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उर्द महंगा, मंडी दौड़े किसान
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Thu, 01 Oct 2015 02:06 AM IST
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ललितपुर। नवीन गल्ला मंडी में बीते राजे उर्द की कीमत दस हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाने से बुधवार को किसानों का रैला उर्द बेचने के लिए टूट पड़ा। ट्रैक्टरों में उर्द भरकर आए किसानों की लंबी कतार लगने से झांसी रोड, नवीन गल्ला मंडी परिसर सहित आसपास के अन्य स्थानों पर जाम लग गया। दोपहर साढ़े बारह बजे से डेढ़ घंटे तक वाहनों की रेलमपेल रही। इस दौरान वाहन रेंगते नजर आए। जाम खुलवाने में पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
नवीन कृषि उत्पादन मंडी समिति को गल्ला की खरीद को देखते हुए प्रदेश की चौथी, चित्रकूट व झांसी मंडल की सबसे बड़ी मंडियों में गिना जाता है।
मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से लगी इस मंडी में जिंसों की अच्छी खासी आवक होती है। लेकिन, पिछले दो सीजन से किसानों पर प्रकृति की मार पड़ने के कारण मंडी में खरीद- फरोख्त काफी कम हो गई है। पिछले साल खरीफ के सीजन में उर्द की शुरुआत 3,750 रुपए प्रति क्विंटल से लेकर 4,800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चलती रही। लेकिन, इस बार करीब 15 दिन पहले शुरू हुए सीजन में उर्द की शुरुआत ही सात हजार रुपये से हुई। करीब एक सप्ताह तक 8 हजार रुपये के आसपास रेट रहे। तीन दिन पहले यह दाम नौ हजार रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गए। मंगलवार को उर्द 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। साथ ही शाम तक इसके दाम 10,300 रुपये तक तक जा पहुंचें।
बढ़ते दामों की जानकारी जनपद के किसानों तक पहुंची तो बुधवार को नवीन गल्ला मंडी में किसानों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दोपहर बारह बजे तक ट्रैक्टर, ट्रक, लोडिंग आपे सहित अन्य वाहन मंडी की ओर जाने लगे। हालात यह हो गया कि मंडी परिसर के अंदर से लेकर झांसी रोड तक सैकड़ों की संख्या में वाहन जाम में फंस गए। बड़ी संख्या में मंडी की ओर जाने वाले वाहन व झांसी की ओर से नगर की ओर जाने वाले वाहन मुख्य गेट के पास फंसते चले गए, जिससे वाहन रेंगते नजर आए।
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जाम को खुलवाने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। मंडी चौकी प्रभारी संत कुमार यादव सहित पुलिस बल ने वाहनों को अलग- अलग रूट में परिवर्तन करके जाम खुलवाया। व्यापारियों की मानें तो मंडी में बुधवार को 30 से 35 हजार कुंतल उर्द व मूंग आने से दाम घटने शुरू हो गए। करीब 1,000 से डेढ़ हजार रुपये तक प्रति कुंतल दाम गिरने से किसानों को मायूसी हाथ लगी।
बुधवार को नवीन गल्ला मंडी में उर्द 8,500 रुपये से लेकर 9,200 रुपये प्रति कुंतल की दर से बिकी। वहीं, मूंग के दाम भी कम रहे। 8,600 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकनी वाली बुधवार को 300-400 रुपये कम दाम पर बिकी। इससे किसान मायूस हो गए। कई किसानों की दोपहर बाद की डाक फाइनल हो गई, लेकिन बहुत से किसान शाम तक इंतजार करते रहे। इसके बाद भी उनको उम्मीद के हिसाब से दाम नहीं मिल सके।
कहां से आया इतना जिंस ?
व्यापारियों व किसानों की मानें तो इस बार पठारी भूमि को छोड़कर काली मिट्टी में फसल बोने वाले किसान पूरी तरह बर्बाद हो गए। कृषि विभाग की उर्द की फसल आजाद -2 किस्म ने तो अच्छा उत्पादन दिया, जबकि आजाद -3 के पौधों में फलियां बहुत कम लगीं। हालांकि, जिले की जो स्थिति है उससे अधिकांश किसानों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। बुधवार को मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से जिंस आने से आवक अधिक हो गई। जानकारों की मानें तो साठ प्रतिशत बाहरी माल मंडी में आया था।
व्यापारी कैसे तय करते जिंस के दाम?
