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Lalitpur News: गुजरात, महाराष्ट्र और इंडोनेशिया भेजी जा रही जिले की मूंगफली
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद की मूंगफली उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाड़ु, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के साथ ही इंडोनेशिया में भी पसंद की जा रही है। जनपद की मंडी में आने वाली लगभग 45-50 फीसदी तक मूंगफली गुजरात के कांडला व मुद्रा पोर्ट से वहां भेजी जा रही है।
जनपद में जहां पिछले साल 12 से 15 हजार हेक्टेयर भूमि पर मूंगफली का उत्पादन हुआ। वहीं, इस साल किसानों ने 30 हजार हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर उत्पादन किया। इस वर्ष मूंगफली में रुचि दिखाने का असर उत्पादन पर भी दिखा है। पिछले वर्ष जहां जनपद में 18,315 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था, वहीं इस बार भी लगभग 43 हजार मीट्रिक टन उत्पादन होने का अनुमान है। गल्ला मंडी में ही अब तक लगभग पचास हजार क्विंटल तक मूंगफली की आवक हो चुकी है। गल्ला मंडी आने वाली मूंगफली मांग के अनुसार अन्य राज्यों गुजरात, महाराष्ट, तमिलनाड़ु, कर्नाटक व आंध्रप्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में भी भेजी जाती है।
व्यापारियों ने बताया कि यहां मिट्टी में उगाई जाने वाली देसी मूंगफली में मिठास होती है। खाद्य व्यजंनों में इसका उपयोग करने से वह काफी स्वादिष्ट हो जाता है। जिले की देसी मूंगफली की सबसे अधिक मांग इंडोनेशिया में है। जनपद की अधिकांश मूंगफली दाने के रूप में गुजरात के विभिन्न पोर्ट पर पहुंचाई जाती है। उत्पादन में वृद्धि से संभावना जताई जा रही है कि इस बार लगभग 20 हजार मीट्रिक टन मूंगफली विदेशों में भेजी जाएगी। वहीं पिछले वर्ष लगभग 11 हजार मीट्रिक टन से अधिक मूंगफली का निर्यात होने की संभावना जताई। जबकि इस बार भी अब तक जनपद से अच्छी आवक होने की संभावना जताई जा रही है।
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गल्ला मंडी में आई आवक के सापेक्ष लगभग 40 से 50 फीसदी तक मूंगफली का निर्यात गुजरात के बंदरगाहों से इंडोनेशिया भेजी जाती है। इसके अलावा महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में भेजी जाती हे। जबकि दक्षिण के तमिलनाड़ु, कर्नाटक व आंध्रप्रदेश के कई जनपदों में भेजी जाती है। - अनिल जैन अंचल, मूंगफली व्यापारी
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जनपद की मूंगफली के दाने बनाने के बाद 40 फीसदी से अधिक मूंगफली कांडला व अन्य पोर्ट से भेजी जाती है। जिले की मूंगफली में मिठास रहती है। इससे व्यंजनों में इसका इस्तेमाल करने से स्वादिष्ट हो जाते हैं। - नीतेश बिलौआ, मूंगफली व्यापारी
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ललितपुर। जनपद की मूंगफली उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाड़ु, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के साथ ही इंडोनेशिया में भी पसंद की जा रही है। जनपद की मंडी में आने वाली लगभग 45-50 फीसदी तक मूंगफली गुजरात के कांडला व मुद्रा पोर्ट से वहां भेजी जा रही है।
जनपद में जहां पिछले साल 12 से 15 हजार हेक्टेयर भूमि पर मूंगफली का उत्पादन हुआ। वहीं, इस साल किसानों ने 30 हजार हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर उत्पादन किया। इस वर्ष मूंगफली में रुचि दिखाने का असर उत्पादन पर भी दिखा है। पिछले वर्ष जहां जनपद में 18,315 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था, वहीं इस बार भी लगभग 43 हजार मीट्रिक टन उत्पादन होने का अनुमान है। गल्ला मंडी में ही अब तक लगभग पचास हजार क्विंटल तक मूंगफली की आवक हो चुकी है। गल्ला मंडी आने वाली मूंगफली मांग के अनुसार अन्य राज्यों गुजरात, महाराष्ट, तमिलनाड़ु, कर्नाटक व आंध्रप्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में भी भेजी जाती है।
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व्यापारियों ने बताया कि यहां मिट्टी में उगाई जाने वाली देसी मूंगफली में मिठास होती है। खाद्य व्यजंनों में इसका उपयोग करने से वह काफी स्वादिष्ट हो जाता है। जिले की देसी मूंगफली की सबसे अधिक मांग इंडोनेशिया में है। जनपद की अधिकांश मूंगफली दाने के रूप में गुजरात के विभिन्न पोर्ट पर पहुंचाई जाती है। उत्पादन में वृद्धि से संभावना जताई जा रही है कि इस बार लगभग 20 हजार मीट्रिक टन मूंगफली विदेशों में भेजी जाएगी। वहीं पिछले वर्ष लगभग 11 हजार मीट्रिक टन से अधिक मूंगफली का निर्यात होने की संभावना जताई। जबकि इस बार भी अब तक जनपद से अच्छी आवक होने की संभावना जताई जा रही है।
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गल्ला मंडी में आई आवक के सापेक्ष लगभग 40 से 50 फीसदी तक मूंगफली का निर्यात गुजरात के बंदरगाहों से इंडोनेशिया भेजी जाती है। इसके अलावा महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में भेजी जाती हे। जबकि दक्षिण के तमिलनाड़ु, कर्नाटक व आंध्रप्रदेश के कई जनपदों में भेजी जाती है। - अनिल जैन अंचल, मूंगफली व्यापारी
जनपद की मूंगफली के दाने बनाने के बाद 40 फीसदी से अधिक मूंगफली कांडला व अन्य पोर्ट से भेजी जाती है। जिले की मूंगफली में मिठास रहती है। इससे व्यंजनों में इसका इस्तेमाल करने से स्वादिष्ट हो जाते हैं। - नीतेश बिलौआ, मूंगफली व्यापारी