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पूरे साल लड़खड़ाती रही शहर की यातायात व्यवस्था
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जेल चौराहे के पास ब्याना नाला का पुल
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। शहर के वाशिंदों को संकरे पुलों की समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। बीते महीनों में शहजाद नदी एवं ब्याना के पुल का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था लेकिन इस मद में धनराशि संबंधित विभाग को प्राप्त नहीं हो सकी, इस कारण पूरे साल शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह ध्वस्त रही।
शहर में नई बस्तियों एवं कालोनियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। तमाम लोग गांव से आकर शहर में बस गए हैं, इससे सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ता ही जा रहा है। इसमें दुपहिया वाहनों की संख्या कुछ ज्यादा ही हो गई है। वहीं, बढ़ते वाहनों क ी तुलना में शहर में सड़क व पुल नहीं बन सके हैं। इसमें सबसे बड़े बाधक संकरे पुल बन गए हैं। जिस समय शहजाद नदी एवं ब्याने नाले पर पुल का निर्माण किया गया था, उस दौर में कम ही वाहन इन पुलों से निकलते थे। वर्तमान में परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। वर्तमान में इन पुलों पर अक्सर जाम जैसे हालात बन जाते हैं। बीते महीनों में विभागीय अफसरों ने इन पर ध्यान देते हुए नए पुलों के निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कराए थे। इसमें ब्याना नाले पर नए पुल का आगणन पीडब्ल्यूडी ने लगभग पांच करोड़ रुपये का बनाया। वहीं, शहजाद नदी के पुल की लंबाई साठ मीटर से अधिक होने के कारण इसके स्टीमेट बनाने की जिम्मेदारी ब्रिज कारपोरेशन को सौंपी गई। शासन ने नदी व नाले के पुल के प्रस्ताव पर एक पैसा भी जारी नहीं किया है, जिससे नए पुल का निर्माण एक सपना बनकर रह गया है।
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शहजाद नदी का पुल काफी पुराना हो गया है, इस कारण इस पुल से भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित की जा चुकी है। कभी कभार इस पुल से बड़े वाहन भी निकल जाते हैं, जो जानमाल की दृष्टि से खतरनाक साबित हो सकते हैं।-राकेश कुमार जैन
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सहालग के दिनों में शहजाद नदी व ब्याना नाला पुल से निकलना मुश्किल हो जाता है। यदि बारात गुजर रही हो तो चंद मिनटों में वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।- अब्दुल लतीफ
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शहजाद नदी के संकरे पुल से यातायात की समस्या तो है ही, साथ ही बांध के गेट खुलने पर पुल पानी में डूब जाता है। कई बार पुल की द्वारियों में कचरा फंसने पर बाढ़ जैसा दृश्य बन जाता है।- हरविंदर सिंह सलूजा, उपाध्यक्ष श्री गुरु सिंह सभा
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यातायात को सुगम बनाने के लिए चौड़ी सड़कें व पुल होना आवश्यक है। अन्यथा, यातायात को संभालना मुश्किल हो जाता है। शहर में कुछ ऐसा ही हाल है। यहां लोगों को आए दिन जाम की स्थितियों से जूझना पड़ता है।
ओपी रिछारिया
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यातायात की समस्या लंबे समय से चली आ रही है। इनमें जेल चौराहे के पास ब्याना नाला का पुल व शहजाद नदी का पुल शामिल है। इसके अलावा पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास का पुल क्षतिग्रस्त पड़ा है। लोक निर्माण विभाग ने इन दोनों के प्रस्ताव शासन को भेजे लेकिन धनराशि नहीं मिल पाई। ऐसे में समस्या जस की तस बनी हुई है।
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ब्याना नाले का करीब पांच करोड़ रुपये का एस्टीमेट शासन को भेजा जा चुका है। शहजाद नदी के पुल का एस्टीमेट ब्रिज कारपोरेशन द्वारा बनाया जाएगा।
सुबोध कुमार
सहायक अभियंता
लोक निर्माण विभाग
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शहर में नई बस्तियों एवं कालोनियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। तमाम लोग गांव से आकर शहर में बस गए हैं, इससे सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ता ही जा रहा है। इसमें दुपहिया वाहनों की संख्या कुछ ज्यादा ही हो गई है। वहीं, बढ़ते वाहनों क ी तुलना में शहर में सड़क व पुल नहीं बन सके हैं। इसमें सबसे बड़े बाधक संकरे पुल बन गए हैं। जिस समय शहजाद नदी एवं ब्याने नाले पर पुल का निर्माण किया गया था, उस दौर में कम ही वाहन इन पुलों से निकलते थे। वर्तमान में परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। वर्तमान में इन पुलों पर अक्सर जाम जैसे हालात बन जाते हैं। बीते महीनों में विभागीय अफसरों ने इन पर ध्यान देते हुए नए पुलों के निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कराए थे। इसमें ब्याना नाले पर नए पुल का आगणन पीडब्ल्यूडी ने लगभग पांच करोड़ रुपये का बनाया। वहीं, शहजाद नदी के पुल की लंबाई साठ मीटर से अधिक होने के कारण इसके स्टीमेट बनाने की जिम्मेदारी ब्रिज कारपोरेशन को सौंपी गई। शासन ने नदी व नाले के पुल के प्रस्ताव पर एक पैसा भी जारी नहीं किया है, जिससे नए पुल का निर्माण एक सपना बनकर रह गया है।
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शहजाद नदी का पुल काफी पुराना हो गया है, इस कारण इस पुल से भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित की जा चुकी है। कभी कभार इस पुल से बड़े वाहन भी निकल जाते हैं, जो जानमाल की दृष्टि से खतरनाक साबित हो सकते हैं।-राकेश कुमार जैन
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सहालग के दिनों में शहजाद नदी व ब्याना नाला पुल से निकलना मुश्किल हो जाता है। यदि बारात गुजर रही हो तो चंद मिनटों में वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।- अब्दुल लतीफ
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शहजाद नदी के संकरे पुल से यातायात की समस्या तो है ही, साथ ही बांध के गेट खुलने पर पुल पानी में डूब जाता है। कई बार पुल की द्वारियों में कचरा फंसने पर बाढ़ जैसा दृश्य बन जाता है।- हरविंदर सिंह सलूजा, उपाध्यक्ष श्री गुरु सिंह सभा
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यातायात को सुगम बनाने के लिए चौड़ी सड़कें व पुल होना आवश्यक है। अन्यथा, यातायात को संभालना मुश्किल हो जाता है। शहर में कुछ ऐसा ही हाल है। यहां लोगों को आए दिन जाम की स्थितियों से जूझना पड़ता है।
ओपी रिछारिया
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यातायात की समस्या लंबे समय से चली आ रही है। इनमें जेल चौराहे के पास ब्याना नाला का पुल व शहजाद नदी का पुल शामिल है। इसके अलावा पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास का पुल क्षतिग्रस्त पड़ा है। लोक निर्माण विभाग ने इन दोनों के प्रस्ताव शासन को भेजे लेकिन धनराशि नहीं मिल पाई। ऐसे में समस्या जस की तस बनी हुई है।
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ब्याना नाले का करीब पांच करोड़ रुपये का एस्टीमेट शासन को भेजा जा चुका है। शहजाद नदी के पुल का एस्टीमेट ब्रिज कारपोरेशन द्वारा बनाया जाएगा।
सुबोध कुमार
सहायक अभियंता
लोक निर्माण विभाग

शहजाद नदी के पुल पर लगा जाम- फोटो : LALITPUR