नवीन गल्ला मंडी में 450 कच्चे व पक्के आढ़तिया शामिल हैं। यह आढ़तिया दक्षिण भारत की चेन्नई सहित अन्य मंडियों के अलावा मुंबई क्षेत्र की मंडियों से जुड़े हैं। उक्त मंडियों में दाम उछलने से जनपद की मंडी में भी भाव चढ़ने शुरू हो जाते हैं। मंगलवार की सुबह अचानक दाम बढ़ गए। हालांकि, बुधवार को 300 रुपए से 500 रुपए घटकर दाम दस हजार से नीचे चले गए। इसका असर जिले की मंडी में भी देखने मिला और उर्द अधिकतम दर 9,200 व 9,300 रुपए प्रति कुंतल तक ही बिक सकी।
मंडी में वर्ष भर होता रहता खेल
अफसरों ने बताया कि मंगलवार को 8,381 कुंतल आवक रही, जबकि मंडी से कितना माल बाहर गया वह नहीं बता पाए। हालांकि, सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन कैमरे काम करते हैं या नहीं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। अफसरों की मौजूदगी में किसानों के माल की बोली लगनी चाहिए, लेकिन अफसर कभी परिसर में घूमना उचित नहीं समझते हैं। इस संबंध में मंडी सचिव अनिल कुमार का कहना है कि कर्मचारियों की कमी के चलते बोली लगवाना संभव नहीं है।
शोपीस बनी पानी की टंकी
गल्ला मंडी से पिछले साल 17.68 करोड़ रुपए मंडी शुल्क वसूला गया। विकास शुल्क के नाम पर भी धनराशि ली गई। लेकिन, किसानों को मिलने वाली सुविधाओं के हाल बेहाल हैं। पानी की टंकी शोपीस बनी हुई है। हालांकि, जिम्मेदार कहते हैं कि इसके लिए जल संस्थान जिम्मेदार है। मंडी को आने वाली पाइप लाइन में घरेलू कनेक्शन दे दिए गए हैं। ऐसे में तीन दर्जन से अधिक हैंडपंपों से ही किसान पानी पी रहे हैं।
किसानों को लूट रहे कबूतरा
ट्रैक्टर में माल भरकर मंडी आने वाले किसानों को कबूतरा जाति के लोग लूटने का काम कर रहे हैं। पनारी, बाई पास, चीरा आदि स्थानों पर दो पहिया वाहन से आने वाले उक्त लोग गुलेल मारकर ट्राली पर बैठे किसान को घायल करते हैं और फिर पीछे- पीछे बोरियां पटककर बाइक पर रखकर रफूचक्कर हो जाते हैं। व्यापारियों की मानें तो एक दिन में एक दर्जन ऐसी घटनाएं किसानों के साथ हो रही हैं।
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नवीन कृषि उत्पादन मंडी समिति को गल्ला की खरीद को देखते हुए प्रदेश की चौथी, चित्रकूट व झांसी मंडल की सबसे बड़ी मंडियों में गिना जाता है।
मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से लगी इस मंडी में जिंसों की अच्छी खासी आवक होती है। लेकिन, पिछले दो सीजन से किसानों पर प्रकृति की मार पड़ने के कारण मंडी में खरीद- फरोख्त काफी कम हो गई है। पिछले साल खरीफ के सीजन में उर्द की शुरुआत 3,750 रुपए प्रति क्विंटल से लेकर 4,800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चलती रही। लेकिन, इस बार करीब 15 दिन पहले शुरू हुए सीजन में उर्द की शुरुआत ही सात हजार रुपये से हुई। करीब एक सप्ताह तक 8 हजार रुपये के आसपास रेट रहे। तीन दिन पहले यह दाम नौ हजार रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गए। मंगलवार को उर्द 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। साथ ही शाम तक इसके दाम 10,300 रुपये तक तक जा पहुंचें।
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बढ़ते दामों की जानकारी जनपद के किसानों तक पहुंची तो बुधवार को नवीन गल्ला मंडी में किसानों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दोपहर बारह बजे तक ट्रैक्टर, ट्रक, लोडिंग आपे सहित अन्य वाहन मंडी की ओर जाने लगे। हालात यह हो गया कि मंडी परिसर के अंदर से लेकर झांसी रोड तक सैकड़ों की संख्या में वाहन जाम में फंस गए। बड़ी संख्या में मंडी की ओर जाने वाले वाहन व झांसी की ओर से नगर की ओर जाने वाले वाहन मुख्य गेट के पास फंसते चले गए, जिससे वाहन रेंगते नजर आए।
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जाम को खुलवाने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। मंडी चौकी प्रभारी संत कुमार यादव सहित पुलिस बल ने वाहनों को अलग- अलग रूट में परिवर्तन करके जाम खुलवाया। व्यापारियों की मानें तो मंडी में बुधवार को 30 से 35 हजार कुंतल उर्द व मूंग आने से दाम घटने शुरू हो गए। करीब 1,000 से डेढ़ हजार रुपये तक प्रति कुंतल दाम गिरने से किसानों को मायूसी हाथ लगी।
बुधवार को नवीन गल्ला मंडी में उर्द 8,500 रुपये से लेकर 9,200 रुपये प्रति कुंतल की दर से बिकी। वहीं, मूंग के दाम भी कम रहे। 8,600 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकनी वाली बुधवार को 300-400 रुपये कम दाम पर बिकी। इससे किसान मायूस हो गए। कई किसानों की दोपहर बाद की डाक फाइनल हो गई, लेकिन बहुत से किसान शाम तक इंतजार करते रहे। इसके बाद भी उनको उम्मीद के हिसाब से दाम नहीं मिल सके।
कहां से आया इतना जिंस ?
