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अब भूखे नहीं मरेंगे पशु
ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jan 2016 12:34 AM IST
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ललितपुर। सूखा की विभीषिका से जूझ रहे बुंदेलखंड में पशुओं के चारे के लिए सरकार ने सात करोड़ रुपए जारी कर दिए गए हैं, इसमें ललितपुर समेत सभी सातों जिलों के लिए एक-एक करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित की गई है।
समूचा बुंदेलखंड सूखे की चपेट में है। इस बार इतनी कम वर्षा हुई है कि दिसंबर माह से ही कुएं और अन्य जलस्रोत सूखने लगे हैं। सूखे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्राम डोंगरा का प्राचीन तालाब और बार के प्राचीन तालाबों में पानी नहीं बचा है।
बांसी में पिछले दो माह से पेयजल संकट चल रहा है, जिससे वहां पर टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। ज्यादातर गांवों में हैंडपंप जवाब दे गए हैं। हालातों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब जनवरी में यह स्थिति है तो आने वाले मई और जून माह में क्या हालात होंगे।
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किसान को पहले ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से रबी की फसल में नुकसान हुआ, इसके बाद कम वर्षा में खरीफ की फसल चौपट हो गई। अब फिर रबी की फसल पर संकट है। इस कारण किसान के पास अगले साल के लिए खाने का अनाज जुटाना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। किसान के पशुओं की स्थिति और भी खराब है।
बुंदेलखंड में अन्ना प्रथा के कारण ज्यादातर किसान पशुओं को छुट्टा छोड़ देते हैं, लेकिन इस बार छुट्टा छोड़ने के बाद भी पशुओं के लिए स्वयं को जीवित रख पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव सुरेश चंद्रा ने वित्त वर्ष 2015-16 में सूखा प्रभावित बुंदेलखंड के सभी सात जिले झांसी, ललितपुर, जालौन, बांदा, चित्रकूट, महोबा और हमीरपुर के लिए आपदा मोचक निधि से सात करोड़ रुपए (प्रत्येक जिले को एक-एक करोड़ रुपए) जारी कर दिए हैं। इस राशि से पशुओं के लिए चारा और दाना आपूर्ति का प्रावधान किया गया है, ताकि जानवरों को भूख और प्यास से होने वाली मौतों से बचाया जा सके।
निर्देश दिए गए हैं कि इस धनराशि का उपयोग अन्य किसी कार्य के लिए कतई न किया जाए। राहत राशि की प्राप्ति एवं व्यक्ति की पहचान के प्रमाण के रूप में रसीद पर स्थानीय लेखपाल व ग्राम प्रधान के हस्ताक्षर कर इसे अभिलेख में रखा जाए। साथ ही वितरित की गई राशि गांव सभा के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जाए। यह भी निर्देश दिए गए हैं कि आपदा समिति लगातार इसकी मॉनीटरिंग करेगी।
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समूचा बुंदेलखंड सूखे की चपेट में है। इस बार इतनी कम वर्षा हुई है कि दिसंबर माह से ही कुएं और अन्य जलस्रोत सूखने लगे हैं। सूखे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्राम डोंगरा का प्राचीन तालाब और बार के प्राचीन तालाबों में पानी नहीं बचा है।
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बांसी में पिछले दो माह से पेयजल संकट चल रहा है, जिससे वहां पर टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। ज्यादातर गांवों में हैंडपंप जवाब दे गए हैं। हालातों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब जनवरी में यह स्थिति है तो आने वाले मई और जून माह में क्या हालात होंगे।
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किसान को पहले ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से रबी की फसल में नुकसान हुआ, इसके बाद कम वर्षा में खरीफ की फसल चौपट हो गई। अब फिर रबी की फसल पर संकट है। इस कारण किसान के पास अगले साल के लिए खाने का अनाज जुटाना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। किसान के पशुओं की स्थिति और भी खराब है।
बुंदेलखंड में अन्ना प्रथा के कारण ज्यादातर किसान पशुओं को छुट्टा छोड़ देते हैं, लेकिन इस बार छुट्टा छोड़ने के बाद भी पशुओं के लिए स्वयं को जीवित रख पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव सुरेश चंद्रा ने वित्त वर्ष 2015-16 में सूखा प्रभावित बुंदेलखंड के सभी सात जिले झांसी, ललितपुर, जालौन, बांदा, चित्रकूट, महोबा और हमीरपुर के लिए आपदा मोचक निधि से सात करोड़ रुपए (प्रत्येक जिले को एक-एक करोड़ रुपए) जारी कर दिए हैं। इस राशि से पशुओं के लिए चारा और दाना आपूर्ति का प्रावधान किया गया है, ताकि जानवरों को भूख और प्यास से होने वाली मौतों से बचाया जा सके।
निर्देश दिए गए हैं कि इस धनराशि का उपयोग अन्य किसी कार्य के लिए कतई न किया जाए। राहत राशि की प्राप्ति एवं व्यक्ति की पहचान के प्रमाण के रूप में रसीद पर स्थानीय लेखपाल व ग्राम प्रधान के हस्ताक्षर कर इसे अभिलेख में रखा जाए। साथ ही वितरित की गई राशि गांव सभा के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जाए। यह भी निर्देश दिए गए हैं कि आपदा समिति लगातार इसकी मॉनीटरिंग करेगी।