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धरती को पर्यावरण प्रदूषण से मनुष्य ही कर सकता मुक्त

Wed, 29 Jan 2020 01:09 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jan 2020 01:09 AM IST
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Only humans can free the earth from environmental pollution
दीपचंद्र चौधरी महाविद्यालय के कार्यक्रम उपस्थित छात्र छात्राएं - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। श्री दीपचंद्र चौधरी उच्च शिक्षा समूह के महाविद्यालय में पर्यावरण जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। जाने- माने पर्यावरणविद केदारनाथ गोस्वामी ने कहा कि मनुष्य ही धरती को पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त कर सकता है।
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महाविद्यालय सभागार में मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जलाकर सेमिनार का शुभारंभ किया गया। उन्होंने कहा कि जल, वायु, मिट्टी में प्रदूषण का धीमा जहर अब काम चलाऊ रवैये से हल नहीं होगा। इसके लिए समयबद्ध परिणाम देने का समय आ गया है। पृथ्वी 5.55 अरब वर्ष पहले अस्तित्व में आई और लगभग 3.80 अरब वर्ष पहले पृथ्वी के जलीय भाग में जीवन का उद्भव और विकास हुआ। अरबों साल के जीवन की क्रमिक विकास यात्रा के दौरान थलीय पौधों और वनस्पतियों का विकास हुआ। मनुष्य के शरीर में 62 प्रतिशत जल की मात्रा है। यदि मनुष्य को तीन दिन तक पीने का पानी नहीं मिले तो उसकी मृत्यु निश्चित है। जल संकट दिनों दिन भवावह होता जा रहा है। हमें जल स्रोतों का अभाव है।
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कॉलेज संस्थापक/ प्रबंधक कमलेश चौधरी ने कहा कि वर्षा के जल को संरक्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर भवनों की छत पर वाटर हारवेस्टिंग करना अच्छा विकल्प है, जिसे अनिवार्य किया जाना चाहिए। सांस्कृतिक सचिव रवींद्र दिवाकर ने कहा कि ओजोन परत की क्षीणता, वायुमंडल में कार्बन डाई आक्साइड के बढ़ते असर को देखते हुए पर्यावरण की समस्या के समाधान को कल पर नहीं टाला जा सकता है।
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प्राचार्य डा.जेएस तोमर ने सुझाव दिया कि सिकुड़ते संसाधन और बढ़ती जनसंख्या पर लगाम लगे। प्रोफेसर भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि पृथ्वी शुद्ध जल व वायु तथा आश्रय दे सकती है, पर प्रत्येक व्यक्ति के लालच और लोभ को पूरा नहीं कर सकती।

भू विज्ञान प्रोफेसर रामेंद्र कुमार ने कहा कि निर्माण और विकास रोकना असंभव है, पर, निर्वाहशील विकास को लाना तार्किक है। संचालन प्रोफेसर कामिनी जैन ने किया। इस मौके पर चौधरी नरेंद्र, प्रदीप, प्रवीण, विकास, गौरव, प्रोफेसर आदित्य मिश्रा, प्रोफेसर राकेश राजन, प्रो. नीलेश जैन, प्रो. पुष्पेंद्र वर्मा, प्रो. हासिम अली, प्रो. केपी कोरी, प्रो. सुरेंद्र साहू, प्रो. रामेंद्र कुमार, प्रो. एसबी सिंह, प्रो. अभिषेक रावत, प्रो. जीदास मौजूद रहे।
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