल के गेट पर लगे ताले का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया जिससे स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई। आनन-फानन में डॉक्टर अस्पताल पहुंचे और मरीजों का उपचार किया। सीएचसी बार के चिकित्साधीक्षक डॉ. केतन कुमार ने बताया कि खराब मौसम होने की वजह से संबंधित स्टाफ समय पर स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच सके थे। जानकारी मिलने पर डॉक्टर व स्टाफ को अस्पताल भेजा गया और दोपहर 12 बजे तक सभी मरीजों का उपचार कर दिया गया। उन्होंने स्टाफ को कड़ी चेतावनी देते हुए भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न होने देने के निर्देश दिए हैं। संवाद
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वर्जन
पीएचसी पर जो भी अव्यवस्थाएं हैं उनकी जानकारी लेकर दुरुस्त कराई जाएंगी।-डॉ वीरेंद्र सिंह, प्रभारी सीएमओ
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संसाधनों की कमी, नौ कर्मचारियों के भरोसे चल रही स्वास्थ्य सेवाएं
बानपुर। नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों की कमी के चलते मरीज और तीमारदार परेशान हैं। आलम यह है कि अस्पताल में एक्स-रे मशीन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वैक्सीन और इंजेक्शन सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज तो मौजूद है, लेकिन पर्याप्त बिजली न मिलने के कारण दवाइयों के खराब होने का खतरा बना रहता है। परिसर में रोशनी के लिए लगाई गईं 10 स्ट्रीट लाइटें भी लंबे समय से खराब पड़ी हैं। पेयजल की स्थिति भी चिंताजनक है। पानी की मुख्य टंकी फूटी होने के कारण पानी भर नहीं पाता, जिससे पूरा अस्पताल परिसर जलापूर्ति के लिए महज एक हैंडपंप पर निर्भर है। यहां एमबीबीएस (सर्जन) की आवश्यकता है क्योंकि एमएलसी (मेडिको लीगल सर्टिफिकेट) करने के लिए ग्रामीणों को ललितपुर या महरौनी जाना पड़ता है। अस्पताल में एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, एक वार्डबॉय, एक स्वीपर, दो टीबी एचबीओ और तीन स्टाफ नर्स कार्यरत हैं। डॉक्टर के मुताबिक ओपीडी में 75 मरीज पहुंचे, जिनमें मुख्य रूप से सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार, खुजली और एलर्जी से पीड़ित मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें दवाइयां दी गईं। संवाद
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फार्मासिस्ट के हवाले है मरीजों का उपचार
जाखलौन। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर न होने से क्षेत्र की करीब 20 हजार की आबादी को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिससे लोगों में भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर न होने से छोटी-छोटी बीमारी के लिए भी लोगों को जिला मुख्यालय या निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। शनिवार को इस केंद्र पर तैनात फार्मासिस्ट राकेश पाठक मरीज को देखकर दवा दे रहे थे, उन्होंने बताया कि यहां डॉक्टर व एएनएम तैनात नहीं हैं। संवाद
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पारोन पीएचसी पर 11 बजे तक लटका रहा ताला, मरीज करते रहे डॉक्टर का इंतजार
बार-पुलवारा। ब्लॉक बार अंतर्गत गांव पारौन स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के गेट पर शनिवार को सुबह 11 बजे तक मुख्य गेट पर ताला लटका रहा है। अस्पताल के बाहर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीज और तीमारदार डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे। एक मरीज ने अस्पताल के गेट पर लगे ताले का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया जिससे स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई। आनन-फानन में डॉक्टर अस्पताल पहुंचे और मरीजों का उपचार किया। सीएचसी बार के चिकित्साधीक्षक डॉ. केतन कुमार ने बताया कि खराब मौसम होने की वजह से संबंधित स्टाफ समय पर स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच सके थे। जानकारी मिलने पर डॉक्टर व स्टाफ को अस्पताल भेजा गया और दोपहर 12 बजे तक सभी मरीजों का उपचार कर दिया गया। उन्होंने स्टाफ को कड़ी चेतावनी देते हुए भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न होने देने के निर्देश दिए हैं। संवाद
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वर्जन
पीएचसी पर जो भी अव्यवस्थाएं हैं उनकी जानकारी लेकर दुरुस्त कराई जाएंगी।-डॉ वीरेंद्र सिंह, प्रभारी सीएमओ