व्यापारियों व किसानों की मानें तो इस बार पठारी भूमि को छोड़कर काली मिट्टी में फसल बोने वाले किसान पूरी तरह बर्बाद हो गए। कृषि विभाग की उर्द की फसल आजाद -2 किस्म ने तो अच्छा उत्पादन दिया, जबकि आजाद -3 के पौधों में फलियां बहुत कम लगीं। हालांकि, जिले की जो स्थिति है उससे अधिकांश किसानों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। बुधवार को मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से जिंस आने से आवक अधिक हो गई। जानकारों की मानें तो साठ प्रतिशत बाहरी माल मंडी में आया था।
व्यापारी कैसे तय करते जिंस के दाम?
नवीन गल्ला मंडी में 450 कच्चे व पक्के आढ़तिया शामिल हैं। यह आढ़तिया दक्षिण भारत की चेन्नई सहित अन्य मंडियों के अलावा मुंबई क्षेत्र की मंडियों से जुड़े हैं। उक्त मंडियों में दाम उछलने से जनपद की मंडी में भी भाव चढ़ने शुरू हो जाते हैं। मंगलवार की सुबह अचानक दाम बढ़ गए। हालांकि, बुधवार को 300 रुपए से 500 रुपए घटकर दाम दस हजार से नीचे चले गए। इसका असर जिले की मंडी में भी देखने मिला और उर्द अधिकतम दर 9,200 व 9,300 रुपए प्रति कुंतल तक ही बिक सकी।
मंडी में वर्ष भर होता रहता खेल
अफसरों ने बताया कि मंगलवार को 8,381 कुंतल आवक रही, जबकि मंडी से कितना माल बाहर गया वह नहीं बता पाए। हालांकि, सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन कैमरे काम करते हैं या नहीं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। अफसरों की मौजूदगी में किसानों के माल की बोली लगनी चाहिए, लेकिन अफसर कभी परिसर में घूमना उचित नहीं समझते हैं। इस संबंध में मंडी सचिव अनिल कुमार का कहना है कि कर्मचारियों की कमी के चलते बोली लगवाना संभव नहीं है।
शोपीस बनी पानी की टंकी
गल्ला मंडी से पिछले साल 17.68 करोड़ रुपए मंडी शुल्क वसूला गया। विकास शुल्क के नाम पर भी धनराशि ली गई। लेकिन, किसानों को मिलने वाली सुविधाओं के हाल बेहाल हैं। पानी की टंकी शोपीस बनी हुई है। हालांकि, जिम्मेदार कहते हैं कि इसके लिए जल संस्थान जिम्मेदार है। मंडी को आने वाली पाइप लाइन में घरेलू कनेक्शन दे दिए गए हैं। ऐसे में तीन दर्जन से अधिक हैंडपंपों से ही किसान पानी पी रहे हैं।
किसानों को लूट रहे कबूतरा
ट्रैक्टर में माल भरकर मंडी आने वाले किसानों को कबूतरा जाति के लोग लूटने का काम कर रहे हैं। पनारी, बाई पास, चीरा आदि स्थानों पर दो पहिया वाहन से आने वाले उक्त लोग गुलेल मारकर ट्राली पर बैठे किसान को घायल करते हैं और फिर पीछे- पीछे बोरियां पटककर बाइक पर रखकर रफूचक्कर हो जाते हैं। व्यापारियों की मानें तो एक दिन में एक दर्जन ऐसी घटनाएं किसानों के साथ हो रही हैं।