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छोटे भाईयों के शव देख बिलख पड़ी दोनों बहनें
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महरौनी/ललितपुर। महरौनी क्षेत्र के ग्राम अगौरा में तीनों बालक स्कूल में इंटरवल होने के चलते घर चले गए। घर में बस्ता रखकर वह खदान में भरे पानी में नहाने पहुंच गए, लेकिन किसी को घटना की अनहोनी का अंदाजा तक नहीं था। जब बालकों के शव खदान से निकाले गए तो दो छोटे भाइयों के शव देख उनकी दोनों बहनें बिलख पड़ी और कहती रहीं कि अब वह रक्षाबंधन पर किसके हाथ पर राखी बांधेगी।
ग्राम अगौरा निवासी चंद्रप्रताप सिंह एवं सूूरज सिंह की दो बड़ी बहनें हैं, जो उनसे काफी लगाव रखती थी। जब गांव में बालकों के डूबने की जानकारी लगी तो उनके परिवारजन को भी अंदाजा नहीं था कि वह उनके बच्चे हैं, क्योंकि बालकों को डूबते हुए किसी ने नहीं देखा था। इत्तिफाक से पड़ोसी गांव के चरवाहे भैंस चराने के लिए पहुंच गए और बालकों के कपड़े देखे। इससे बालकों के पानी में डूबने की आशंका पर उन्होंने ग्रामीणों को बुुलाया। जब बालक निकाले गए तो चंद्रप्रताप व सूरज सिंह की बहनें बिलख पड़ी और भाइयों को देखने के लिए झटपटाती रहीं। वहीं अमित बुनकर तीन भाइयों में बड़ा था। चंद्रप्रताप व सूरज सिंह दोनों सगे भाई हैं और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है।वह खेतों में ही घर बनाकर रह रहे हैं। उनके पिता ऊदल सिंह के पास एक एकड़ खेती की जमीन है, जिस पर खेती करता है और मजदूरी भी करता है। वहीं अमित के पिता अशोक के पास गांव में मात्र बीस डिसमिल जगह है। जबकि वह इंदौर में मजदूूरी करता है और वह वर्तमान में इंदौर में ही है। उसे घटना की जानकारी दे दी है।
रैंप से आगे बढ़ गए बालक
ग्रामीणों के अनुसार खदान करीब तीस से पैंतीस फुट तक गहरी है। उसके लिए रैंप भी बना है और यह रैंप पानी की गहराई शुरू होते ही खत्म हो जाता है। संभावना जताई जा रही है। बालक पहले रैंप पर नहाते थे, लेकिन वह रैंप के आगे बढ़ गए, जिससे वह रैंप से फिसलकर गहरे पानी में डूब गए होंगे।
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ग्राम अगौरा निवासी चंद्रप्रताप सिंह एवं सूूरज सिंह की दो बड़ी बहनें हैं, जो उनसे काफी लगाव रखती थी। जब गांव में बालकों के डूबने की जानकारी लगी तो उनके परिवारजन को भी अंदाजा नहीं था कि वह उनके बच्चे हैं, क्योंकि बालकों को डूबते हुए किसी ने नहीं देखा था। इत्तिफाक से पड़ोसी गांव के चरवाहे भैंस चराने के लिए पहुंच गए और बालकों के कपड़े देखे। इससे बालकों के पानी में डूबने की आशंका पर उन्होंने ग्रामीणों को बुुलाया। जब बालक निकाले गए तो चंद्रप्रताप व सूरज सिंह की बहनें बिलख पड़ी और भाइयों को देखने के लिए झटपटाती रहीं। वहीं अमित बुनकर तीन भाइयों में बड़ा था। चंद्रप्रताप व सूरज सिंह दोनों सगे भाई हैं और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है।वह खेतों में ही घर बनाकर रह रहे हैं। उनके पिता ऊदल सिंह के पास एक एकड़ खेती की जमीन है, जिस पर खेती करता है और मजदूरी भी करता है। वहीं अमित के पिता अशोक के पास गांव में मात्र बीस डिसमिल जगह है। जबकि वह इंदौर में मजदूूरी करता है और वह वर्तमान में इंदौर में ही है। उसे घटना की जानकारी दे दी है।
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रैंप से आगे बढ़ गए बालक
ग्रामीणों के अनुसार खदान करीब तीस से पैंतीस फुट तक गहरी है। उसके लिए रैंप भी बना है और यह रैंप पानी की गहराई शुरू होते ही खत्म हो जाता है। संभावना जताई जा रही है। बालक पहले रैंप पर नहाते थे, लेकिन वह रैंप के आगे बढ़ गए, जिससे वह रैंप से फिसलकर गहरे पानी में डूब गए होंगे।
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