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छेड़छाड़ का विरोध करने पर मारा था ऋतिक को
lalitpur
Updated Mon, 31 Jul 2017 12:54 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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बहन के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने की कीमत ऋतिक को अपनी जान देकर गंवानी पड़ी। उसके माता-पिता द्वारा आमरण अनशन की धमकी देने पर चेती पुलिस ने तत्परता दिखाई और मामले का खुलासा किया। एडीजी ने खुलासा करने वाली टीम को 15 हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की है।
तालबेहट थाना क्षेत्र के सुनौरी निवासी वासुदेव पटैरिया का पुत्र ऋतिक अपनी बहन के साथ रहकर तालबेहट में पढ़ाई करता था। कस्बे के रामनगर खांदी निवासी मयंक पुत्र महेश प्रसाद चौबे उसकी बहन को परेशान करता था। ऋतिक ने उसका विरोध किया। इस पर मयंक ने जीजीआईसी के सामने रहने वाले जिला पंचायत सदस्य उदय प्रताप सिंह उर्फ गुड्डू यादव पुत्र महेंद्र पाल सिंह यादव पूर्व ब्लाक प्रमुख के साथ मिलकर ऋतिक की हत्या की योजना बनाई। 22 मई 2016 की रात दोनों ने अपने साथी खांदी निवासी जितेंद्र पाठक और ड्राइवर मनोज झा के साथ घर से बुलाकर ऋतिक को गाड़ी में डाला और गुड्डू यादव के घर के पास ही स्थित उसके फार्म हाउस पर ले गए। जहां मयंक चौबे और खांदी निवासी जितेंद्र पाठक ने गुड्डू के साथ मिलकर शराब पी। पूर्वनियोजित रणनीति के तहत नशे में धुत होकर उन्होंने ऋतिक को पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद गुड्डू ने अपने दोस्त से कार मंगवाकर उसमें डालकर ऋतिक को घायलावस्था में ही फार्म हाउस से ले गए। इसके बाद रास्ते में कई बार गुड्डू ने ऋतिक के साथ मारपीट की, जिससे ऋतिक की मौत हो गई। ड्राइवर मनोज ने मारपीट का विरोध किया तो गुड्डू ने उसे भी पीट दिया। आरोपी उसके शव को बेतवा नदी में फेंक कर भाग गए। मामले की जांच में जुटी बार पुलिस ने ड्राइवर मनोज झा पूछताछ की तो पूरी कहानी खुलकर सामने आ गई।
पुलिस ने मयंक चौबे, जितेंद्र पाठक और मनोज झा को गिरफ्तार कर लिया, जबकि मुख्य आरोपी उदय प्रताप सिंह फरार हो गया।
हो चुकी थी पंचायत
मयंक चौबे द्वारा परेशान करने की बात ऋतिक की बहन ने परिजनों को बताई थी। तब परिजनों ने कस्बे के संभ्रात लोगों के माध्यम से मयंक को समझाकर मामले को शांत कर दिया। इसकी जानकारी होने पर रितिक ने भी कई बार मयंक को बुरा-भला कहा। इससे क्षुब्ध होकर मयंक ने गुड्डू यादव के साथ मिलकर ऋतिक को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
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पुलिस ने ही दबाए रखा मामला
एक ओर जहां ऋतिक के परिजन न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे थे। वहीं पुलिस अधिकारी सत्ता के दबाव में इस मामले को दबाकर रखे थे। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने इस मामले के साक्ष्य मिटाने और जांच को गुमराह करने की भरसक कोशिश की। जानकारी के अनुसार परिजनों ने पहले ही इन आरोपियों के नाम बताए थे। लेकिन पुलिस सत्ता के दबाव में आकर कार्रवाई नहीं की। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद पुलिस ने इस मामले का खुलासा किया
दो पर पहले भी हुई कार्रवाई
पकड़े गए मयंक चौबे पर पुलिस ने 2013 में यूपी गुण्डा एक्ट की कार्रवाई की थी। जबकि जितेंद्र पाठक पर पुलिस ने 2014 में जुआ अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी।
इस टीम ने किया खुलासा
खुलासा करने वाली टीम में बार थानाध्यक्ष रामसहाय सिंह, तालबेहट थानाध्यक्ष निगवेंद्र प्रताप सिंह, बार थाने के पुलिस कर्मचारी सत्यप्रकाश, उमेश पटेल, सुनील कुमार, अमित कुमार, मनोज कुमार, राजबीर सिंह शामिल रहे। खुलासा करने वाली टीम को एडीजी ने 15 हजार रुपये और एसपी ने पांच हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।
परिवार ने जताया खाकी पर विश्वास
अपने बेटे ऋतिक की हत्या के बाद पुलिस की हीलाहवाली से क्षुब्ध मां प्रीति का पुलिस से भरोसा उठ गया था। रविवार को खुलासे के दौरान आरोपियों को देख पीड़ित परिवार फफक-फफक कर रो पड़ा। ऋतिक की मां ने बताया कि न्याय न मिलते देख खाकी से भरोसा उठ गया था। लेकिन बार थानाध्यक्ष ने इस हत्याकांड का खुलासा कर मेरा खाकी पर फिर से विश्वास लौटा दिया है।
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तालबेहट थाना क्षेत्र के सुनौरी निवासी वासुदेव पटैरिया का पुत्र ऋतिक अपनी बहन के साथ रहकर तालबेहट में पढ़ाई करता था। कस्बे के रामनगर खांदी निवासी मयंक पुत्र महेश प्रसाद चौबे उसकी बहन को परेशान करता था। ऋतिक ने उसका विरोध किया। इस पर मयंक ने जीजीआईसी के सामने रहने वाले जिला पंचायत सदस्य उदय प्रताप सिंह उर्फ गुड्डू यादव पुत्र महेंद्र पाल सिंह यादव पूर्व ब्लाक प्रमुख के साथ मिलकर ऋतिक की हत्या की योजना बनाई। 22 मई 2016 की रात दोनों ने अपने साथी खांदी निवासी जितेंद्र पाठक और ड्राइवर मनोज झा के साथ घर से बुलाकर ऋतिक को गाड़ी में डाला और गुड्डू यादव के घर के पास ही स्थित उसके फार्म हाउस पर ले गए। जहां मयंक चौबे और खांदी निवासी जितेंद्र पाठक ने गुड्डू के साथ मिलकर शराब पी। पूर्वनियोजित रणनीति के तहत नशे में धुत होकर उन्होंने ऋतिक को पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद गुड्डू ने अपने दोस्त से कार मंगवाकर उसमें डालकर ऋतिक को घायलावस्था में ही फार्म हाउस से ले गए। इसके बाद रास्ते में कई बार गुड्डू ने ऋतिक के साथ मारपीट की, जिससे ऋतिक की मौत हो गई। ड्राइवर मनोज ने मारपीट का विरोध किया तो गुड्डू ने उसे भी पीट दिया। आरोपी उसके शव को बेतवा नदी में फेंक कर भाग गए। मामले की जांच में जुटी बार पुलिस ने ड्राइवर मनोज झा पूछताछ की तो पूरी कहानी खुलकर सामने आ गई।
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पुलिस ने मयंक चौबे, जितेंद्र पाठक और मनोज झा को गिरफ्तार कर लिया, जबकि मुख्य आरोपी उदय प्रताप सिंह फरार हो गया।
हो चुकी थी पंचायत
मयंक चौबे द्वारा परेशान करने की बात ऋतिक की बहन ने परिजनों को बताई थी। तब परिजनों ने कस्बे के संभ्रात लोगों के माध्यम से मयंक को समझाकर मामले को शांत कर दिया। इसकी जानकारी होने पर रितिक ने भी कई बार मयंक को बुरा-भला कहा। इससे क्षुब्ध होकर मयंक ने गुड्डू यादव के साथ मिलकर ऋतिक को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
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पुलिस ने ही दबाए रखा मामला
एक ओर जहां ऋतिक के परिजन न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे थे। वहीं पुलिस अधिकारी सत्ता के दबाव में इस मामले को दबाकर रखे थे। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने इस मामले के साक्ष्य मिटाने और जांच को गुमराह करने की भरसक कोशिश की। जानकारी के अनुसार परिजनों ने पहले ही इन आरोपियों के नाम बताए थे। लेकिन पुलिस सत्ता के दबाव में आकर कार्रवाई नहीं की। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद पुलिस ने इस मामले का खुलासा किया
दो पर पहले भी हुई कार्रवाई
पकड़े गए मयंक चौबे पर पुलिस ने 2013 में यूपी गुण्डा एक्ट की कार्रवाई की थी। जबकि जितेंद्र पाठक पर पुलिस ने 2014 में जुआ अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी।
इस टीम ने किया खुलासा
खुलासा करने वाली टीम में बार थानाध्यक्ष रामसहाय सिंह, तालबेहट थानाध्यक्ष निगवेंद्र प्रताप सिंह, बार थाने के पुलिस कर्मचारी सत्यप्रकाश, उमेश पटेल, सुनील कुमार, अमित कुमार, मनोज कुमार, राजबीर सिंह शामिल रहे। खुलासा करने वाली टीम को एडीजी ने 15 हजार रुपये और एसपी ने पांच हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।
परिवार ने जताया खाकी पर विश्वास
अपने बेटे ऋतिक की हत्या के बाद पुलिस की हीलाहवाली से क्षुब्ध मां प्रीति का पुलिस से भरोसा उठ गया था। रविवार को खुलासे के दौरान आरोपियों को देख पीड़ित परिवार फफक-फफक कर रो पड़ा। ऋतिक की मां ने बताया कि न्याय न मिलते देख खाकी से भरोसा उठ गया था। लेकिन बार थानाध्यक्ष ने इस हत्याकांड का खुलासा कर मेरा खाकी पर फिर से विश्वास लौटा दिया है।